प. बंगाल की महिला से रेप मामले में SKM ने कहा- टिकरी बार्डर पर अब नहीं है किसान सोशल आर्मी का टेंट, आरोपियों को किया बैन

मंगलवार को हुई प्रेस कांफ्रेंस में पीड़िता के पिता ने कहा कि उन्होंने किसान सोशल आर्मी से जुड़े अनिल मानिक और अनूप चनौत के खिलाफ ही मामला दर्ज करवाया था लेकिन पुलिस ने मदद करने वालों के खिलाफ भी मामला दर्ज कर लिया।

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टिकरी बॉर्डर पर किसान आंदोलन में शामिल होने आई पश्चिम बंगाल की लड़की के साथ हुए रेप के मुद्दे पर संयुक्त किसान मोर्चा ने अपना बयान जारी किया है। हालांकि लड़की की मौत पिछले दिनों कोरोना संक्रमण की वजह से हो गई थी। लड़की की मौत के बाद उसके पिता ने हरियाणा के बहादुरगढ़ थाने में रेप की शिकायत दर्ज कराई थी और उसमें किसान सोशल आर्मी नाम के संगठन के कुछ सदस्यों को आरोपी बनाया गया था।

युवती के साथ हुए रेप का मामला तूल पकड़ता देख संयुक्त किसान मोर्चा ने अपना बयान किया जारी किया। संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा कि उनके कहने पर ही पीड़िता के पिता ने शिकायत दर्ज करवाई है। साथ ही मोर्चा ने कहा कि मामला सामने आने के बाद 5 मई को ही किसान सोशल आर्मी के टेंट और बैनर हटवा दिए गए थे। साथ ही आरोपियों को आंदोलन से बहिष्कृत करने और उनके सामाजिक बहिष्कार की घोषणा भी की गई थी।

हालांकि मंगलवार को हुई प्रेस कांफ्रेंस में संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं के साथ पीड़िता के पिता भी मौजूद थे। पीड़िता के पिता ने कहा कि उन्होंने किसान सोशल आर्मी से जुड़े अनिल मानिक और अनूप चनौत के खिलाफ ही मामला दर्ज करवाया था लेकिन पुलिस ने मदद करने वालों के खिलाफ भी मामला दर्ज कर लिया। पिता ने कहा कि मामला संज्ञान में आने के बाद संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं ने उनसे एफआईआर करने का आग्रह किया था और कहा था कि आप थाने में इसकी शिकायत करें नहीं तो मोर्चा खुद ही इसकी शिकायत करेगा।

पश्चिम बंगाल की युवती के साथ हुए रेप के मामले में अनिल मानिक और अनूप चनौत सहित 6 लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई थी। इसमें दो महिलाएं भी शामिल थी. इन सभी लोगों के खिलाफ IPC की धारा 365, 342, 354, 376 D और 120 बी के तहत गैंगरेप, अपहरण, ब्लैकमेलिंग और बंधक बनाकर रखने का मामला दर्ज किया गया था। कोरोना संक्रमण के चलते लड़की की मौत 30 अप्रैल को हो गई थी। 

बता दें कि तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का आंदोलन लगातार जारी है। पिछले पांच महीने से अधिक समय से किसान दिल्ली के बॉर्डर पर बैठे हुए हैं। किसान तीनों कानूनों को वापस करने की मांग पर अड़े हुए हैं। सरकार और किसान संगठनों के बीच गतिरोध जारी है।