महिला क्रिकेटरों ने दिखाया दम

देश मेंं महिला क्रिकेट का सफर दशकों पहले शुरू हो गया था।

शेफाली वर्मा। फाइल फोटो।

देश मेंं महिला क्रिकेट का सफर दशकों पहले शुरू हो गया था। टीम के तौर पर उपलब्धियां भले ही खास नहीं रही हों पर व्यक्तिगत तौर पर ऐसी कई महिला क्रिकेटर उभरीं जिनके प्रदर्शन पर नाज किया जा सकता है। मिताली राज हों या झूलन गोस्वामी, शांता रंगास्वामी हों या डायना एडुलजी, संध्या अग्रवाल हो या हरमनप्रीत कौर, स्मृति मंधाना हों या शेफाली वर्मा, सबने अपने-अपने दौर में खूब सुर्खियां बटोरी हैं। आज का दौर भी चमकदार बन रहा है। बीते कुछ समय में भारतीय महिलाओं ने अपनी दमदार क्रिकेट से तारीफ बटोरी है। इंग्लैंड को इंग्लैंड में और आॅस्ट्रेलिया को आस्ट्रेलिया में कड़ी टक्कर दी है।

अफसोसजनक पहलू यह है कि महिला क्रिकेटरों को उतने अवसर और सुविधाएं नहीं मिलीं जितने की वे हकदार हैं। कितना अजीब लगता है कि दो दशक के करिअर में मिताली और झूलन जैसी खिलाड़ी केवल दर्जन भर टैस्ट खेली हैं। यह सब तब है जब भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड दुनिया का सबसे धनाढ्य और शक्तिशाली बोर्ड है। मान लिया कि पहले महिला क्रिकेट संघ का अलग अस्तित्व था। लेकिन अब तो महिला क्रिकेट भी उसी की निगरानी में पनप रहा है। जहां पुरुष टीम का कार्यक्रम व्यस्त रहता है तो वहीं महिला क्रिकेटरों को यदा कदा ही अवसर मिल रहे हैं। यह इसलिए भी आश्चर्यजनक है क्योंकि कुछ अर्से पहले तक क्रिकेट का संचालन सुप्रीम कोर्ट की बनाई समिति कर रही थी जिसमें डायना एडुलजी भी थीं। उन्होंने महिला क्रिकेटरों को पैसा जरूर दिलाया पर खेलने के ज्यादा अवसर उपलब्ध नहीं करवाए।

यह अपने आप में कितना अजीब लगता है कि 2021 में भारत ने सिर्फ दो टैस्ट मैच खेले। सात साल बाद टैस्ट खेलना यह साबित करता है कि महिला क्रिकेट कितना उपेक्षित है। आस्ट्रेलिया के साथ तो टैस्ट 15 साल बाद खेला गया। खैर, पहले इसी साल जून में इंग्लैंड के खिलाफ उन्हीं की धरती पर फालोआन पाने के बाद भारतीय महिलाओं ने हारी हुई बाजी को ड्रा में बदल दिया। स्नेह राणा और तानिया भाटिया ने नौवें विकेट के लिए शतकीय साझेदारी से निश्चित लग रही हार को टाल दिया। यह भारतीय महिला क्रिकेटरों के जुझारूपन और किसी भी परिस्थिति में घुटने नहीं टेकने की दृढ़ता को दर्शाता है। स्नेह ने नाबाद 80 रन की पारी खेली। वे पहले टैस्ट में शतक का सपना साकार करने की तरफ बढ़ रही थीं जब अंपायरों ने इंग्लैंड की कप्तान से बातचीत के बाद खेल को समाप्त कर दिया। तब 15 ओवर फेंके जाने बाकी थे।

इस टैस्ट ने भारतीय महिला क्रिकेट टीम को शेफाली वर्मा और स्मृति मंधाना के रूप में ठोस सलामी जोड़ी दी है। यह जोड़ी अब तक दो टैस्ट मैचों की चार पारियों में से एक शतकीय और दो अर्धशतकीय साझेदारी कर चुकी है। सीमित ओवरों की क्रिकेट में शेफाली की आक्रामकता को लेकर टैस्ट क्रिकेट में उनकी सफलता पर संदेह था। लेकिन अब उन्होंने अपने को टैस्ट शैली के अनुरूप ढालने की कोशिश की है।

वैसे इंग्लैंड में पहले टैस्ट की दोनों पारियों में आक्रामकता ही उनके पतन की वजह रही। इसमें एक बार तो वे शतक से मात्र चार रन दूर थीं। खब्बू बल्लेबाज स्मृति मंधाना एक क्लास खिलाड़ी हैं। उनके पास ड्राइव, पुल, हुक और कट शाट्स खेलने की कला है। पिछले दिनों आॅस्ट्रेलिया के साथ संपन्न प्रथम गुलाबी गेंद टैस्ट में तो स्मृति ने 127 रन की लाजवाब पारी खेली। यह उनके टैस्ट जीवन का पहला शतक है। इसकी मदद से भारतीय टीम ने आठ विकेट पर 377 रन बनाकर पारी घोषित की। आॅस्ट्रेलिया में किसी भी मेहमान टीम द्बारा बनाया गया यह सर्वोच्च स्कोर है।

सबसे दिलचस्प यह है कि भारतीय टीम को गुलाबी गेंद से खेलने का कोई अनुभव नहीं था। इसलिए इतना बड़ा स्कोर खड़ा करना ही बड़ी बात है। परिस्थितियों के अनुरूप अपने को ढालने के लिए उन्हें केवल दो अभ्यास सत्र मिले। पर जिस तरह से बल्लेबाज और गेंदबाजों ने सशक्त आस्ट्रेलियाई टीम पर दबाव बनाया, उससे जरा नहीं लगा कि यह अनुभवहीन टीम है। नई गेंद से 38 वर्षीय झूलन गोस्वामी ने पूजा और मेघना सिंह की मदद से आस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों को परेशान किया। यह सब धाकड़ बल्लेबाज हरमनप्रीत की अनुपस्थिति के बावजूद हुआ जो चोट लगने के कारण नहीं खेल सकी। लेकिन दीप्ति शर्मा और होनहार बल्लेबाज यस्तिका ने भी प्रभावशाली प्रदर्शन किया। इससे लगता है कि भारतीय महिला क्रिकेट का भविष्य सुनहरा है। बीसीसीआइ को खिलाड़ियों की जरूरत पर ध्यान देना होगा।