मेरी हत्या कराना चाहते हैं- लालू परिवार की रार में तेज प्रताप का सबसे बड़ा वार; पिता से मिल तेजस्वी का ऐक्शन पर विचार

बिहार की सियासत को करीब से देखने वाले और राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो तेज प्रताप को तेजस्वी के पद से समस्या नहीं है। वह दल में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच अपनी भी अहमियत चाहते हैं।

tej pratap yadav, tejashwi yadav, bihar news लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव और छोटे पुत्र तेजस्वी यादव। (फाइल फोटोः TejPratapYadavOfficial-फेसबुक/इंडियन एक्सप्रेस- आलोक जैन)

बिहार में RJD चीफ लालू प्रसाद यादव के कुनबे की रार में बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने अब तक का सबसे बड़ा जुबानी वार किया है।

शनिवार (21 अगस्त, 2021) को उन्होंने आरोप लगाया है कि छोटे भाई और सूबे के पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव के सलाहकार संजय यादव उनकी हत्या करना चाहते हैं। स्थानीय मीडिया से उन्होंने कहा, “संजय ने ही मेरे सुरक्षा कर्मचारियों को भगा दिया है। मेरे सुरक्षा गार्ड्स को फोन किया और कहा कि दिल्ली नहीं जाना है। तीनों सुरक्षा गार्ड्स ने फोन बंद कर लिया और वे गायब हो गए।”

इतना ही नहीं, तेज का दावा है कि संजय सोशल मीडिया पर उन्हें गाली दिलवा रहे हैं। उनके पास सबूत के तौर पर स्क्रीनशॉट्स भी हैं। सब पर मानहानि का केस किया जाएगा। छोटे भाई को लेकर संजय दिल्ली चले गए। बकौल लालू के बड़े बेटे, “मैं अकेला नहीं हूं। युवा से लेकर पूरी जनता मेरे साथ है। जहां गलत होता था, वहां कृष्ण गुस्सा दिखाते थे। महादेव भी गलत पर नाराज होते थे। मैं तो इंसान हूं। मैं सच के लिए लड़ता हूं, इसलिए लोग परेशान करने का प्रयास करते हैं।” इसी बीच, तेजस्वी दिल्ली पहुंच गए हैं, जहां उनकी मुलाकात पिता से हुई। कहा जा रहा है कि वह तेज के हालिया तेवर और रवैए पर ऐक्शन को लेकर लालू के साथ विचार कर सकते हैं।

दरअसल, तेज की छह बहनें दिल्ली-एनसीआर में रहती हैं। रक्षा बंधन के मद्देनजर वह उनसे मिलने के लिए राष्ट्रीय राजधानी आना चाहते थे। साथ ही पिता से भी भेंट होनी थी। संजय के बहाने तेजस्वी पर दोष मढ़ा और आगे कहा, “सबसे पता है कि आखिर संजय को ताकत कहां से मिल रही है।” हालांकि, तेज प्रताप देर रात प्लेन से दिल्ली रवाना हुए।

तेज ने इसके अलावा पार्टी दफ्तर में पहले से घोषित जनता दरबार भी नहीं लगाया। इससे पहले, शुक्रवार को छोटे भाई तेजस्वी और बड़ी बहन रोहिणी आचार्य ने अनुशासन को लेकर बड़े भाई तेज को हिदायत दी थी। बता दें कि बिहार में लालू की पार्टी को सबसे बड़ा सियासी परिवार माना जाता है, पर इन दिनों वहां विरासती युद्ध सरेआम लड़े जाने के संकेत मिल रहे हैं।

बिहार की सियासत को करीब से देखने वाले और राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो तेज प्रताप को तेजस्वी के पद से समस्या नहीं है। वह दल में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच अपनी भी अहमियत चाहते हैं। वैसे, प्रदेश पार्टी अध्यक्ष जगदानंद सिंह संगठन या फिर दफ्तर में तेज की नहीं चलने देते, जबकि लालू के बड़े बेटे के लिए यह बात पचाना थोड़ा मुश्किल नजर आता है।

लालू ने तेजस्वी को सियासी उत्तराधिकारी और सीएम फेस बनाया, जबकि तेज को छात्र आरजेडी की जिम्मेदारी सौंपी गई। बड़े बेटे खुद को कृष्ण बताते रहे हैं और तेजस्वी को अर्जुन। फिर भी उन्हें इस बात का मलाल रहता है कि बड़े होने के बावजूद उन्हें छोटे भाई के बराबर सम्मान नहीं दिया जाता है।