बंगालः प्रशांत किशोर को था भाजपा की ताकत का अंदाजा, चाहते थे उतारा जाए मुख्यमंत्री का उम्मीदवार

उन्होंने कहा कि किसी का नाम लेकर व्यक्तिगत और नकारात्मक टिप्पणी करने से जनता ऊब चुकी है। कहा कि धर्म और अतिराष्ट्रवादी जैसी चीजों के अलावा भाजपा के पास नया क्या है।

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चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर का कहना है कि पीएम मोदी निसंदेह देश के सबसे लोकप्रिय नेता हैं, लेकिन पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी को हराने के लिए उनकी लोकप्रियता ही काफी नहीं थी। यह एक विधानसभा चुनाव है। एक मीडिया इंटरव्यू में उन्होंने कहा, “हमें उनकी ताकत का अंदाजा था।” लेकिन दीदी तृणमूल की केंद्रबिंदु हैं। वह पार्टी को नियंत्रित करती हैं और वह बंगाल की सबसे लोकप्रिय नेता हैं। किसी की के पास इतनी ऊर्जा, धैर्य और पहचान नहीं है।

उन्होंने कहा कि भाजपा ने बंगाल में अपनी रणनीति के तहत मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित नहीं किया। यह उनके लिए बेहतर बात है, लेकिन अगर वे दीदी के सामने किसी चेहरे को पेश करते तो यह हमारे लिए अच्छा होता। हमारे लिए चीजें और आसान हो जातीं। प्रशांत किशोर ने कहा “सीएम ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी के बारे में जितने भी आरोप लगाए गए, वे सब दीदी को भ्रष्ट साबित करने के लिए लगाए गए। किसी के खिलाफ व्यक्तिगत टिप्पणी करना भाजपा की परंपरा रही है। इससे मुझे नहीं लगता है कि पार्टी को कोई फायदा होता है।”

उन्होंने कहा कि किसी का नाम लेकर व्यक्तिगत और नकारात्मक टिप्पणी करने से जनता ऊब चुकी है। कहा कि धर्म और अतिराष्ट्रवादी जैसी चीजों के अलावा भाजपा के पास नया क्या है। 2002 में सोशल मीडिया पर निरंतर जहरीले झूठ और बेबुनियाद आरोपों से ध्रुवीकरण के स्तर का निर्माण करने का हमें अहसास है। हम हर वक्त संघर्ष कर रहे हैं। कहा कि जनता को हर वक्त मुर्ख नहीं बनाया जा सकता है।

वे बोले, “मैं चीजों को आधे-अधूरे मन से नहीं करता, मुझे पता रहता है कि जो काम या चुनौती मैं लेता हूं उसे कैसे करना है। राजनीतिक पंडित और टिप्पणीकार उन पर तमाम बातें कह सकते हैं। बंगाल कठिन है, लेकिन मुझे अब भी विश्वास है कि मेरा सबसे कठिन अभियान कैप्टन अमरिंदर सिंह के लिए पंजाब में जीतना होगा। हर लड़ाई अलग-अलग होती है।

बंगाल चुनाव में दो नारे रहे। एक ममता बनर्जी को बंगाल की बेटी के रूप में पेश करना यानी बांग्लार मेये। यह आपको एक रक्षक और प्रदाता की भावना देती है, जो आपके लिए एक छाया है। दूसरा खेला होबे एक संघर्ष है। भाजपा अक्सर विरोधियों को डराने की कोशिश करती है। वह यह साबित करने की कोशिश करती है कि वह पहले ही युद्ध जीत चुकी है। वास्तव में जीतने से पहले ही जीत की घोषणा कर देती है। खेला होबे कहता है, नहीं, अपने घोड़ों को पकड़ो, हम डरे हुए नहीं हैं, हम यहां तुम्हारा सामना करने और तुम्हें हराने के लिए हैं। हम मैदान में लड़ाई के लिए तैयार हैं।