बखिया बंधु: मशहूर स्मगलर हाजी मस्तान के गुरु और समुद्र के बेताज बादशाह

बखिया बंधु (Bakhiya Bandhu) ये नाम भले ही मुंबई के इतिहास में प्रमुखता से ना दिखता हो लेकिन वास्तविकता यही है कि हाजी मस्तान से पहले यही स्मगलिंग के बादशाह थे।

bakhiya bandhu haji mastan guru हाजी मस्तान (फोटो- इंडियन एक्सप्रेस)

बखिया बंधु (Bakhiya Bandhu) जुर्म की दुनिया का वो नाम जिससे काम सीखकर लोग अंडरवर्ल्ड डॉन बन गए। जिसके बनाए रास्ते पर हाजी मस्तान चला और मुम्बई का किंग बन गया। एक वाक्य में बोला जाए तो मुम्बई अंडरवर्ल्ड का वो बेताज बादशाह जिसने हाजी मस्तान को समुद्र पर राज करना सिखाया।

लोग हाजी मस्तान (Haji Mastan) को ही स्मगलिंग का किंग मानते रहे हैं, लेकिन वास्तविकता ये है कि जब हाजी मस्तान जिंदगी जीने के लिए संघर्ष कर रहा था, तब बखिया बंधु समुद्र के बेताज बादशाह बन चुके थे। उनका सोना जौहरियों तक पहुंच रहा था। बखिया बंधु इतनी चालाकी से अपने काम को अंजाम देते थे कि पुलिस एक भी मामले में उन्हें सजा नहीं दिला सकी।

बखिया बंधु (Bakhiya Bandhu) यानि कि सुकुर नारायण बखिया और राजनारायण बखिया की जोड़ी, ये जबतक रहे सोने की स्मगलिंग में इनका सिक्का चलता रहा। ना तो तब कोई हाजी मस्तान किंग बन पाया और ना ही कोई दाऊद पनप पाया।

किताब अंडरवर्ल्ड बुलेट्स के अनुसार बखिया बंधु गुजरात के रहने वाले थे। जब मुम्बई पहुंचे तो सोने की तस्करी में हाथ अजमाया। 70-80 के दशक तक आते-आते बखिया बंधु गुजरात, गोवा, दमन और मुंबई के समुद्री तटों के बादशाह बन गए। इनकी मर्जी के बिना यहां कोई भी तस्करी नहीं कर सकता था।

जब हाजी मिर्जा मस्तान मुंबई बंदरगाह पर बतौर कोली भाप से चलने वाली क्रेनों की भट्टियों में कोयला झोक कर अपना और अपने परिवार का पेट पाल रहा था, तब बखिया बंधु की तस्करी का सोना हर जौहरी के पास पहुंच रहा था। हाजी मस्तान (Haji Mastan) को जब समझ में आ गया कि वो कोयला झोक कर सही से दो वक्त की रोटी भी जुटा नहीं पाएगा, तब वो बखिया बंधु की शरण में जा पहुंचा। मस्तान को काम मिला गोदी से सोना निकालने का।

मस्तान यहां बखिया बंधु (Bakhiya Bandhu) का भरोसा जीतने में कामयाब रहा। मस्तान जबतक बखिया बंधु के पास रहा, वफादार बना रहा। यहां उसने सोने की तस्करी के सारे गुर सीखे और नेटवर्क भी बनाया। अब मस्तान अपना धंधा करने की तैयारी करने लगा। उधर बड़े भाई राजनारायण की मौत के बाद से बखिया बंधु में सुकुर नारायण अकेला हो गया।

फिर भी सुकुर नारायण ने हिम्मत नहीं हारी और अपना काम करता रहा। उधर हाजी मस्तान (Haji Mastan) ने अपना खुद का तस्करी का धंधा युसुफ पटेल, वरदा भाई, करीम लाला और लल्लू जोगी के साथ शुरू कर लिया था। इनके बीच इलाकों का बंटवारा हो गया।

उधर अकेले पड़े सुकुर नारायण के खिलाफ पुलिस या कस्टम तस्करी का एक भी मुकदमा दर्ज नहीं कर पाई। जब भी उनका कोई माल पकड़ता, कोई प्यादा आकर उसकी जिम्मेदारी ले लेता। बखिया बंधु कभी भी पुलिस के हाथ नहीं फंसे। राजनारायण की मौत के बाद सुकुर नारायण के खिलाफ जितने भी मामले बने वो मीसा और कोफेपोशा के तहत थे। कई मुकदमे हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक गए लेकिन इन्हें किसी भी मामले में कोई सजा नहीं हुई।

सुकुर नारायण की मौत के बाद ही हाजी मस्तान (Haji Mastan) तस्करी में नंबर वन की कुर्सी हासिल कर पाया। सुकुर नारायण जबतक रहा, मस्तान काम तो करता रहा लेकिन नंबर एक की कुर्सी उसे नहीं मिल पाई थी। सुकुर नारायण की मौत के बाद हाजी मस्तान समुद्र का बेताज बादशाह बन गया।

ऐसा कहा जाता है कि मुंबई की तस्करी की दुनिया में हाजी मस्तान ने भले ही बड़ा मुकाम हासिल कर लिया था, बहुत नाम कमा लिया था लेकिन जो रूतबा बखिया बंधु (Bakhiya Bandhu) का था वो कभी भी हाजी मस्तान को नसीब नहीं हुआ।