बुर्किना फासो: संदिग्ध चरमपंथियों ने सैन्य काफिले पर घात लगाकर किया हमला, 47 लोगों की मौत

बुर्किना फासो. उत्तरी बुर्किना फासो (Burkina Faso) में एक संदिग्ध इस्लामी चरमपंथी (Islamic extremists) ने बुधवार को एक काफिले पर घात लगाकर हमला कर दिया. इस हमले में 17 सैनिकों और स्वयंसेवी रक्षा लड़ाकों के साथ ही कम से कम 30 नागरिकों की मौत हो गई. सरकार ने यह जानकारी दी. हालांकि, बुर्किना फासो के सहेल क्षेत्र में हुए इस हमले की अभी किसी ने जिम्मेदारी नहीं ली है. लेकिन अल-कायदा और इस्लामिक स्टेट समूह से जुड़े आतंकवादी पश्चिम अफ्रीकी देश में सुरक्षाबलों पर हमले करते रहे हैं.

हाल के एक हमले में उत्तरी इलाके में 15 सैनिकों और चार स्वयंसेवी लड़ाकों समेत 30 लोगों की मौत हो गयी थी. करीब एक हफ्ते पहले संदिग्ध चरमपंथियों ने पश्चिम बुर्किना फासो में सैनिकों के एक समूह पर घात लगाकर हमला कर दिया था जिसमें 12 लोगों की मौत हो गई थी. अर्थव्यवस्था और नीति पर केंद्रित मोरक्को स्थित एक संगठन ‘पॉलिसी सेंटर फॉर द न्यू साउथ’ की सीनियर फेलो रीडा ल्यामूरी ने कहा कि आतंकवादियों ने सेना की सुरक्षा के बावजूद नागरिकों पर हमले करने की अपनी क्षमता दिखाई है. उन्होंने कहा, यह दिखाता है कि उनके पास यह जानकारी है कि सुरक्षाबल कहां हैं और वे किन रास्तों से गुजरेंगे.

इस क्षेत्र में चरमपंथियों द्वारा फैलाई जाने वाली हिंसा और सेना की जवाबी कार्रवाई की वजह से अभी तक हजारों लोगों की मौत हो चुकी है. वहीं, करीब 13 लाख लोगों को अपने घरों को छोड़कर विस्थापित होना पड़ा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि उनके बीच इस बात को लेकर डर है कि आने वाले दिनों में हिंसा बढ़ सकती है. पास के कस्बे डोरी के एक स्थानीय पत्रकार इब्राहिम कागोन ने समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस को फोन पर बताया कि गोरगडजी और अरबिंदा क्षेत्र में लोगों के खिलाफ बढ़ रहे आतंकवादी हमलों की वजह से लोग हैरान और चिंतित हैं.

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सरकार में फेरबदल
अकुशल और बिना आधुनिक हथियारों से लैस सेना हिंसा को रोकने के लिए संघर्ष कर रही है. इस वजह से बिगड़ती सुरक्षा पूरे देश में अशांति पैदा कर रही है. पिछले महीने व्यापाक विरोध प्रदर्शन हुए, जिसके बाद सरकार पर दबाव बढ़ा. इसका असर ये हुआ कि राष्ट्रपति रोच मार्क क्रिश्चियन काबोरे ने अपने रक्षा और सुरक्षा मंत्रियों को बर्खास्त कर दिया. इसके बाद खुद को रक्षा मंत्री नियुक्त किया. हालांकि, इसके बाद भी विपक्ष संतुष्ट नजर नहीं आ रहा है. विपक्ष का कहना है कि सरकार में फेरबदल ही काफी नहीं है, बल्कि अब ठोस कदम उठाने का समय है.

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