बंगाल में भाजपा की हार पर बोले संबित पात्रा, विपक्ष ने ममता बनर्जी को माना लीडर, दिल्ली में खेला के लिए स्वागत

न्यूज 18 के एक प्रोग्राम में एंकर ने संबित से बंगाल चुनाव पर सवाल पूछा था। बीजेपी के लोगों के लिए ममता की जीत को हजम करना बहुत मुश्किल है। संबित का जवाब भी कुछ इसी तरह से आया। उनका कहना था कि ये विपक्ष को तय करना है कि ममता की भूमिका क्या होगी। बीजेपी का तो इसमें कोई रोल ही नहीं है।

News 18 India, Live Debate, Mamata banerjee

पश्चिम बंगाल विधान सभा चुनाव में शानदार जीत हासिल करने के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को जगह-जगह से बधाई संदेश आ रहे हैं। मतलब साफ है कि वो अब विपक्ष का सबसे बड़ा चेहरा बन गई हैं। उधर, भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि विपक्ष ने ममता को अपना लीडर मान लिया है। दिल्ली में खेला के लिए उनका स्वागत है।

न्यूज 18 के एक प्रोग्राम में एंकर ने संबित से बंगाल चुनाव पर सवाल पूछा था। बीजेपी के लोगों के लिए ममता की जीत को हजम करना बहुत मुश्किल है। संबित का जवाब भी कुछ इसी तरह से आया। उनका कहना था कि ये विपक्ष को तय करना है कि ममता की भूमिका क्या होगी। बीजेपी का तो इसमें कोई रोल ही नहीं है।

बंगाल चुनाव में टीएमसी ने भौचक करने वाली जीत दर्ज की है। पीएम मोदी समेत उनके तमाम सिपहसालार चुनाव से पहले ही नतीजों को बयां करने लगे थे, लेकिन ममता ने दिखा दिया कि बंगाल को समझने में बीजेपी को अभी देर लगेगी। हालांकि, नन्दीग्राम सीट से वो अपना चुनाव हार गईं। ममता ने कहा है कि वे नन्दीग्राम में हुई शरारत के खिलाफ अदालत जाएंगी। लेकिन इससे उनका कद कम नहीं होता।

बंगाल का ये चुनाव भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक अलग जगह रखेगा। पीएम मोदी के नेतृत्व में बीजेपी ने वो सारे दांव खेले जिनसे ममता को ठिकाने लगाया जा सके। लेकिन ममता ने बता दिया कि उन्हें घेर पाना इतना आसान नहीं है। ममता ने आखिरी समय तक एक योद्धा की तरह से लड़ाई लड़ी और जीती। बीजेपी ने उन्हें घेरने में कोई कोर कसर बाकी नहीं रखी।

चुनाव शुरू होने से पहले तृणमूल के नेताओं को तोड़कर अपने पास लाने का सिलसिला बीेजेपी लंबे अर्से से चला रही थी। मुकुल रॉय से शुरुआत हुई और फिर दिनेश त्रिवेदी, राजीव बनर्जी जैसे नेता बीजेपी के पाले में आ गए। लेकिन सबसे ज्यादा हैरत लोगों को तब हुई जब ममता के खासमखास रहे शुभेंदु अधिकारी बीजेपी के हो गए। पहले वो खुद मोदी खेमे में गए। फिर उनके भाई और पिता शिशिर बनर्जी।
लेकिन नतीजों से साफ है कि इससे ममता को सहानुभूति मिली और ये ही पैंतरा उनकी जीत की सबसे बड़ी वजह बन गया। ऐसी जीत कि बीजेपी के नेता यहां वहां अपना मुंह छिपाते घूम रहे हैं।