राजीव गांधी ने RSS के सहारे 1984 का चुनाव जीता, प्रवक्ता से बोले रोहित सरदाना- आपने तो मुकदमा नहीं किया

अभय दुबे बोले,”मैं इतिहास से प्रतिशोध नहीं लेना चाहता। लेकिन राहुल जी ने कहा और हम सब मानते हैं कि इमरजेंसी लगाना और प्रजातंत्र को अवरुद्ध करना सही नहीं था, लेकिन अघोषित रूप से जो प्रजातंत्र भाजपा ने अवरुद्ध कर रखा है, वह भी सही नहीं है।”

TV debate on RSS and Emergency

टीवी चैनल आजतक पर डिबेट में एंकर रोहित सरदाना ने कांग्रेस के प्रवक्ता अभय दुबे से पूछा कि आपके मुताबिक जब देश में सभी संस्थाओं पर आरएसएस का कब्जा है तो पंजाब में आप कैसे जीत गए।  उन्होंने कहा, “अभय जी आपने कहा कि देश की सभी संस्थाओं पर आरएसएस का कब्जा है, लेकिन पंजाब में आप चुनाव जीतते हैं, मगर यह मानते हैं कि नहीं चुनाव आयोग बिका है। किसके हाथ बिका है, आपने इशारा किया कि आरएसएस के हाथ बिका है। अदालत में जब जज दिशा रवि को जमानत देते हैं तो कहते हैं कि टूटे गुरूर पर मलहम के लिए किसी पर सेडिशन नहीं लगा सकते हैं, लेकिन आपके हिसाब से न्यायालय पर आरएसएस का कब्जा है। यह सब कैसे है। तीसरी बात आपके मित्र ने लिखा है कि राजीव गांधी ने आरएसएस के सहारे चुनाव जीता था 1984 में, आप लोगों ने कोई मुकदमा नहीं किया, कोई खंडन नहीं किया।”

उनके सवालों पर जवाब देते हुए कांग्रेस प्रवक्ता अभय दुबे ने कहा, “देखिए मुकदमा नहीं, यह तो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है। कहा कि मैं फिर कहता हूं कि प्रगतिशील प्रजातंत्र में इतिहास से सीखना चाहिए, प्रतिशोध नहीं लेना चाहिए। हम शिक्षा लेंगे। जो पहले गलत हुआ है उसे बदल नहीं सकते हैं।

उन्होंने कहा, “किसी ने किताब में क्या लिखा है, वे जानें, लेकिन मैं प्रमाणिक रूप से कहता हूं कि इमरजेंसी को राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के बाला साहब देवरस ने सही ठहराया था। इंदिरा जी को एक नहीं, तीन-तीन चिट्ठियां लिखीं। उसके बाद चिट्ठी लिखी विनोबा भावे जी को। चिट्ठी में उन्होंने प्रमाणिक रूप से लिखा कि मैं संजय गांधी के बीस सूत्री कार्यक्रम का समर्थन करता हूं। उसके बाद टीवी राजेश्वर राव, जो आईबी के प्रमुख थे, उन्होंने अपनी किताब में भी इसका उल्लेख किया।”

अभय दुबे बोले,”मैं इतिहास से प्रतिशोध नहीं लेना चाहता। लेकिन राहुल जी ने कहा और हम सब मानते हैं कि इमरजेंसी लगाना और प्रजातंत्र को अवरुद्ध करना सही नहीं था, लेकिन अघोषित रूप से जो प्रजातंत्र भारतीय जनता पार्टी ने अवरुद्ध कर रखा है, वह भी सही नहीं है। सोचिए कि किसान किससे अपनी गुहार लगाने जाए। राज्यसभा में सरकार झूठ बोल देती है। सूचना के अधिकार के तहत सूचना मांगने पर झूठी सूचना दे देती है। अफसर झूठी बातें बोल देते हैं। न्यायालय में भी झूठा हलफनामा दे देते हैं। आखिर किससे कहें।”