बंगाल चुनावः नंदीग्राम में ममता ने कर दिया “खेल”, 1200 वोट से BJP में गए बागी शुभेंदु को दी मात; कभी TMC सरकार में थे नंबर-2

बंगाल का ये चुनाव भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक अलग जगह रखेगा। पीएम मोदी के नेतृत्व में बीजेपी ने वो सारे दांव खेले जिनसे ममता को ठिकाने लगाया जा सके। शिवसेना सांसद संजय राउत ने कहा कि ममता ने मोदी और शाह को बता दिया कि उन्हें भी हराया जा सकता है।

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इसे कहते हैं नहले पर दहला। बीजेपी की तमाम कोशिशों के बावजूद ममता बनर्जी ने उसे न केवल 100 से नीचे के आंकड़े पर समेट दिया बल्कि नंदीग्राम सीट पर शुभेंदु को पटखनी भी दे डाली। शुभेंदु कभी ममता सरकार में नंबर दो की हैसियत रखते थे। हालांकि, नंदीग्राम का चुनाव बेहद नजदीकी रहा। आखिरी समय तक चली जद्दोजहद में ममता ने आखिरकार शुभेंदु को 12 सौ वोट से मात दे दी।

बंगाल का ये चुनाव भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक अलग जगह रखेगा। पीएम मोदी के नेतृत्व में बीजेपी ने वो सारे दांव खेले जिनसे ममता को ठिकाने लगाया जा सके। लेकिन ममता ने खेला होबे का नारा देकर जता दिया कि उन्हें घेर पाना इतना आसान नहीं है। ममता ने आखिरी समय तक एक योद्धा की तरह से लड़ाई लड़ी और जीती। बीजेपी ने उन्हें घेरने में कोई कोर कसर बाकी नहीं रखी।

चुनाव शुरू होने से पहले तृणमूल के नेताओं को तोड़कर अपने पास लाने का सिलसिला बीेजेपी लंबे अर्से से चला रही थी। मुकुल रॉय से शुरुआत हुई और फिर दिनेश त्रिवेदी, राजीव बनर्जी जैसे नेता बीजेपी के पाले में आ गए। लेकिन सबसे ज्यादा हैरत लोगों को तब हुई जब ममता के खासमखास रहे शुभेंदु अधिकारी बीजेपी के हो गए। पहले वो खुद भगवा दल में गए। फिर उनके भाई और पिता शिशिर बनर्जी।

शुभेंदु की दगाबाजी से ममता आहत थीं। यही वजह रही कि उन्होंने खुद नंदीग्राम से चुनाव लड़ने का फैसला किया। ममता मे हुंकार भरी और अपना नामांकन दाखिल कर दिया। उनका यह कदम बीजेपी को भी हैरत में डालने वाला था। यही वजह रही कि नंदीग्राम को फोकस करते हुए पीएम मोदी और गृह मंत्री अणित शाह ने ताबड़तोड़ रैलियां कीं। ममता के आत्मविश्वास को डिगाने के लिए ये प्रचार भी किया गया कि वो दूसरी सीट से नामांकन दाखिल करने की फिराक में हैं। ममता इससे पहले भवानीपुर से चुनाव लड़ती रही थीं।

अलबत्ता ममता ने बीजेपी के दबाव में आने से साफ तौर पर इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, नंदीग्राम में शुभेंदु उनकी वजह से थे। वो शुभेंदु की वजह से नहीं थीं। वो दूसरी सीट से चुनाव लड़ने नहीं जा रही हैं। वो नंदीग्राम में शुभेंदु को पटखनी देकर अधिकारी परिवार को उसकी हैसियत बताना चाहती हैं। ममता ने आखिरी तक शुभेंदु को निशाने पर रखा। उन्हें मीरजाफऱ जैसी संज्ञा भी दी।

हालांकि, रविवार को नंदीग्राम का परिणाम शुरू से ही उतार चढ़ाव वाला रहा। कभी शुभेंदु 7 हजार से आगे निकले तो कभी ममता 27 सौ से आगे हो गईं। आखिरी चरण तक पता ही नहीं चल पा रहा था कि ऊंट किस करवट बैठने जा रहा है। लेकिन अंत भला सो सब भला की तर्ज पर एक तरफ तृणमूल ने बंगाल में धमाकेदार जीत दर्ज की तो दूसरी तरफ ममता ने शुभेंदु को ठिकाने लगा दिया। इन सबके बीच खास बात यह रही कि अपना तमाम लाव लश्कर लेकर भी पीएम मोदी और उनके सिपहसालार ममता का बाल बांका तक न कर सके। तृणमूल को शानदार जीत हासिल हुई। ममता की जीत हर मायने में खास है। यही वजह रही कि शिवसेना सांसद संजय राउत ने कहा कि ममता ने मोदी और शाह को बता दिया कि उन्हें भी हराया जा सकता है।

गौरतलब है कि नंदीग्राम सीट की बंगाल की राजनीति में एक खास अहमियत है। ममता बनर्जी के राजनीतिक उत्थान की वजह नंदीग्राम का भूमि अधिग्रहण आंदोलन था। इसमें अधिकारी परिवार ने कंधे से कंधा मिलाकर उनका साथ दिया। ममता ने भी उन्हें अच्छा रिटर्न दिया और परिवार के तकरीबन सभी सदस्यों को बेहतरीन तरीके से एडजस्ट किया। शुभेंदु को उन्होंने अपना सिपहसालार बनाया, लेकिन राजनीतिक महत्वाकांक्षा की वजह से शुभेंदु ने उन्हें छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया। अधिकारी परिवार के इस कदम से ममता बिफऱ गईं और उन्होंने परिवार को जड़ से खत्म करने के लिए नंदीग्राम से ताल ठोक दी।