बंगालः प्रशांत किशोर को था भाजपा की ताकत का अंदाजा, चाहते थे उतारा जाए मुख्यमंत्री का उम्मीदवार

बीजेपी पर हमला करते हुए पीके ने कहा कि लोग इस तरह के व्यक्तिगत हमलों और नकारात्मक प्रचार से तंग आ चुके हैं। धर्म और अति-राष्ट्रवाद के गठजोड़ के अलावा भाजपा के पास बचता ही क्या है?

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बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने शानदार जीत दर्ज की है। टीएमसी के लिए प्रशांत किशोर ने चुनावी रणनीति बनायी थी। टेलीग्राफ के साथ बात करते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि वो चाहते थे कि बीजेपी की तरफ से मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार की घोषणा की जाए। उन्होंने कहा कि अगर बीजेपी ऐसा करती तो टीएमसी के लिए चुनाव और भी आसान हो जाता।

प्रशांत किशोर ने कहा कि मैं बीजेपी की रणनीति पर कुछ भी नहीं कहना चाहूंगा। ये सच है कि उनके पास नेताओं की कमी थी। लेकिन मुझे लगता है कि मुख्यमंत्री पद के लिए चेहरा पेश नहीं करना बीजेपी की बेहतर रणनीति थी। क्योंकि अगर वो दीदी के खिलाफ एक चेहरा पेश करते तो हमारे लिए चीजें आसान हो जाती। बीजेपी का प्रचार ममता बनर्जी पर आरोप लगाने पर ही केंद्रित था। नकारात्मक प्रचार करना ही बीजेपी की शैली है। उन्होंने कहा कि मुझे नहीं लगता है कि इससे उन्हें बहुत अधिक लाभ मिला होगा।

बीजेपी पर हमला करते हुए पीके ने कहा कि लोग इस तरह के व्यक्तिगत हमलों और नकारात्मक प्रचार से तंग आ चुके हैं। धर्म और अति-राष्ट्रवाद के गठजोड़ के अलावा भाजपा के पास बचता ही क्या है?

बताते चलें कि देश में चार राज्य और एक केंद्र शासित प्रदेश के लिए 2 मई को जब मतगणना चल रही थी तब ही प्रशांत किशोर ने मीडिया से बात करते हुए घोषणा कर दी थी कि अब वो चुनावी रणनीति बनाने के कार्य से अपने आप को अलग कर रहे हैं। उन्होंने कहा था कि अब वो यह जगह खाली कर रहे हैं। अब वह इस पेशे को छोड़ रहे हैं। जब उनसे पूछा गया कि अब वो क्या करेंगे तो उन्होंने कहा कि अभी उन्हें इसके बारे में सोचना होगा।

गौरतलब है कि बंगाल में हुए विधानसभा चुनाव में टीएमसी ने शानदार जीत दर्ज की है। टीएमसी को 213 सीटों पर जीत मिली। भारतीय जनता पार्टी ने 77 सीटों पर जीत दर्ज किया और लेफ्ट-कांगेस गठबंधन का इस चुनाव में खाता भी नहीं खुला। ममता बनर्जी लगातार तीसरी बार बंगाल की मुख्यमंत्री बनी है।