रक्षा मंत्रालय के नए भवन का प्रधानमंत्री मोदी ने किया उद्घाटन, विरोधियों पर साधा निशाना, बोले- जिस सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के पीछे डंडा लेकर पड़े थे लोग, उसी का हिस्सा है ये

दोनों नए भवनों के उद्घाटन होने के बाद रक्षा मंत्रालय के 27 अलग अलग कार्यालयों और तीनों सेनाओं के 7000 से अधिक कर्मचारी को इन भवनों में शिफ्ट किया जाएगा।

रक्षा मंत्रालय के दो नए दफ्तरों के उद्घाटन के मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि चुनौतियों के बावजूद इस काम को 24 महीने के बदले सिर्फ 12 महीने में पूरा किया गया। (फोटो – पीटीआई)

गुरुवार को प्रधानमंत्री मोदी ने रक्षा मंत्रालय के दो नए भवन का उद्घाटन किया। साथ ही पीएम मोदी ने सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट की वेबसाइट को भी लांच किया। रक्षा मंत्रालय के दो नए दफ्तरों के उद्घाटन के मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने कार्यक्रम को संबोधित करने के दौरान विरोधियों पर जमकर निशाना साधा। विरोधियों पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि जो लोग सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के पीछे डंडा लेकर पड़े थे वे इस प्रोजेक्ट पर चुप रहते थे।

कार्यक्रम को संबोधित करने के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने बिना किसी का नाम लिए हुए सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट का विरोध करने वाले लोगों पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के पीछे डंडा लेकर पड़े थे। वे बड़ी चालाकी से सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट का ये भी एक हिस्सा है, जहां 7,000 से अधिक सेना के अफसर काम करते हैं, वो व्यवस्था विकसित हो रही है उस पर बिल्कुल चुप रहते थे। क्योंकि उन्हें मालूम था कि जो भ्रम फैलाने का इरादा है, जैसे ही ये सारी चीजें सामने आएगी तो उनकी गपबाजी चल नहीं पाएगी।   

इसके अलावा उन्होंने कहा कि अब केजी मार्ग और अफ्रीका एवेन्यू में बने ये आधुनिक ऑफिस राष्ट्र की सुरक्षा से जुड़े हर काम को प्रभावी रूप से चलाने में बहुत मदद करेंगे। राजधानी में आधुनिक डिफेंस एन्क्लेव के निर्माण की तरफ ये बड़ा स्टेप है। साथ ही उन्होंने कहा कि डिफेंस ऑफिस कॉम्प्लेक्स का जो काम 24 महीने में पूरा होना था वो सिर्फ 12 महीने में पूरा किया गया है। वो भी तब जब कोरोना से बनी परिस्थितियों में लेबर से लेकर तमाम दूसरी चुनौतियां सामने थीं। कोरोना काल में सैकड़ों श्रमिकों को इस प्रोजेक्ट में रोजगार मिला। 

इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जब हम राजधानी की बात करते हैं तो वो सिर्फ एक शहर नहीं होता। किसी भी देश की राजधानी उस देश की सोच, संकल्प, सामर्थ्य और संस्कृति का प्रतीक होती है। भारत तो लोकतंत्र की जननी है। इसलिए भारत की राजधानी ऐसी होनी चाहिए जिसके केंद्र में लोक हो, जनता हो।

दोनों नए भवनों के उद्घाटन होने के बाद रक्षा मंत्रालय के 27 अलग अलग कार्यालयों और तीनों सेनाओं के 7000 से अधिक कर्मचारी को इन भवनों में शिफ्ट किया जाएगा। केंद्र सरकार के द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार 14 कार्यालयों को कस्तूरबा गांधी मार्ग में बने दफ्तर में शिफ्ट किया जाएगा तो 13 कार्यालयों को अफ्रीका एवेन्यू भवन में स्थानांतरित किया जाएगा। सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत आवास और शहरी विकास मंत्रालय द्वारा निर्मित इन दोनों इमारतों को आधुनिक तरीके और पर्यावरण के अनुकूल बनाया गया है।