रुचि सोया का दि‍ल्‍ली हाईकोर्ट में बयान, प्रमोटर्स के पास तीन महीने और रहेंगे मैज्‍योरिटी स्‍टेक

रुचि सोया की प्रमुख प्रमोटर पतंजलि आयुर्वेद ने दिल्ली हाई कोर्ट को बताया कि वह इंदौर स्थित एफएमसीजी रुचि सोया में अगले तीन महीने तक मैज्‍योरिटी स्‍टेक अपने पास रखेगी।

ruchi soya baba ramdev रुचि सोया के शेयरों में लगातार दो महीने से जारी गिरावट का दौर

रुचि सोया ने 4,300 करोड़ रुपए के फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफर यानी एफपीओ के लांच को लेकर आ रही एक और बाधा को पार कर लि‍या है। रुचि सोया की प्रमुख प्रमोटर पतंजलि आयुर्वेद ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया कि वह इंदौर स्थित एफएमसीजी रुचि सोया में अगले तीन महीने तक मैज्‍योरिटी स्‍टेक अपने पास रखेगी। आपको बता दें क‍ि रुचि सोया का एफपीओ अगले हफ्ते आ सकता है। इससे पहले दिल्‍ली की एक फर्म ने रुचि सोया और उसके प्रमोटर्स के खि‍लाफ दिल्‍ली हाईकोर्ट में केस दर्ज कर दिया था।

हाईकोर्ट दिल्‍ली बेस्‍ड एक कंसल्टेंसी फर्म अशव एडवाइजरी की एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसने पतंजलि आयुर्वेद, रुचि सोया और तीन अन्य संस्थाओं को अदालत में घसीटकर दावा किया था कि वह एफएमसीजी कंपनी में 11 फीसदी का मालिक है। प्रमोटर्स ने आशा एडवाइजरी के दावे का विरोध किया है। जैसा कि नाम से पता चलता है, एफपीओ उस प्रोसेस को कहते हैं जिसमें पहले से ही लिस्‍टेड कंपनी जनता के बीच शेयरों को बेचने के लिए लेकर आती है। जानकारी के अनुसार ताजा घटनाक्रम से सेबी को अवगत करा दिया गया है, जिसने पिछले सप्ताह एनएफओ को मंजूरी दी थी। एसबीआई कैपिटल मार्केट्स के नेतृत्व में मर्चेंट बैंकरों के जल्द ही एफपीओ लांच करने की उम्मीद है।

रुचि सोया ने 14 जून को सेबी नियामक के पास अपना ऑफर डॉक्‍युमेंट दाखिल किया था। एफपीओ के मुख्य कारणों में से एक कंपनी में प्रमोटर की हिस्सेदारी को कम करना है। वर्तमान में, बाबा रामदेव के पतंजलि समूह और कंपनी के प्रमोटर्स की रुचि सोया में लगभग 99 फीसदी की हिस्सेदारी है। जबकि नए नियमों के अनुसार लिस्‍टेड कंपनियों में कंपनी प्रमोटर्स की हिस्‍सेदारी 75 फीसदी से ज्‍यादा नहीं होनी चाहिए। प्रमोटर्स के पास अपनी हिस्‍सेदारी कम करने का 2022 तक का समय है।

हाल ही में एक इंटरव्यू में बाबा रामदेव ने कहा था कि वह रुचि सोया एफपीओ के लिए आकर्षक कीमत पर विचार कर रहे हैं। नवंबर 2019 के बाद से जब सुप्रीम कोर्ट द्वारा कंपनी के लिए समाधान योजना को मंजूरी दी गई थी, जून 2020 के अंत में स्टॉक लगभग 450 गुना बढ़कर 1,455 रुपए हो गया था, जो नवंबर 2019 की शुरुआत में लगभग 3 रुपए था।