माधुरी दीक्षित की फिल्म को मायावती ने उत्तर प्रदेश में कर दिया था बैन, यश चोपड़ा को ‘बहन जी’ से मांगनी पड़ गई थी माफी

साल 2007 में फिल्म ‘आजा नचले’ से माधुरी दीक्षित सिल्वर स्क्रीन पर वापसी कर रही थीं। लेकिन फिल्म रिलीज से पहले ही विवादों में फंस गई थी और मायावती ने यूपी में इस पर बैन लगा दिया था।

Mayawati UP Election, Madhuri Dixit माधुरी दीक्षित और मायावती (Photo- Indian Express)

साल 2007 में रिलीज हुई फिल्म ‘आजा नचले’ के सहारे माधुरी दीक्षित बॉलीवुड में कमबैक कर रही थीं। माधुरी लंबे समय से फिल्म इंडस्ट्री से दूर थीं और शादी के बाद अमेरिका चली गई थीं। माधुरी की फिल्म यश राज बैनर तले बन रही थी। इससे पहले फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कुछ कमाल कर पाती, ‘आजा नचले’ को विवादों ने घेर लिया था। आरोप लगाए गए कि फिल्म में ‘जातीसूचक शब्दों’ का इस्तेमाल किया गया है।

सिल्वर स्क्रीन पर वापसी कर रही थी माधुरी: उत्तर प्रदेश में तब बहुजन समाज पार्टी की सरकार थी और सूबे की कमान मायावती के हाथ में थी। अजोय बॉस ने अपनी किताब ‘बहनजी: ए पॉलिटिकल बायोग्राफी ऑफ मायावती’ में इसका विस्तार से जिक्र किया है। अजोय लिखते हैं, 2007 की गर्मियों में मायावती की सत्ता में वापसी हुई और उन्हें बदलाव की नज़रों से देखा जाने लगा। ऐसे में उनके कार्यकाल का सबसे पहला विवाद माधुरी दीक्षित की फिल्म से जुड़ा हुआ देखने को मिला, जब फिल्म निर्माताओं पर जानबूझकर ‘जातीसूचक शब्द’ इस्तेमाल करने का आरोप लगा।

उदित राज पहले दलित नेता बने जिन्होंने फिल्म रिलीज होने के बाद दिल्ली के एक थिएटर के बाहर धरना-प्रदर्शन दिया। इसमें मायावती भी चुप नहीं रहीं और उन्होंने तुरंत फिल्म को उत्तर प्रदेश में बैन कर दिया। साथ ही ‘बहन जी’ ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर फिल्म को देशभर में बैन करने की मांग की। मायावती के विरोध के 12 घंटे के भीतर प्रोड्यूसर यश चोपड़ा ने मायावती से माफी मांगी और उन्होंने सुनिश्चित किया कि वह न सिर्फ फिल्म के गाने से शब्दों को हटाएंगे बल्कि आगे से ऐसे शब्द कभी इस्तेमाल नहीं करेंगे।

मायावती ने किया था अंबेडकर मैदान का विस्तार: बता दें, फिल्म ‘आजा नचले’ को अनिल मेहता ने डायरेक्ट किया था। फिल्म में माधुरी के अलावा कुणाल कपूर, कोंकणा सेन शर्मा और अक्षय खन्ना नज़र आए थे। फिल्म की कहानी माधुरी दीक्षित के इर्द-गिर्द ही लिखी गई थी और उनके किरदार का नाम ‘दीया’ था। करीब 5 साल बाद माधुरी की ये पहली फिल्म थी इसलिए उनके फैन्स उन्हें सिल्वर स्क्रीन पर देखने के लिए बहुत उत्सुक भी थे।

मायावती को इसके बाद एक बड़ी दलित नेता के रूप में देखा जाने लगा। इसके बाद उनकी इस समाज पर पकड़ और मजबूत हो गई। बकौल अजोय, मायावती को ये अच्छे से मालूम था कि उन्हें एक विशेष जाति कभी पसंद नहीं करती, बावजूद इसके उन्होंने लखनऊ में अंबेडकर मैदान का विस्तार करने का फैसला किया था।