प्रधानमंत्री मोदी आज करेंगे मन की बात, 74वें एडिशन में कर सकते हैं आगामी विधानसभा चुनावों पर बात

पीएम मोदी इस संस्करण में आगामी महीनों में होने वाली परीक्षाओं को लेकर छात्रों को भी सलाह दे सकते हैं।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज 11 बजे अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम- ‘मन की बात’ के जरिए देशवासियों को संबोधित कर रहे हैं। कार्यक्रम के 74वां संस्करण में पीएम ने पानी के महत्व को बताते हुए कहा कि पानी को लेकर हमें इसी तरह अपनी सामूहिक जिम्मेदारियों को समझना होगा। पीएम ने नेशनल साइंस डे, आत्मनिर्भर भारत, आने वाली परीक्षाओं और भारतीय भाषाओं के प्रचार-प्रसार को लेकर भी कार्यक्रम में बात की।

पीएम ने छात्रों से कहा कि अधिकतर युवाओं की जल्द परीक्षाएं होंगी। उन्होंने कहा कि छात्रों को वॉरियर बनना है, वरियर नहीं। हंसते हुए एग्जाम देने जाना है और मुस्कुराते हुए लौटना है। इसी के साथ पीएम ने ‘परीक्षा पे चर्चा’ मार्च में रखने का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि मेरी आप सभी एग्जाम वॉरियर्स से, पैरेंट्स से, और टीचर्स से, अपील है कि अपने अनुभव, अपने टिप्स जरूर शेयर करें | आप MyGov और NarendraModi App पर इन्हें शेयर कर सकते हैं मार्च मे होने वाली चर्चा से पहले मेरी आप सभी से चर्चा है कि अपने अनुभव, अपने टिप्स जरूर शेयर करें।

‘कमेंट्री से होता है भाषाओं का प्रचार-प्रसार’: प्रधानमंत्री ने भारत की स्थानीय भाषाओं की अहमियत बताते हुए कहा, “ऐसी अनेक भाषाओं की स्थली है, जो हमारी संस्कृति और गौरव का प्रतीक है।” पीएम ने इस दौरान गुजरात के केवड़िया की एक ऑडियो क्लिप भी सुनाई। इसी के साथ उन्होंने कहा, “जिन खेलों में कमेंट्री समृद्ध है, उनका प्रचार-प्रसार बहुत तेजी से होता है। हमारे यहां भी बहुत से खेल हैं लेकिन उनमें कमेंट्री कल्चर नहीं आया है और इस वजह से वो लुप्त होने की स्थिति में हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय खेलों की कमेंट्री अधिक से अधिक भाषाओं में हो, हमें इसे प्रोत्साहित करने की जरूरत है। मैं खेल मंत्रालय और प्राइवेट संस्थानों के सहयोगियों से इस बारे में सोचने का आग्रह करेंगे।”

‘आत्मनिर्भर भारत हमारा माथा ऊंचा करने वाला अभियान’: पीएम ने आत्मनिर्भर भारत का महत्व बताते हुए कहा, “जब हम आसमान में हम अपने देश में बने फाइटर प्लेन तेजस को कलाबाजिंयां खाते देखते हैं, तब भारत में बने टैंक, मिसाइलें हमारा गौरव बढ़ाते हैं। जब हम दर्जनों देशों तक मेड इन इंडिया वैक्सीन को पहुंचाते हुए देखते हैं तो हमारा माथा और ऊंचा हो जाता है।” मोदी ने कहा, “जब प्रत्येक देशवासी गर्व करता है, प्रत्येक देशवासी जुड़ता है, तो आत्मनिर्भर भारत, सिर्फ एक आर्थिक अभियान न रहकर एक नेशनल स्पिरिट बन जाता है।”

उन्होंने कहा, “भारत के ज्यादातर हिस्सों में मई-जून में बारिश शुरू होती है। क्या हम अभी से अपने आसपास के जलस्रोतों की सफाई के लिए, वर्षा जल के संचयन के लिए, 100 दिन का कोई अभियान शुरू कर सकते हैं? इसी सोच के साथ अब से कुछ दिन बाद जल शक्ति मंत्रालय द्वारा भी जल शक्ति अभियान कैच द रेन शुरू किया जा रहा है।”

पीएम ने बताया कि इस अभियान का मूल मंत्र है- कैच द रेन, वेयर इट फॉल्स। हम अभी से जुटेंगे, हम से जो रेनवॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम है, उसे दुरुस्त करवाएंगे। तालाबों में, पोखरों में गांवों में सफाई करवा लेंगे। जलस्रोतों तक जा रहे पानी के रास्ते की रुकावटें दूर कर लेंगे तो ज्यादा से ज्यादा वर्ष जल का संचयन कर पाएंगे।

‘युवाओं को नया सोचने में संकोच नहीं करना चाहिए’: पीएम ने रविदास जयंती के एक दिन बाद उन्हें नमन करते हुए कहा, “हमारे युवाओं को संत रविदास जी से कुछ बातें जरूर सीखनी चाहिए। युवाओं को किसी भी काम के लिए खुद को पुराने तौर-तरीकों से नहीं बांधना चाहिए। आप अपने जीवन को खुद ही तय करिए। अपने तौर-तरीके खुद बनाएं और अपने लक्ष्य भी खुद ही तय करेंष अगर आपका विवेक और आत्मविश्वास मजबूत है, तो आपको दुनिया की किसी चीज से डरने की जरूरत नहीं है। कई बार युवा एक चली आ रही सोच के दबाव में वह काम नहीं कर पाते, जो उन्हें पसंद होता है। इसलिए आपको नया सोचने में कभी संकोच नहीं करना चाहिए।”

उन्होंने आगे कहा, जब भी माघ महीने और इसके आध्यात्मिक सामाजिक महत्त्व की चर्चा होती है तो ये चर्चा एक नाम के बिना पूरी नहीं होती। ये नाम है संत रविदास जी का। ये मेरा सौभाग्य है कि मैं संत रविदास जी की जन्मस्थली वाराणसी से जुड़ा हुआ हूं। संत रविदास जी ने एक और महत्वपूर्ण संदेश दिया है। संदेश है अपने पैरों पर खड़ा होना। हम अपने सपनों के लिए दूसरे पर निर्भर रहें, ये बिल्कुल ठीक नहीं। आज हम देखते हैं कि देश का युवा भी इस सोच के पक्ष में नहीं है।”

‘भारत के वैज्ञानिकों, इतिहास को जानें युवा’: पीएम ने कहा, “आज ‘नेशनल साइंस डे’ भी है। आज का दिन भारत के महान वैज्ञानिक, डॉक्टर सी.वी. रमन जी द्वारा की गई ‘Raman Effect’ खोज को समर्पित है। मोदी ने कहा कि मैं जरूर चाहूंगा कि हमारे युवा भारत के वैज्ञानिक- इतिहास को, हमारे वैज्ञानिकों को जानें, समझें और खूब पढ़ें। प्रधानमंत्री ने आगे कहा, “जब हम साइंस की बात करते हैं तो कई बार इसे लोग फिजिक्स-केमिस्ट्री या फिर लैब्स तक ही सीमित कर देते हैं, लेकिन साइंस का विस्तार इससे कहीं ज्यादा है और ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान’ में साइंस की शक्ति का बहुत योगदान है।

कुछ लोग समझते हैं कि इनोवेशन करने के लिए आपका साइंटिस्ट होना जरूरी है, कुछ सोचते हैं कि दूसरों को कुछ सिखाने के लिए आपका टीचर होना जरूरी है। इस सोच को चुनौती देने वाले व्यक्ति हमेशा सराहनीय होते हैं।