बिहार में नजर आए तेज प्रताप के बड़े फोटो वाले बैनर, तेजस्वी नदारद

जन्माष्टमी पर लगाए गए पोस्टर में लालू प्रसाद और राबड़ी देवी को जगह तो दी गयी लेकिन तेजस्वी यादव को जगह नहीं मिली थी। हालांकि बाद में एक पोस्टर तेजप्रताप की तरफ से ट्वीट किया गया जिसमें तेजस्वी की तस्वीर भी है।

राजद नेता तेज प्रताप यादव (बाएं) और तेजस्वी यादव।

लालू प्रसाद की पार्टी राजद में विवाद कम होता नहीं दिख रहा है। जन्माष्टमी के मौके पर तेजप्रताप यादव की तरफ से लगाए गए पोस्टर में पहले तेजस्वी यादव का फोटो नहीं लगाया गया। बाद में विवाद बढ़ने के बाद तेज प्रताप के सरकारी आवास के बाहर लगाए गए पोस्टर में तेजस्वी यादव को भी जगह दे दी गयी। पूरे मामले पर जदयू की तरफ से निशाना साधा गया है। जदयू ने कहा है कि तेजस्वी बैनर में हैं, पर दिल में नहीं हैं।

गौरतलब है कि लालू प्रसाद के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव अपने आप को भगवान कृष्ण का भक्त बताते हैं, वहीं वो तेजस्वी यादव को अपना अर्जुन कहते हैं। लेकिन हाल के दिनों में दोनों ही भाइयों के बीच दूरी देखने को मिल रही है। जन्माष्टमी पर लगाए गए पोस्टर में लालू प्रसाद और राबड़ी देवी को जगह तो दी गयी लेकिन तेजस्वी यादव को जगह नहीं मिली थी। हालांकि बाद में एक पोस्टर तेजप्रताप की तरफ से ट्वीट किया गया जिसमें तेजस्वी की तस्वीर भी है।

जदयू ने बोला हमला: जन्माष्टमी पर लगाए गए पोस्टर के विवाद में अब जदयू भी कूद गयी है। जदयू की तरफ से कहा गया है कि तेज प्रताप भले ही किसी दबाव में आकर पोस्टर में तेजस्वी की तस्वीर भी लगवा दी है, लेकिन दोनों भाइयों के बीच दूरियां इतनी बढ़ गयी है कि अब बड़े भाई के दिल में छोटे भाई के लिए जगह नहीं है। जदयू प्रवक्ता निखिल मंडल ने कहा कि आखिर यह रिश्ता क्या कहलाता है।

बताते चलें कि हाल के दिनों में कई मौकों पर तेजप्रताप, तेजस्वी समर्थकों पर हमलावर रहे हैं। बिहार की सियासत को करीब से देखने वाले और राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो तेज प्रताप को तेजस्वी के पद से समस्या नहीं है। वह दल में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच अपनी भी अहमियत चाहते हैं। वैसे, प्रदेश पार्टी अध्यक्ष जगदानंद सिंह संगठन या फिर दफ्तर में तेज की नहीं चलने देते, जबकि लालू के बड़े बेटे के लिए यह बात पचाना थोड़ा मुश्किल नजर आता है।

लालू ने तेजस्वी को सियासी उत्तराधिकारी और सीएम फेस बनाया, जबकि तेज को छात्र आरजेडी की जिम्मेदारी सौंपी गई। बड़े बेटे खुद को कृष्ण बताते रहे हैं और तेजस्वी को अर्जुन। फिर भी उन्हें इस बात का मलाल रहता है कि बड़े होने के बावजूद उन्हें छोटे भाई के बराबर सम्मान नहीं दिया जाता है।