यूपी चुनावः SP-RLD को जाटों की नाराजगी पड़ सकती है भारी, जानें किस मुद्दे पर बिफरे किसान आंदोलन के अगुवा

गुलाम मोहम्मद को टिकट दिए जाने से स्थानीय रालोद नेता, कार्यकर्ता, जाट समुदायों के प्रमुख चेहरे और यहां तक कि एक साल लंबे चले किसान आंदोलन में इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले कई किसान नेता भी नाराज हो गए। जाट समुदाय को लग रहा है कि कृषि कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलन में सबसे आगे रहने के बावजूद जाटों को उनका हक नहीं मिल रहा है।

जयंत चौधरी ने इस बार के विधानसभा चुनाव के लिए अखिलेश यादव के साथ गठबंधन किया है। (फोटो: ट्विटर/ अखिलेश यादव)

उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव में जाटों की नाराजगी समाजवादी पार्टी और रालोद गठबंधन को भारी पड़ सकती है। जाटलैंड कहे जाने वाले पश्चिमी उत्तरप्रदेश में सपा गठबंधन को भयंकर नुकसान झेलना पड़ सकता है। मेरठ जिले में आने वाले सिवालखास सीट पर सपा उम्मीदवार घोषित किए जाने के कारण रालोद को अपनी पार्टी के नेताओं के साथ ही कई किसान नेताओं के भी असंतोष का सामना करना पड़ रहा है।

दरअसल सिवालखास सीट मेरठ जिले में आती है लेकिन यह बागपत लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में आती है। यह सीट जाट बाहुल्य मानी जाती है। बागपत लोकसभा को पूर्व प्रधान मंत्री चौधरी चरण सिंह और उनके बेटे अजीत सिंह का गढ़ माना जाता था और दोनों ने इस सीट का प्रतिनिधित्व भी किया था। इस बार के विधानसभा चुनाव के लिए रालोद नेता सुनील रोहटा, राजकुमार सांगवान और यशवीर सिंह सिवालखास सीट से टिकट चाह रहे थे लेकिन अंत समय में यह सीट सपा के खाते में चली गई। सपा ने पिछली बार के चुनाव में दूसरे नंबर पर रहे गुलाम मोहम्मद को टिकट दे दिया।

गुलाम मोहम्मद को टिकट दिए जाने से स्थानीय रालोद नेता, कार्यकर्ता, जाट समुदायों के प्रमुख चेहरे और यहां तक कि एक साल लंबे चले किसान आंदोलन में इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले कई किसान नेता भी नाराज हो गए। जाट समुदाय को लग रहा है कि कृषि कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलन में सबसे आगे रहने के बावजूद जाटों को उनका हक नहीं मिल रहा है। कई गांवों में लोगों ने इस फैसले का विरोध करते हुए पार्टी के झंडे तक में भी आग लगा दिया। जाट महासभा ने भी ऐलान कर दिया कि अगर इस सीट से उम्मीदवार नहीं बदला जाता है तो संगठन लोगों से सपा गठबंधन को वोट नहीं देने की अपील करेगा।

सपा उम्मीदवार गुलाम मोहम्मद को भी जाट समुदाय के लोगों की नाराजगी का पता है। उन्होंने इसको आसानी से स्वीकारते हुए एक इंटरव्यू में कहा कि अगर मुझे टिकट नहीं मिलता तो हमारे लोगों की भी यही भावनाएं होतीं जो भावनाएं रालोद कार्यकर्ताओं की है। साथ ही वे किसान आंदोलन में जाट समुदाय की भागीदारी को लेकर कहते हैं कि यह सच है कि जाट समुदाय किसान आंदोलन में काफी सक्रिय रहे लेकिन मुस्लिम किसानों ने भी उनका पूरा समर्थन किया है।

हालांकि लोगों की नाराजगी की खबर जयंत चौधरी तक भी जा पहुंची है तभी तो पिछले दिनों रालोद के पूर्व संभावित उम्मीदवार राजकुमार सांगवान ने लोगों के सामने जाकर गुलाम मोहम्मद को अपना समर्थन देने का दावा किया। सिवालख़ास के अलावा जाट वोटरों की नाराजगी सरधना और हस्तिनापुर में उतारे गए समाजवादी उम्मीदवारों को लेकर भी है। हालांकि बीते दिनों बागपत की छपरौली सीट पर भी रालोद कार्यकार्ताओं ने उम्मीदवार घोषित होने के बाद हंगामा किया जिसके बाद रालोद को प्रत्याशी बदलना पड़ा।