पेमेंट एग्रीगेटर लाइसेंस पाने के लिए लगी कतार, टाटा-रिलायंस समेत 30 से ज्यादा कंपनियों ने किया आवेदन

पिछले साल मार्च में आरबीआई ने पेमेंट एग्रीगेटर और पेमेंट गेटवे को लेकर नई गाइडलाइंस जारी की थीं। इनके तहत मर्चेंट को पेमेंट सेवाएं देने वाली कंपनियों के लिए आरबीआई की मंजूरी को अनिवार्य किया गया था। इसके तहत ही इन कंपनियों ने लाइसेंस पाने के लिए आवेदन किया है।

Reserve Bank of India, RBI रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने मार्च 2020 में पेमेंट एग्रीगेटर से जुड़ी नई गाइडलाइंस जारी की थीं।

देश में डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) पेमेंट एग्रीगेटर्स का लाइसेंस दे रहा है। यह लाइसेंस आरबीआई की आने वाली नॉन-बैंक पेमेंट प्रोवाइडर्स रेगुलेटरी प्रणाली के तहत दिए जा रहे हैं। इस लाइसेंस के लिए रिलायंस इंडस्ट्रीज और टाटा ग्रुप समेत कई कंपनियों ने आवेदन किया है।

इस मामले से वाकिफ सूत्रों के हवाले से ईटी की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि जिन कंपनियों ने आरबीआई के पास अगले चरण के आवेदन जमा कराए हैं, उनमें रिलायंस इंडस्ट्रीज, टाटा ग्रुप, अमेजन, डच पेमेंट्स स्टार्टअप एडयेन, पेटीएम, भारतपे, फोनपे, सीसी एवेन्यू, रेजरपे, क्रेड, जोमैटो, पेयू, वर्ल्डलाइन, पाइन लैब्स और कैमपसे शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक, करीब 30 कंपनियों ने अपने प्रस्ताव आरबीआई के पास जमा किए हैं।

30 सितंबर तक किए जा सकते हैं आवेदन: पेमेंट एग्रीगेटर का लाइसेंस पाने के लिए आवेदन करने की अंतिम तारीख 30 सितंबर 2021 है। सूत्रों का कहना है कि इस तारीख तक मौजूदा और नॉन-बैंक कंपनियां आवेदन कर सकते हैं। ऐसे में अंतिम तारीख खत्म होने तक आवेदन करने वाली कंपनियों की संख्या में बढ़ोतरी हो सकती है।

आरबीआई के निर्देशन में काम करेंगी कंपनियां: आरबीआई के प्रस्ताव के मुताबिक, पेमेंट एग्रीगेटर का लाइसेंस पाने वाली कंपनियां पूरे देश में काम कर सकेंगी। इन कंपनियों को आरबीआई के निर्देशन में काम करना होगा। यह कंपनियां मर्चेंट्स को पेमेंट सर्विसेज दे सकेंगी। इंडस्ट्री से जुड़े लोगों के मुताबिक, आरबीआई के इस कदम से ज्यादा स्टैंडर्डाइज्ड और रेगुलेटिड पेमेंट इकोसिस्टम तैयार होगा।

आरबीआई ने पिछले साल जारी की थीं गाइडलाइंस: रिजर्व बैंक ने मार्च 2020 में पेमेंट एग्रीगेटर/पेमेंट गेटवे से जुड़ी नई गाइडलाइंस जारी की थीं। इसमें मर्चेंट्स को पेमेंट सेवाएं देने वाली कंपनियों के लिए आरबीआई की मंजूरी को अनिवार्य कर दिया था। हालांकि, रेगुलेटिड बैंकों को अलग से मंजूरी से छूट दी गई थी। आरबीआई के नियमों के मुताबिक, पेमेंट एग्रीगेटर की मंजूरी पाने के लिए कंपनियों का पहले साल में कम से कम 15 करोड़ की नेटवर्थ होनी जरूरी है। दूसरे साल में यह बढ़कर 25 करोड़ रुपए होनी चाहिए।