भगवान गणेश की मूर्ति को पहना दी RSS की ड्रेस, विवाद! बोली कांग्रेस- कुछ कहेंगे हिंदुत्व के फर्जी ठेकेदार?

भगवान गणेश को संघ का गणवेश पहनाने पर कांग्रेस की तरफ से जुबानी हमला बोला गया है। कांग्रेस के एक नेता ने फोटो ट्वीट करते हुए कहा कि आखिर अब क्या कहेंगे हिंदुत्व के फर्जी ठेकेदार?

Ganesh in RSS Uniform, Lord Ganesha, Ganesh Utsav मध्य प्रदेश के ग्वालियर में भगवान गणेश की प्रतिमा को संघ(RSS) का गणवेश पहनाया गया है(Twitter)।

मध्य प्रदेश के ग्वालियर में भगवान गणेश की प्रतिमा को संघ(RSS) के गणवेश में दिखाने की चर्चा पूरे राज्य में हो रही है। बता दें कि यह मामला ग्वालियर के आपागंज शीतला कॉलोनी का है। इसको लेकर कांग्रेस ने तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि आखिर हिंदुत्व के फर्जी ठेकेदार कहां है? कांग्रेस ने आरोप लगाया कि भाजपा ने अपने राजनीतिक फायदे के लिए श्रीराम के बाद अब श्रीगणेश का भी उपयोग करना शुरू कर दिया है।

वहीं गणेश भगवान की इस झांकी के आयोजनकर्ता बलराम सिंह का कहना है कि, भगवान को कौन किस रूप में देखना चाहता है, ये तो उसके भक्ति भाव पर निर्भर करता है। श्रीगणेश को संघ का गणवेश पहनाने के पीछे हमारा कोई विशेष उद्देश्य नहीं है। हम उन्हें इस रूप में देखना चाहते थे, इसलिए ऐसा किया गया।

बलराम सिंह ने कहा कि हम अपने आयोजन में हर बार अलग-अलग मुद्रा में गणेश भगवान की प्रतिमा स्थापित करते हैं। इस बार हमने स्वयंसेवक के रूप की है। इससे ज्यादा कुछ नहीं है।

वहीं सिर्फ भगवान गणेश के अलावा उनकी सवारी मूषक को भी RSS का गणवेश पहनाया गया है। दोनों प्रतिमाओं की मुद्रा उसी तरह है, जिस तरह संघ की प्रणाम करने की परंपरा होती है। प्रतिमा के पीछे शेर पर सवार हुई भारत माता का एक बड़ा पोस्टर भी लगाया गया है।

कांग्रेस के प्रदेश महासचिव केके मिश्र ने फोटो को ट्वीट करते हुए लिखा कि “जिस मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम ने अपने पिता के निर्देश पर सत्ता त्याग 14 साल वनवास भोगा,उनके नाम का दुरुपयोग कर सत्ता बनाने,बचाने व चंदा खाने वालों ने अब ग्वालियर में विघ्नहरण गणेश जी को बनाया आरएसएस कार्यकर्ता, क्या यह उचित है!कुछ कहेंगे हिंदुत्व के फर्जी ठेकेदार?”

कांग्रेस नेता द्वारा किए गए इस ट्वीट पर उनके समर्थकों ने भी अपनी आपत्ति जताई। @atroliyaravi ने लिखा-, “यह तो वाकई हद है।अब गणपति भी संघी पोषाक में? वोट जो ना कराये कम है। भाजपा के पास दिखाने को कुछ नहीं है तभी कभी राम कभी गंगा, कभी गाय कभी गणेश की जी का सहारा। छि: धर्म का दुरुपयोग”

@shivshaktijoshi ने लिखा- “जाकि रहीं भावना जैसी, प्रभु मुरत देखी तिन्ह वैसी।”