मध्यप्रदेश की मशहूर महेश्वरी साड़ी पर पड़ी आर्थिक मंदी की मार, ठप्प हुए रोजगार, कांग्रेस नेता बोले- पीएम मोदी के एजेंडे में छोटे और माध्यम उद्योग नहीं

कोरोना महामारी की वजह से आई आर्थिक मंदी का प्रभाव हर जगह देखने को मिल रहा है। मध्यप्रदेश के खरगोन जिले में बनने वाले मशहूर महेश्वरी साड़ी पर भी आर्थिक मंदी की मार पड़ी है। जिसकी वजह से पहले महेश्वरी साड़ी उद्योगों में काम करने वाले बुनकर आज अपना घर चलाने के लिए सब्जी बेचने […]

handloom mp तस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। ( फाइनेंशियल एक्सप्रेस फाइल फोटो)

कोरोना महामारी की वजह से आई आर्थिक मंदी का प्रभाव हर जगह देखने को मिल रहा है। मध्यप्रदेश के खरगोन जिले में बनने वाले मशहूर महेश्वरी साड़ी पर भी आर्थिक मंदी की मार पड़ी है। जिसकी वजह से पहले महेश्वरी साड़ी उद्योगों में काम करने वाले बुनकर आज अपना घर चलाने के लिए सब्जी बेचने और दैनिक मजदूरी करने तक के लिए मजबूर हैं। मध्यप्रदेश के महेश्वरी साड़ी उद्योग के वर्तमान हालात को लेकर कांग्रेस नेता व पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कहा है कि उनके एजेंडे में छोटे और मध्यम उद्योग नहीं हैं।

एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार मध्यप्रदेश के खरगोन जिले के महेश्वर में करीब 3000 से ज्यादा हैंडलूम थे जिनमें मशहूर महेश्वरी साड़ियां बना करती थी। जिसमें करीब 9 हजार से ज्यादा बुनकर और कर्मचारी काम किया करते थे। लेकिन कोरोना महामारी की वजह से आई आर्थिक सुस्ती की वजह से यहां का अधिकांश व्यापार प्रभावित हो गया। साड़ियों में उपयोग होने वाले मेटेरियलों की संख्या बढ़ने और साड़ी की ज्यादा मांग नहीं होने की वजह से कई दुकान बंद हो गए।

व्यापार लगातार प्रभावित होने की वजह से साड़ियां बनाने वाले कई हैंडलूम बंद हो गए। जिनमें काम करने वालों बुनकरों को यह पेशा छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा। जिसकी वजह से कई बुनकर अपना परिवार चलाने के लिए सब्जी बेचने या निर्माण कार्यों में मजदूरी करने लगे। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कई बुनकर कोरोना लॉकडाउन से पहले एक सप्ताह में करीब 3000 रुपए कमा लिया करते थे लेकिन आज उन्हें मजदूरी करके एक हफ्ते में सिर्फ 1500-1600 रुपए से ही संतोष करना पड़ रहा है।

महेश्वरी साड़ी के मौजूदा हालात को लेकर राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भी चिंता जताई है। दिग्विजय सिंह ने ट्वीट करते हुए लिखा कि महेश्वरी साड़ियां निमाड़ व मालवा की पहचान व शान रही है। नोटबंदी के बाद कोरोना के लॉकडाउन के कारण लोगों का कारोबार ठप्प हो गए। मज़दूर बेरोज़गार हो गए।  भाजपा शासन का ₹20 लाख का पैकेज इन्हें नहीं मिल पाया। शायद मोदी जी के एजेंडा में छोटे और मध्यम उद्योग नहीं है।