फिर से 90 दिनों के भीतर मुकदमा दायर करने की मिलेगी सहूलियत- सुप्रीम कोर्ट ने दिए संकेत

कोरोना के घटते मामलों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वह अपने 27 अप्रैल के उस आदेश को वापस ले लेगा, जिससे मामलों को दायर करने की सीमा अवधि बढ़ा दी गई थी। मामले की सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल ने कहा कि अवधि में ढील देने वाले आदेश को वापस लिया जा सकता है।

supreme court सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि वह अपने 27 अप्रैल के आदेश को वापस ले लेगा, जिससे मामलों को दायर करने की सीमा अवधि बढ़ा दी गई थी। कोर्ट ने ये बातें कोरोना के घटते प्रभाव को देखते हुए कहा है।

दूसरी कोविड लहर की शुरुआत को ध्यान में रखते हुए 27 अप्रैल, 2021 को सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव याचिकाओं सहित अन्य याचिका दायर करने की वैधानिक अवधि में ढील दी थी। सीजीआई, न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति सूर्य कांत की पीठ ने कहा कि एक अक्टूबर को सीमा अवधि का स्वत: विस्तार वापस ले लिया जाएगा और उसके बाद, अदालतों में मामले दर्ज करने के लिए 90 दिनों की सामान्य सीमा एक बार फिर से लागू होगी। हम आदेश पारित करेंगे, ”पीठ ने आदेश को सुरक्षित रखते हुए कहा।

पीठ ने इस दलील को “निराशावादी” करार दिया कि सीमा अवधि को साल के अंत तक बढ़ाया जाए क्योंकि देश में तीसरी कोविड लहर की आशंका है। सीजीआई ने कहा- “आप निराशावादी हैं। कृपया तीसरी लहर को आमंत्रित न करें।

शुरुआत में, अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने कहा कि कोविड की स्थिति में सुधार हुआ है और वर्तमान में देश में कोई कंटेनमेंट जोन नहीं है और इसलिए सीमा अवधि में ढील देने वाले आदेश को वापस लिया जा सकता है। उन्होंने कहा, “अगर केरल या किसी अन्य स्थान पर कोई कंटेनमेंट जोन है तो वे अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं।”

वेणुगोपाल ने सुझाव दिया कि सुप्रीम कोर्ट के 8 मार्च, 2021 के आदेश को बहाल किया जा सकता है। चुनाव आयोग की ओर से पेश सीनियर वकील विकास सिंह ने कहा कि चुनाव याचिका दायर करने के लिए 90 दिनों के बजाय 45 दिनों की सीमा अवधि दी जाए और वादियों के खिलाफ वैधानिक अवधि 1 अक्टूबर के बजाय अब से चलना शुरू हो जाए।

चुनाव आयोग ने अपनी याचिका में असम, केरल, दिल्ली, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों से संबंधित चुनाव याचिका दायर करने की समयसीमा तय करने की मांग की है। सिंह ने कहा कि ईवीएम और वीवीपैट मशीनें ऐसी ही पड़ी हैं, क्योंकि छह राज्यों में विधानसभा चुनावों के संबंध में चुनाव याचिका दायर होने पर उन्हें सबूत के रूप में संरक्षित किया जाना है।

इससे पहले, शीर्ष अदालत ने पिछले साल 23 मार्च को संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी पूर्ण शक्ति का इस्तेमाल करते हुए 15 मार्च, 2020 से महामारी के कारण अदालतों से अपील के लिए अनिश्चित काल के लिए सीमा अवधि बढ़ाने के लिए कहा था।