यूक्रेन संग जंग को लेकर UN में रूस को घेरने की हुई कोशिश, भारत ने यह कदम उठा ऐसे दिया ‘दोस्त’ का साथ

संयुक्त राष्ट्र: रूस और यूक्रेन के बीच झगड़े में भारत शुरू से ही शांति की बात करता रहा है. जब शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र में रूस को चारों ओर से घेरने की कोशिश हुई तो एक बार फिर से भारत ने अपने पुराने दोस्त रूस का ही साथ दिया. दरअसल, भारत शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में अमेरिका एवं अल्बानिया द्वारा पेश किए गए उस मसौदा प्रस्ताव पर मतदान से दूर रहा, जिसमें रूस के ‘अवैध जनमत संग्रह’ और यूक्रेनी क्षेत्रों पर उसके कब्जे की निंदा की गई है.

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में रूस के खिलाफ वोटिंग में शामिल नहीं होने के बाद संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज ने शुक्रवार को कहा कि यूक्रेन में हाल के घटनाक्रम से भारत बहुत परेशान है और इस बात पर जोर दिया कि मतभेदों और विवादों को सुलझाने के लिए बातचीत ही एकमात्र जवाब है. उन्होंने कहा, ‘हम आग्रह करते हैं कि हिंसा और शत्रुता को तत्काल समाप्त करने के लिए संबंधित पक्षों द्वारा सभी प्रयास किए जाएं. मतभेदों और विवादों को सुलझाने के लिए संवाद ही एकमात्र जवाब है, चाहे वह इस समय कितना भी कठिन क्यों न हो.’

संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज ने कहा कि शांति के मार्ग के लिए हमें कूटनीति के सभी चैनलों को खुला रखने की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की सहित विश्व नेताओं के साथ अपनी चर्चा में स्पष्ट रूप से यह बताया है. उन्होंने पिछले सप्ताह उच्च स्तरीय महासभा सत्र के दौरान यूक्रेन पर विदेश मंत्री एस जयशंकर द्वारा दिए गए बयानों का भी उल्लेख किया.

दरअसल, इस प्रस्ताव में मांग की गई थी कि रूस यूक्रेन से अपने बलों को तत्काल वापस बुलाए. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के 15 देशों को इस प्रस्ताव पर मतदान करना था, लेकिन रूस ने इसके खिलाफ वीटो का इस्तेमाल किया, जिसके कारण प्रस्ताव पारित नहीं हो सका. इस प्रस्ताव के समर्थन में 10 देशों ने मतदान किया और भारत समेत चार देश मतदान में शामिल नहीं हुए.

पीएम मोदी ने एससीओ समिट के दौरान पुतिन को क्या कहा था
प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में उज्बेकिस्तान के समरकंद में हुए शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के शिखर सम्मेलन से इतर पुतिन से मुलाकात की थी और कहा था, ‘आज युद्ध का युग नहीं है और मैंने आपसे इस संबंध में फोन पर बात की थी.’इस पर पुतिन ने मोदी से कहा था कि वह ‘यूक्रेन में जारी संघर्ष को लेकर भारत की चितांओ से अच्छी तरह से वाकिफ हैं और रूस इसे जल्द समाप्त करने की हर संभव कोशिश करेगा.’

संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने क्या कहा था
गौरतलब है कि संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने बृहस्पतिवार को कहा कि धमकी या बल प्रयोग से किसी देश द्वारा किसी अन्य देश के क्षेत्र पर कब्जा करना संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों का उल्लंघन है. बता दें कि यूक्रेन के आरोप है कि रूस ने उसके कई इलाकों पर जबरन कब्जा कर रखा है.

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