मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्यों ने की तालिबान की तारीफ तो भड़के जावेद अख़्तर, बोले- ये बेहद शर्मनाक

AIMPLB के एक प्रवक्ता ने इस बीच तालिबान का खुलकर समर्थन किया। ऐसे में बॉलीवुड गीतकार जावेद अख्तर ने इस पर रिएक्ट किया है।

Salman Khan, Javed Akhtar, Salim Javed, सलीम जावेद, सलीम जावेद फिल्में, Salim Khan, जावेद अख्तर (फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस आरकाइव)

अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद जहां एक तरफ विश्व स्तर पर इसकी निंदा हो रही है। सोशल मीडिया पर लगातार तालिबान की इस हरकत पर चर्चा हो रही है। वहीं देश के कुछ लोग तालिबान के इस कदम पर उन्हें बधाई देते और उनके लिए खुश होते नजर आ रहे हैं। AIMPLB के एक प्रवक्ता ने इस बीच तालिबान का खुलकर समर्थन किया। ऐसे में बॉलीवुड गीतकार जावेद अख्तर ने इस पर रिएक्ट किया है।

जावेद अख्तर कहते हैं कि वह इस बात से काफी हैरान हैं। उन्होंने एक ट्वीट किया जिसमें जावेद अख्तर ने AIMPLB के प्रवक्ता की घोर नंदा की। उन्होंने अपनी पोस्ट में कहा- ‘यह बहुत चौंकाने वाली बात है कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य बर्बर तालिबानों द्वारा किए गए अफगानिस्तान पर कब्जे से बेहद खुश हैं और अपनी खुशी जाहिर कर रहे हैं। हालांकि बोर्ड ने इन सबसे दूरियां बनाई हुई हैं, लेकिन इतना ही काफी नहीं है। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को अपना पॉइंट ऑफ व्यू स्पष्ट शब्दों में रखना चाहिए। हम इंतजार कर रहे हैं।’

बता दें, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रवक्ता मौलाना सज्जाद नोमानी खुलकर तालिबान की तारीफ करते नजर आए हैं जिसके चलते उनकी काफी आलोचना हो रही है। उन्होंने कहा है कि, ‘एक बार फिर यह साबित हुआ है, बिना हथियारों के एक निहत्थी कौम ने सबसे मजबूत फौजों को हराया है। काबुल के शाही महल में वे दाखिल हुए। उनके इस अंदाज को पूरी दुनिया ने देखा। वो बिना किसी गुरूर और घमंड के आगे बढ़े। वे नौजवान काबुल की सरजमीं को चूम रहे थे। आपको ये जीत मुबारक हो। आपके इस कदम को, इस जज्बे को ये हिंदी मुसलमान सलाम करता है। आपका हौंसला कमाल का है।’

इससे पहले भी जावेद अख्तर ने अफगानिस्तान-तालिबान मामले में एक ट्वीट किया था जिसमें अफगानिस्तान के हालातों पर बड़े-बड़े देशों की चुप्पी पर जावेद अख्तर भड़कते हुए नजर आए थे। जावेद अख्तर ने अपनी पोस्ट में कहा था कि पश्चिम के देशों पर लानत है।

जावेद अख्तर बोले थे- ‘अमेरिका किस तरह की महाशक्ति है कि वह तालिबान नामक इन बर्बर लोगों को खत्म नहीं कर सका? यह कैसी दुनिया है जिसने अफगानी महिलाओं को इन कट्टरपंथियों की दया के वश में छोड़ दिया है? उन सभी पश्चिमी देशों पर शर्म आती है जो मानवाधिकारों के रक्षक होने का दावा करते हैं।’