बीजेपी छोड़ तनाव में रहने लगे थे कल्याण सिंह, हेलीकॉप्टर से करना चाहते थे चुनाव प्रचार, नहीं हो पाई थी व्यवस्था

यूपी के पूर्व सीएम कल्याण सिंह ने दो बार बीजेपी छोड़ी थी। लेकिन वह पार्टी छोड़कर तनाव में रहने लगे थे। एक बार तो प्रचार के लिए हेलीकॉप्टर का भी इंतजाम नहीं हो पाया था।

Kalyan Singh दिवंगत कल्याण सिंह (फाइल फोटो)

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की गिनती बीजेपी के दिग्गज नेताओं में होती थी। कल्याण सिंह को यूपी की सियासत का बड़ा चेहरा माना जाता था। लेकिन उन्होंने दो बार पार्टी से अपना मुंह फेर लिया था। हालांकि कल्याण सिंह ने एक बार निर्दलीय चुनाव लड़ने के लिए पार्टी छोड़ी थी, लेकिन उन्हें कुछ हासिल नहीं हो पाया था और वापस पार्टी में आना पड़ा था।

तनाव में रहने लगे थे कल्याण सिंह: कल्याण सिंह की राजनीति को करीब से कवर करने वाले वरिष्ठ पत्रकार सिद्धार्थ कलहंस ने ‘बीबीसी’ से बात करते हुए याद किया, ‘बीजेपी के बड़े नेता अटल बिहारी वाजपेयी से उनके मतभेद थे, लेकिन साल 2004 में उनकी बीजेपी में वापसी के पीछे भी अटल बिहारी ही थे। प्रमोद महाजन और वाजपेयी के प्रयास से ही वह वापस आए थे। बीजेपी छोड़ने के बाद कल्याण सिंह खुद भी तनाव में रहने लगे थे। बीजेपी के बहुत कम लोगों ने उनके साथ पार्टी छोड़ी थी और बाद में तो वह और भी कम हो गए थे।’

सिद्धार्थ एक वाकये को याद करते हुए बताते हैं, ‘एक बार चुनाव प्रचार के लिए कल्याण सिंह निकल रहे थे। वह हेलीकॉप्टर से चुनाव प्रचार के लिए जाना चाहते थे, लेकिन पार्टी का ऐसा कोई भी सदस्य आगे नहीं आया जो उनके लिए हेलीकॉप्टर का इंतज़ाम कर सके। ऐसी ही कुछ घटनाओं से उन्हें ये अच्छी तरह समझ आ चुका था कि जिस पार्टी ने उन्हें इतना नाम और शोहरत दी, उसे छोड़कर वह कुछ हासिल नहीं कर सके।’

कल्याण सिंह ने किए थे कई बड़े बदलाव: बता दें, साल 2004 में कल्याण सिंह की बीजेपी में वापसी हुई और केंद्र से एनडीए की सरकार जा चुकी थी। ऐसे में पार्टी के पास 2007 का उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव बड़ी उम्मीद थी। बीजेपी ने कल्याण सिंह के नेतृत्व में यूपी विधानसभा चुनाव लड़ने का फैसला किया क्योंकि कल्याण सिंह के सीएम रहते हुए ही बाबरी मस्जिद का विवादित ढांचा गिराया गया था और उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में सुधार के लिए भी कई कठोर फैसले लिए थे।

ऐसा ही हुआ, पार्टी ने कल्याण सिंह को अपना चेहरा बनाया, लेकिन कुछ खास सफलता हासिल नहीं हो पाई। बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) सरकार बनाने में कामयाब हुई और मायावती मुख्यमंत्री बनीं। ये कल्याण सिंह और बीजेपी दोनों की हार थी। एक बार फिर कल्याण सिंह की नाराज़गी सामने आने लगी और 2009 में वह फिर बीजेपी से अलग हो गए। उन्होंने 2009 का लोकसभा चुनाव निर्दलीय लड़ा और एटा से जीत हासिल की। हालांकि मोदी लहर के दौरान उन्होंने 2014 में फिर बीजेपी जॉइन की।