प्रशांत किशोर जब बता दिए गए थे फ्रॉड, तब खूब अखरी थी यह बात; आंखें खोलने वाली घटना का जिक्र कर बोले थे- गाली भी बहुत पड़ती है…

पीके ने बताया कि उन्होंने इस बारे में राहुल गांधी को भी सूचित किया था। कहा, “मैंने राहुल को भी मैसेज किया था। हंसी की ही बात थी, पर भेजा। सीएम आपका, पार्टी आपकी, फायदे आपके और हम आंध्र प्रदेश में आकर झक्क मार रहे हैं। गालियां मुझे पड़ रही थीं। फ्रॉड मुझे कह रहे हैं। तो कहीं न कहीं इस ने मुझे…।”

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चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर को पंजाब में चुनाव के दौरान फ्रॉड तक बता दिया था। उन्हें तब लोगों की खूब खरी-खोटी सुनने के साथ “गालियां” भी पड़ी थीं। यह बात उन्हें खासा अखरी थी, जिसे उन्होंने खुद आंखें खोलने वाली घटना करार दिया था। कहा था कि लोग वादे करने वालों से अधिक वादे कराने वालों को खोज लेते हैं और खूब गालियां देते हैं।

यह किस्सा पीके ने न्यूज वेबसाइट ‘दि लल्लनटॉप’ से बातचीत के दौरान सुनाया था। दरअसल, पत्रकार ने उनसे खुद के स्पॉटलाइट में आने से जुड़ा सवाल किया था। चुनावी रणनीतिकार ने जवाब दिया था, “बेबसी भी है। कई बार आप लाचार महसूस करते हैं। जीत कर भी वह चीज नहीं कर पाते हैं, जो करना चाहते हैं।” पंजाब की घटना का जिक्र करते हुए वह आगे बोले- वहां जो संविदाकर्मियों को लेकर मैंने एक वादा किया था। पंजाब में नौ वादों को लेकर चुनाव प्रचार किया था, जिसमें संविदाकर्मियों को लेकर भी था। पता लगा कि वे एक साल से धरने पर हैं। सीएम से मिल नहीं पा रहे थे, तो उन्होंने अखबार में ऐड निकाल दिया। कहा था कि जो सीएम से मिलवा देगा, तो एक लाख रुपए ईनाम देंगे।”

बकौल पीके, “AAP के विधायक अमन अरोड़ा ने उस विज्ञापन को ट्वीट किया और लिखा कि प्रशांत किशोर देश का सबसे बड़ा फ्रॉड है। ऐसा इसलिए, क्योंकि चुनाव के पहले कॉफी विथ कैप्टन, घर-घर कैप्टन और हर जगह कैप्टन। पर चुनाव के बाद कहीं नहीं कैप्टन। इसलिए इस आदमी (पीके को) को बुलाओ और जनता के सामने खड़ा किया जाए।” पीके ने बताया कि उन्होंने इस बारे में राहुल गांधी को भी सूचित किया था। कहा, “मैंने राहुल को भी मैसेज किया था। हंसी की ही बात थी, पर भेजा। सीएम आपका, पार्टी आपकी, फायदे आपके और हम आंध्र प्रदेश में आकर झक्क मार रहे हैं। गालियां मुझे पड़ रही थीं। फ्रॉड मुझे कह रहे हैं। तो कहीं न कहीं इस ने मुझे…।”

पीके के अनुसार, “मेरे दिमाग में ऐसा आया कि लोग वादे करने वाले से अधिक कराने वाले को ढूंढ लेते हैं। नेता अगर कर रहा है काम तब तो फायदा है, पर नहीं कर रहा है, तब गालियां भी बहुत पड़ती हैं। इसलिए मुझे लगा कि समय आ गया है कि इसे छोड़ना है, क्योंकि दूसरा गलती करता है और लंबे समय तक लोग आपको फ्रॉड मानने लगते हैं। पर असल में तो यह बात होती नहीं है। यह मेरे लिए आई ओपनर (आंखें खोलने वाली घटना) था।”