योगेंद्र यादव ने शेयर किया “ज्वलंत मुद्दों” पर कार्टून, बोले पूर्व IAS- हिम्मत है तो इन्हें चुनावी मुद्दा बनाओ; लोगों ने किए ऐसे कमेंट्स

सूर्य प्रताप सिंह ने लिखा कि केवल भाजपाई राष्ट्रभक्त और बाकी सब तालिबानी- ये ही है ना, चुनावी मास्टर-स्ट्रोक। विकास, रोज़गार, महंगाई सब गए तेल लेने-हिम्मत है तो इन मुद्दों को चुनाव में एजेंडा बनाओ।

Yogendra Yadav, Surya Pratap Singh सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव और पूर्व आईएएस अधिकारी सूर्य प्रताप सिंह (फोटो- इंडियन एक्सप्रेस)

सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव और पूर्व आईएएस अधिकारी सूर्य प्रताप सिंह ने केंद्र सरकार पर हमला बोला है। योगेंद्र यादव ने एक कार्टून शेयर कर निशाना साधा, वहीं पूर्व आईएएस अधिकारी ने ट्वीट किया कि विकास, रोज़गार, महंगाई सब गए तेल लेने-हिम्मत है तो इन मुद्दों को चुनाव में एजेंडा बनाओ।

योगेंद्र यादव ने कार्टून शेयर किया जिसमें बढ़ती बेरोजगारी, पेट्रोल की बढ़ती कीमत, फर्जी राष्ट्रवाद जैसे मुद्दों पर तंज किया गया था। वहीं सूर्य प्रताप सिंह ने लिखा कि केवल भाजपाई राष्ट्रभक्त और बाकी सब तालिबानी- ये ही है ना, चुनावी मास्टर-स्ट्रोक। विकास, रोज़गार, महंगाई सब गए तेल लेने-हिम्मत है तो इन मुद्दों को चुनाव में एजेंडा बनाओ। ऐसे लोगो के लिए हिंदी में एक अच्छा शब्द है- ढपोरशंख! दोनों के ही ट्वीट पर यूजर्स ने तरह-तरह के कमेंट्स किए, कुछ ने उनका समर्थन किया तो कुछ ने दोनों को ही ट्रोल कर दिया।

सूर्य प्रताप सिंह के पोस्ट हसमुख रामिना नाम के एक यूजर (@Hasmukh_Ramina) ने लिखा कि विशेष सूचना कोरोना की तीसरी लहर पोस्टपोन हुई क्योकि मीडिया तालिबान में व्यस्त है। राजेश शर्मा नाम के यूजर ने लिखा कि साहब इनके पास हिन्दू मुसलमान का सिबेलस है़ जो ब्रह्मास्त्र की तरह काम करता है़ अब देखना ये है़ कि आगे भी काम करेगा या नहीं।

योगेंद्र यादव के ट्वीट पर विजय यूकेटेजा नाम के यूजर (@VijKat) ने लिखा कि @ मूर्ख टाइप सेक्युलर हिंदुओं को बस महंगाई से डर लगता है, धर्मांतरण, जिहाद और आतंकवाद से नहीं। चाचा चौधरी नाम के एक यूजर ने तंज करते हुए लिखा कि अपने देश में भी पनप रहे क्रूर इस्लामी आतंक के लिए अपनी आँखें बंद करो। हमने पहले कभी इतने भारतीय मुसलमानों को तालिबानी शरिया शासन का समर्थन करते नहीं देखा था। बताते चलें कि हाल के दिनों में पूर्व आईएएस अधिकारी सूर्य प्रताप सिंह लगातार केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार पर हमलावर रहे हैं। वहीं योगेंद्र यादव भी किसान आंदोलन को लेकर सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते रहे हैं।