फंसे लोगों को दूध, लस्सी और फल देंगे’, राकेश टिकैत ने रेल रोको कार्यक्रम पर कहा- लोगों को बताएंगे समस्या

मीडिया से बातचीत करते हुए राकेश टिकैत ने कहा कि ‘हम फंसे हुए लोगों को पानी, दूध, लस्सी और फल मुहैया कराएंगे। हम उन्हें अपनी समस्याओं से अवगत भी कराएंगे।’

FARMERS PROTEST

केंद्र के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों ने आज रेल रोकने का ऐलान किया है। किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि यह कार्यक्रम 12 बजे से शुरू होगा और 3-4 बजे तक चलेगा। राकेश टिकैत ने भरोसा दिलाया है कि यह प्रदर्शन पूरी तरीके से शांतिपूर्ण होगा। मीडिया से बातचीत करते हुए राकेश टिकैत ने कहा कि ‘हम फंसे हुए लोगों को पानी, दूध, लस्सी और फल मुहैया कराएंगे। हम उन्हें अपनी समस्याओं से अवगत भी कराएंगे।’

भारतीय किसान यूनियन ने अपील की है कि यात्रियों को किसी भी तरह की हिंसा या परेशानी नहीं आने दी जाएगी। संगठन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि आंदोलनकारी इस बात का पूरा ध्यान रखेंगे कि यात्रियों को किसी समस्या का सामना न करना पड़े। उन्होंने यह भी कहा कि ‘हम लोगों को पानी, दूध, लस्सी और फल आदि देंगे और उन्हें बताएंगे कि हमारी समस्या क्या है।’

टिकैत ने इस अभियान को लेकर कहा कि, “ट्रेन चल ही कहां रही है? एक दो ही ट्रेन चल रही है। हम सरकार से ये भी कहेंगे कि ट्रेन और भी चलवाओ। जनता दुखी हो रही है, सरकार ने इन ट्रेनों को रोका हुआ है बीते 8 महीनों से। जो ट्रेन आएगी उसको रोक कर हम यात्रियों को पानी पिलायेंगे, फूल चढ़ाएंगे और बताएंगे कि क्या क्या समस्याएं हो रही हैं।”

ट्रेन रोकी जाएगी तो कहीं ऐसा तो नहीं कि यात्रियों से दुर्व्यवहार किया जाएगा? इस सवाल के जवाब में टिकैत ने कहा, “कौन करेगा दुर्व्यवहार? जो भी करेगा उन पर कार्रवाई की जाएगी। ट्रेन रोको अभियान शांतिपूर्ण होगा। यात्रियों को चने बांटेंगे, दूध और पानी पिलाएंगे। ” हालांकि किसान संगठन इस अभियान को सांकेतिक बता रहें हैं लेकिन पुलिस-प्रशासन व रेलवे ने इससे निपटने के लिए तैयारियां मुकम्मल कर ली हैं। वहीं सिंघु, टीकरी और अन्य उन जगहों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है, जहां प्रदर्शनकारी धरने पर बैठे हुए हैं।

टिकैत ने सोनीपत के गाजीपुर बार्डर पर पहुंचे केरल के किसानों के जत्थे का स्वागत किया। इस दौरान उन्होंने देशभर के किसानों को साथ लाने की बात कही। राकेश टिकैत ने कहा “हम किसानों को एक मंच पर लाने की कोशिश कर रहे हैं। इसके लिए देशभर में महापंचायत करेंगे। हम पश्चिम बंगाल से लेकर मोदी के गृहराज्य गुजरात तक जाएंगे। वहां भी किसान महापंचायत होगी। उसके बाद उधर से एक बड़ा आंदोलन होगा। सरकार को कृषि कानूनों को वापस लेने के लिए बाध्य किया जाएगा।”