बिहार के बाहुबली शहाबुद्दीन की AIIMS में दम तोड़ने की खबर, तिहाड़ जेल ने कहा- कोरोना से नहीं हुई मौत

पुराना ट्वीट डिलीट करते हुए समाचार एजेंसी ANI ने साफ किया, “हम आधिकारिक पुष्टि होने का इंतजार कर रहे हैं। शहाबुद्दीन की मौत पर परिवार के लोगों और आरजेडी प्रवक्ता से अलग-अलग जानकारी मिली थी।”

Shahabuddin, RJD, Bihar

बिहार के बाहुबली मोहम्मद शहाबुद्दीन की मौत हो जाने की खबर गलत बताई जा रही है। तिहाड़ जेल द्वारा ऐसी खबरों को अफवाह करार देने के बाद समाचार एजेंसी ANI ने भी खबर से संबंधित अपना ट्वीट डिलीट कर लिया। कहा, “हम आधिकारिक पुष्टि होने का इंतजार कर रहे हैं। शहाबुद्दीन की मौत पर परिवार के लोगों और आरजेडी प्रवक्ता से अलग-अलग जानकारी मिली।”

दरअसल, कुछ देर पहले एजेंसी ने जानकारी दी थी, “शहाबुद्दीन का एम्स में कोरोना का इलाज चल रहा था और आज सुबह उसकी मृत्यु हो गई।” पुराना ट्वीट डिलीट करने के बीच सोशल मीडिया पर कई लोगों ने कहा कि उनकी कोरोना से जान गई है। कुछ रिपोर्ट्स में राजद के प्रदेश महासचिव निराला यादव के हवाले से बताया गया कि शहाबुद्दीन का निधन हो गया है। यादव ने पत्रकारों को बताया, “दिल्ली से राजद को सूचना मिल गई है।” इससे पहले, राजद एमएलसी सुनील कुमार सिंह ने दावा किया था कि शहाबुद्दीन जिंदा हैं। उसकी मृत्यु की सूचना गलत है। इसी बीच, दिल्ली की तिहाड़ जेल की ओर से साफ किया गया कि शहाबुद्दीन की कोरोना से मौत नहीं हुई है। तिहाड़ जेल के डीजी संदीप गोयल ने मोहम्मद शहाबुद्दीन के निधन की खबर को अफवाह बताया है।

जानकारी के मुताबिक, कुछ रोज पहले सीवान सीट से पूर्व आरजेडी सांसद शहाबुद्दीन कोरोना वायरस संक्रमण की चपेट में आया था।  गैंगस्टर से राजनेता बना शहाबुद्दीन अस्पताल से पहले तिहाड़ में बंद था और हत्या के एक मामले में सजा काट रहा था। बुधवार को उसमें कोरोना वायरस संक्रमण की पुष्टि हुई थी। स्वास्थ्य में गिरावट आने के बाद उसे डीडीयू अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालांकि, तिहाड़ जेल प्रशासन का तब कहना था कि शहाबुद्दीन की तबीयत ठीक है।

दो बार विधानसभा सदस्य और चार बार सांसद रह चुके शहाबुद्दीन के खिलाफ तीन दर्जन से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। तिहाड़ जेल में शिफ्ट किए जाने से पहले उसने बिहार की भागलपुर जेल और सीवान जेल में भी काफी वक्त काटा है। साल 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने उसे सीवान से दिल्ली की तिहाड़ जेल ट्रांसफर करने का आदेश दिया था।

शहाबुद्दीन सबसे अधिक सुर्खियों में सबसे अधिक तब आया था, जब उसने दो भाइयों को तेजाब से नहला कर जिंदा जला दिया था। वैसे, इससे पहले लेफ्ट और बीजेपी कार्यकर्ताओं के साथ खूनी मारपीट के चलते वह चर्चा में आया था। यह बात अस्सी के दशक के आसपास की है। आलम यह था कि उसका नाम ही शाबू-AK 47 पड़ गया था। 1986 में जिस हुसैनगंज थाने में इसके खिलाफ पहला केस हुआ था, वहीं यह ए कैटेगरी का हिस्ट्रीशीटर (कभी न सुधरने वाला अपराधी) था।