म्यांमारः तख्तापलट के खिलाफ विरोध का सबसे घातक दिन! फायरिंग में 18 प्रदर्शनकारियों की मौत

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने कहा कि म्यांमा प्राधिकारियों द्वारा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई में कम से कम 18 व्यक्तियों की मौत हो गई है।

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संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने कहा कि म्यांमा प्राधिकारियों द्वारा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई में कम से कम 18 व्यक्तियों की मौत हो गई है।

दरअसल, म्यांमार में सैन्य तख्तापलट के करीब एक महीने बाद विरोध प्रदर्शन शांत कराने के प्रयासों में तेजी लाते हुए सुरक्षा बलों ने रविवार को बड़ी तादाद में लोगों की गिरफ्तारी की। ऐसी खबरें हैं कि पुलिस ने मुल्क के सबसे बड़े शहर यांगून में गोलियां चलाई और प्रदर्शनकारियों को सड़कों से तितर बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले दागे और पानी की बौछार की। प्रदर्शनकारी देश में लोकतांत्रिक सरकार बहाल करने की मांग कर रहे थे। सोशल मीडिया पर ऐसी तस्वीरें वायरल हो रहीं हैं, जिनमें कारतूस के खोखे दिखाई दे रहे हैं।

सोशल मीडिया पर आई खबरों के अनुसार यांगून में इस दौरान एक युवक की मौत हो गई। तस्वीरों और वीडियो में उसका शव पड़ा दिखाई दिया। दक्षिणपूर्वी म्यांमार के छोटे से शहर दावेई में भी सुरक्षा बलों ने हिंसक कार्रवाई की। स्थानीय मीडिया की खबर के अनुसार प्रदर्शन के दौरान तीन लोग मारे गए, हालांकि मारे गए लोगों की संख्या की अभी पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि, सोशल मीडिया में पोस्ट किये गये तस्वीरों से पता चलता है कि एक घायल व्यक्ति चिकित्साकर्मियों की देख रेख में है और बाद में उसका शरीर एक बेड पर रख दिया गया है और उसे कंबल से ढक दिया गया है।

आधिकारिक सूत्रों से मिलने वाले समाचारों के अभाव एवं अराजकता के माहौल के बीच प्रदर्शनकारियों की मौत की संख्या की पुष्टि हो पाना कठिन है। रविवार से पहले, सैन्य तख्तापलट के संबंध में आठ लोगों के मारे जाने की पुष्ट खबरें है। यह जानकारी राजनीतिक कैदियों के एक इंडिपेंडेंट असिस्टेंट एसोसिएशन ने दी। एक फरवरी को म्यांमा ने सैन्य तख्तापलट करते हुये सू ची तथा राष्ट्रपति विन म्यिंट को हिरासत में ले लिया था।

सेना ने इसके अलावा सू ची सरकार के शीर्ष लोगों को भी हिरासत में ले लिया था। इससे पहले, आंग सान सू ची की नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी को चुनाव में दोबारा सत्ता हासिल हुयी थी, लेकिन सेना ने संसद को ब्लाक कर दिया था। रविवार को हिंसा उस वक्त भड़की, जब मेडिकल के छात्र राजधानी की सड़कों पर मार्च निकाल रहे थे। घटना की जारी हुई तस्वीरों और वीडियो में प्रदर्शनकारी उस वक्त भागते दिख रहे हैं जब पुलिस ने उन पर सख्ती की। राजधानी में किसी के हताहत होने के बारे में फिलहाल कोई जानकारी नहीं है। सड़कों पर गोलियों की आवाजें सुनी गईं और माना जा रहा है कि भीड़ पर ‘स्मोग ग्रेनेड’ भी फेंका गया।

वीडियो एवं तस्वीरों में पुलिस की कार्रवाई से प्रदर्शनकारियों को भागते हुये देखा जा सकता है । इन तस्वीरों और वीडियो के अनुसार स्थानीय लोगों को पुलिस कार्रवाई में व्यवधान पैदा करते देखा गया है। स्थानीय निवासी पुलिस से अपील कर रहे हैं कि जिन लोगों को उन्होंने सड़क से उठाया है उन्हें रिहा कर दिया जाये। दर्जनों एवं इससे अधिक के बारे में माना जा रहा है कि उन्हें हिरासत में ले लिया गया है।