ये है अटूट बंधनः भाई ने बुलाया था घर, पर अधूरी रह गई बहन की कसक, तो अस्थिफूल पर राखी बांध पूरा किया वादा

“भैया, मुझसे उम्र में छह साल बड़े थे। मैंने आखिरी बार उन्हें साल 2017 में रक्षासूत्र बांधा था। 2020 में तो मैं उन्हें राखी तक नहीं भेज पाई थी। भाई ने उसे लेकर मुझे उलाहने भी दिए थे कि राखी नहीं भेजी।”

Raksha Bandhan, Rakhi, India News तस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (फोटोः Pixabay)

भाई और बहन के बीच का रिश्ता अटूट होता है। जिंदगी के साथ भी और इसके बाद भी रहता है। इस बात की बानगी रविवार (22 अगस्त, 2021) को राजस्थान के नागौर जिला में देखने को मिली।

वहां भाई चिरंजीलाल ने अपनी बहन लक्ष्मी को कुछ वक्त पहले न्यौता दिया। कहा था कि घर आना और त्यौहार पर रक्षा सूत्र बांधना। पर उनकी प्यारी बहन की यह तमन्ना इस साल भी अधूरी ही रह गई। दरअसल, स्वतंत्रता दिवस की परेड के दौरान भाई को दिल का दौरा पड़ गया। वह बीएसएफ में हेड कॉन्सटेबल थे और मूल रूप से ग्राम हरसौर के रहने वाले थे। राजकीय सम्मान के साथ 17 अगस्त को गांव में ही उनका अंतिम संस्कार किया गया था।

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बहन उन्हें चार साल से राखी नहीं बांध पाई थीं। अपनी इसी कसक को मिटाने के लिए उन्होंने इस बार चिता पर राखी बांधी और भाई से किया अपना वादा सांकेतिक तौर पर निभाया। रीति-रिवाज के हिसाब से चिता के ठंडा करन के लिए वहां त्रिपादुका रखी गई थी, जिस पर लक्ष्मी ने राखी बांधी।

उन्होंने मीडिया को बताया, “भैया, मुझसे उम्र में छह साल बड़े थे। मैंने आखिरी बार उन्हें साल 2017 में रक्षासूत्र बांधा था। 2020 में तो मैं उन्हें राखी तक नहीं भेज पाई थी। भाई ने उसे लेकर मुझे उलाहने भी दिए थे कि राखी नहीं भेजी। हालांकि, 13 अगस्त को वह मुझसे मिलने जयपुर में मेरे घर आए थे।”

बकौल लक्ष्मी, “भैया इसी दौरान बोले थे कि बीते साल तो राखी भेजी नहीं। इस बार आप घर आना। मैं भी गांव आऊंगा। मुझे तब राखी जरूर बांध देना। मैंने उसी वादे को निभाने के लिए आज राखी बांधी।”