मेरे पास कोई आए तो सिर फूटा होना चाहिए उसका, उठा-उठा के मारना सबको- करनाल में खट्टर के कार्यक्रम से पहले ये ऑर्डर देने वाले IAS की सफाई से सरकार संतुष्ट!

प्रदर्शनकारी किसान जिस बैठक का विरोध करने के लिए आगे बढ़े थे, उसमें हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, राज्य भाजपा के अध्यक्ष ओम प्रकाश धनखड़ और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद थे। किसानों के खिलाफ कार्रवाई के लिए राज्य पुलिस की आलोचना की गई और विरोध में कई स्थानों पर सड़कों को जाम किया गया।

ml khattar, karnal, haryana करनाल में शनिवार को प्रदर्शनकारियों पर लाठियां भांजते हुए पुलिसकर्मी व हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर। (सांकेतिक फोटोः एक्सप्रेस)

हरियाणा में शनिवार (28 अदस्त, 2021) को भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की एक बैठक के खिलाफ करनाल की तरफ बढ़ने वाले प्रदर्शनकारी किसानों के एक समूह पर पुलिस ने कथित तौर पर लाठीचार्ज किया, जिसमें करीब दस लोग जख्मी हुए। मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के इस कार्यक्रम से पहले वहां के सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) ने ऑर्डर दिया था कि अगर उनके पास कोई आए तो उसका सिर फूटा होना चाहिए। पुलिस उन्हें उठा-उठाकर मारे। बाद में मामला गरमाया, तो आईएएस अफसर को सफाई भी देनी पड़ी, पर जानकारी के मुताबिक उनके स्पष्टीकरण से फिलहाल राज्य सरकार संतुष्ट है।

साल 2018 बैच के आईएएस अफसर सिन्हा ने पुलिस वालों से ये बातें (सिर फोड़ने वाली) कैमरे के सामने कही थीं। पुलिस वालों को इससे जुड़ा निर्देश देते हुए एक वीडियो भी सामने आया था, जो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ था। वह उसमें कहते नजर आए थे, “उठा-उठाकर मारना पीछे सबको। हम उन्हें सुरक्षा घेरे को लांघने नहीं देंगे। हमारे पास पर्याप्त सुरक्षा बल है। हम दो दिनों से सोए नहीं हैं। पर आप लोग यहां थोड़ी नींद लेकर आए हैं…मेरे पास एक भी बंदा निकलकर नहीं आना चाहिए। अगर कोई आए, तो सर फूटा हुआ होना चाहिए उसका। क्लियर है न आपको?”

संयुक्त किसान मोर्चा ने सिन्हा के निलंबन की मांग की है। हालांकि, बीजेपी शासित हरियाणा की सरकार के अफसरों ने आईएएस की टिप्पणी पर बयान देने से बचना ही ठीक समझा, जबकि कुछ ने उस पर स्पष्टीकरण देने की कोशिश की कि “अफसर ने कुछ भी गलत नहीं कहा है। वह तो इस तरह के दवाब वाले समय में अपनी ड्यूटी कर रहे थे।” दरअसल, जहां पर सीएम खट्टर समेत बीजेपी नेताओं की बैठक (आगामी पंचायत चुनाव में रणनीति को लेकर) हुई थी, वहां पर सिन्हा को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए ड्यूटी मजिस्ट्रेट के तौर पर तैनात किया गया था।

सिन्हा ने “दि संडे एक्सप्रेस” को इस बारे में बताया, “प्रदर्शनस्थल और मीटिंग वाली जगह के बीच में तीन चेक प्वॉइंट्स थे। मैं तीसरे और आखिरी चेकपोस्ट पर तैनात था, जो बैठक से पहले था। मतलब जिसे भी पहुंचना होता, तो उसे दो सुरक्षाघेरों को तोड़कर आगे आना पड़ता। तीसरा नाका मीटिंग वाली जगह से बेहद ही पास था। इस बात की बहुत अधिक आशंका थी कि तीसरे नाका के किसी भी उल्लंघन से तोड़फोड़ हो सकती थी और कुछ शरारती तत्व भी इन विरोध करने वाले समूहों का हिस्सा थे। यह सुरक्षा के लिए खतरा हो सकता था।”

बकौल सिन्हा, “ऐसे में ये सारी चीजें ध्यान में रखते हुए, मैं अपनी लोकेशन पर पुलिस वालों को ब्रीफ कर रहा था। मैं उन्हें प्रक्रिया के बारे में (सीआरपीसी के प्रावधानों के अनुसार एक चेकलिस्ट) बता रहा था। मैंने उन्हें बताया कि वे प्रदर्शनकारियों को चेताएं, जिसके बाद उनपर वॉटर कैनन का प्रयोग करें। फिर टियर गैस छोड़ें और उसके बाद अगर जरूरत पड़े तब लाठीचार्ज करें।”

आईएएस ने दावा किया कि जो वीडियो वायरल हुआ, उसमें छेड़खानी की गई है, क्योंकि सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म्स पर घूम रहे वीडियो में मेरे बयान का सिर्फ एक चुनिंदा हिस्सा है, जो कि लाठीचार्ज से जुड़ा है, जबकि लाठीचार्ज जहां (बासतारा टोल प्लाजा) हुआ, वहां कोई और एसडीएम की तैनाती थी। मैं वहां से 10-15 किमी दूर तैनात था। मेरे नाका पर तो कुछ हुआ ही नहीं। मैंने जिन पुलिस वालों को ब्रीफ किया था, उन्होंने तो कुछ किया ही नहीं। कोई भी प्रदर्शनकारी मेरे नाके तक आया ही नहीं और वहां कुछ नहीं हुआ।

सूत्रों ने बताया कि मुख्यमंत्री के दफ्तर की ओर से भी सिन्हा से इस बाबत संपर्क साधा गया और फिलहाल के लिए उनकी सफाई को “संतोषजनक” पाया। वहीं, हरियाणा भारतीय किसान यूनियन (चढूनी) के प्रमुख गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने आरोप लगाया कि पुलिस ने बर्बरतापूर्वक प्रदर्शनकारी किसानों पर लाठीचार्ज किया। कांग्रेस की हरियाणा इकाई की वरिष्ठ नेता किरण चौधरी ने शनिवार को करनाल में किसानों पर किए गए लाठीचार्ज की कड़ी निंदा करते हुए इसे सरकार का अहंकार करार दिया।

इसी बीच, कांग्रेस ने हरियाणा में किसानों पर लाठी-चार्ज की घटना की निंदा करते हुए शनिवार को कहा कि इसने ‘जनरल डायर’ की याद दिला दी और किसानों पर पड़ी लाठी भाजपा सरकार के ताबूत में कील साबित होगी।बता दें कि केंद्र के कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसान हरियाणा में भाजपा-जजपा गठबंधन के कई सार्वजनिक कार्यक्रमों का विरोध कर रहे हैं। बीकेयू के आह्वान पर कई किसान करनाल के नजदीक बस्तारा टोल प्लाजा पर इकट्ठा हुए थे।