मानवाधिकार परिषद में नहीं हो पाई उइगर मुसलमानों पर चर्चा, वोटिंग से पीछे हटा भारत

हाइलाइट्स

UNHRC में उइगर मुसलमानों पर नहीं हो पाई चर्चा
पश्चिमी देशों द्वारा लाया गया प्रस्ताव खारिज
भारत ने वोटिंग से बनाई थी दूरी

जिनेवा. चीन के शिनजियांग प्रांत में मानवाधिकारों के हनन पर बहस की मांग करने वाले पश्चिमी देशों के प्रस्ताव पर भारत ने गुरुवार को UNHRC (संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद) में मतदान में भाग नहीं लिया. भारत के शामिल न होने से पश्चिमी देशों को बड़ा झटका लगा है, वहीं प्रस्ताव के समर्थन में 17 देशों ने जबकि खिलाफ में 19 देशों ने मतदान किया. इसके चलते प्रस्ताव खारिज हो गया और इसका सीधा फायदा चीन को मिला.

दरअसल चीन के शिनजियांग प्रांत में उइगर मुसलमानों पर हो रहे अत्याचार पर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में कनाडा, फिनलैंड, आइसलैंड, स्वीडन, डेनमार्क, ब्रिटेन और अमेरिका जैसे देश चीन के खिलाफ प्रस्ताव लेकर आए थे, लेकिन प्रस्ताव आखिर में रद्द हो गया. इस प्रस्ताव को तुर्की, पाकिस्तान और नेपाल तक का समर्थन प्राप्त था, वहीं भारत इससे दूर रहा.

परिषद के 16 साल के इतिहास में यह हार केवल दूसरी बार है, जब एक प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया है. भारत उन 11 देशों में शामिल था, जिन्होंने 47 सदस्यीय निकाय में भाग नहीं लिया था. भारत परंपरागत रूप से ऐसे मुद्दों से निपटने के लिए सहयोगात्मक और रचनात्मक बातचीत का पक्षधर रहा है.

प्रस्ताव लाए जाने पर चीनी राजदूत चेन शुपश्चिम ने चीन को अलग-थलग करने का आरोप लगाते हुए कहा कि जहां आज चीन को निशाना बनाया जा रहा है, वहीं कल किसी अन्य विकासशील देशों को भी निशाना बनाया जा सकता है.

उइगर मुसलमानों के साथ ज्यादती कर रहा है चीन? UN की रिपोर्ट पर क्या बोला ड्रैगन

एपी के मुताबिक अमेरिकी राजदूत मिशेल टेलर ने कहा कि बहस के अनुरोध का उद्देश्य केवल “चर्चा के लिए तटस्थ मंच प्रदान करना” था, जो चीन को अपने विचारों को रिकॉर्ड करने और दूसरों के विचारों को सुनने का मौका देगा.  उन्होंने कहा, “आज यहां प्रतिनिधित्व करने वाले किसी भी देश का सही मानवाधिकार रिकॉर्ड नहीं है. “कोई भी देश, चाहे वह कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, परिषद की चर्चाओं से बाहर नहीं होना चाहिए. इसमें मेरा देश अमेरिका शामिल है और पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना भी शामिल है.”

Tags: China, India, Uighur, UNHRC