योगी सरकार को स्पेशल कोर्ट से झटका, बीजेपी एमएलए के खिलाफ दर्ज केस वापस लेने की अपील खारिज

स्पेशल कोर्ट ने अपील खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश हवाला दिया कि हाईकोर्ट की मंजूरी के बिना किसी भी विधायक या सांसद के खिलाफ दायर केस वापस नहीं लिया जा सकता।

allahabad high court इलाहाबाद HC ने पुलिस में दाढ़ी रखने की याचिका खारिज कर दी (प्रतिकात्मक तस्वीर)

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में एक स्पेशल कोर्ट ने भाजपा विधायक उमेश मलिक के खिलाफ दर्ज मामले को वापस लेने की प्रदेश सरकार की अर्जी बृहस्पतिवार को खारिज कर दी। बुढाणा विधायक ने आज सरेंडर कर उनके खिलाफ जारी गैर जमानती वारंट को वापस लेने का आग्रह किया था।

स्पेशल कोर्ट ने अपील खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश हवाला दिया कि हाईकोर्ट की मंजूरी के बिना किसी भी विधायक या सांसद के खिलाफ दायर केस वापस नहीं लिया जा सकता। शीर्ष अदालत के आदेश के आधार पर न्यायाधीश गोपाल उपाध्याय ने मलिक के खिलाफ दायर मामले को वापस लेने की उत्तर प्रदेश सरकार की अर्जी खारिज कर दी।

एमपी-एमएलए के खिलाफ दर्ज मामलों पर बिफरे सीजेआई

पुलिस ने 2006 में जिले के जानसठ रोड पर एक मांस फैक्ट्री के बाहर प्रदर्शन के बाद विधायक समेत कई लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा 147 (दंगा करने के लिए सजा), 148 (दंगा, घातक हथियार से लैस) और 149 (गैरकानूनी सभा) के तहत मामला दर्ज किया था। उमेश मलिक फरार चल रहे थे।

गौरतलब है कि हाल ही में CJI एनवी रमना की बेंच ने कहा था कि राज्य सेक्शन 321 के तहत मिली ताकत का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि विधायकों और सांसदों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मुकदमा संबंधित हाईकोर्ट की मंजूरी के बिना वापस नहीं जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान बताया गया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने मुजफ्फरनगर दंगे मामले में संगीत सोम, सुरेश राणा, कपिल देव, साध्वी प्राची का केस वापस ले लिया था। SC ने इस पर हैरानी जताते हुए कहा कि कुछ राज्य केस को वापस भी ले रहे हैं।

एमिकस क्यूरी ने सुझाव दिया कि बिना हाईकोर्ट की इजाजत के विधायकों और सांसदों के केस वापस न लिया जाए। SC ने सहमति जता आदेश जारी किया था कि बगैर हाईकोर्ट की अनुमति के ऐसा न किया जाए।