रूस की लामबंदी के बाद नए लड़ाकों ने शुरू की ट्रेनिंग, देख कर दहक उठे पश्चिमी देश

हाइलाइट्स

हथियारों, सैन्य उपकरणों के संचालन में अपने कौशल को दे रहे हैं धार
कलिनिनग्राद में रूस दे रहा है नए सैनिकों को स्पेशल ट्रेनिंग
लामबंदी के बाद 10 लाख सैनिकों को भर्ती कर सकता है रूस

मॉस्को. रूस के रक्षा मंत्रालय ने लामबंदी की घोषणा के बाद बुधवार को कहा कि कलिनिनग्राद क्षेत्र में नए जुटाए गए सैनिकों ने रूस के बाल्टिक बेड़े के आधार पर युद्ध प्रशिक्षण शुरू कर दिया है. मंत्रालय ने अपने टेलीग्राम चैनल पर सैन्य ट्रेनिंग की जानकारी देते हुए कहा कि जुटाए गए सभी सैन्य कर्मी छोटे हथियारों से ट्रेनिंग कर रहे हैं. इसके अलावा, रिजर्व सैनिक के तौर पर बुलाए गए नागरिक हथियारों, सैन्य और विशेष उपकरणों के संचालन और रखरखाव में अपने कौशल को धार दे रहे हैं.

इन नए लड़ाकों को किसी भी परिस्थिति से निपटने के लिए अपनी फायरिंग कौशल को बढ़ाने और युद्ध के मैदान पर आत्मविश्वास से भरी कार्रवाई करने के लिए सैन्य कर्मियों के विशेष रूप से तैयार पाठ्यक्रम भी दिखाए जा रहे हैं. कलिनिनग्राद में रूस की महत्वपूर्ण सैन्य उपस्थिति है. यह नाटो और यूरोपीय संघ के सदस्यों पोलैंड और लिथुआनिया के बीच स्थित एक रूसी बाल्टिक तट है, जिसमें परमाणु-सक्षम मिसाइल और हजारों सैनिक मौजूद हैं.

आपको बता दें कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पिछले सप्ताह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से रूस की पहली सैन्य लामबंदी का आदेश दिया था, जिसमें सैकड़ों हजारों लोग यूक्रेन में लड़ने के लिए भेजे जा सकते हैं. हालांकि घोषणा के बाद से कई युवाओं में देश छोड़ने की होड़ लग गई. बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक कुछ लोग रूस के पड़ोसी देशों में जाने के लिए लगी लंबी कतारों से बचने के लिए पैदल या साइकिल के जरिये सीमा पार कर रहे हैं. बहुत से युवा तो इसलिए देश छोड़ रहे है क्योंकि उन्हें अपनी पढ़ाई जारी रखनी है और आंशिक लामबंदी के तहत उन्हें युद्ध में झोंका जा सकता है. इसलिए वह 12-12 घंटे कतार में खड़े होकर सीमा पार जाने का इंतजार कर रहे हैं.

जॉर्जिया रूस के उन कुछ पड़ोसी देशों में से एक है जहां जाने के लिए रूस को वीजा लेने की जरूरत नहीं पड़ती है. इसी तरह फिनलैंड जो रूस के साथ करीब 1300 किमी की सीमा साझा करता है, वहां यात्रा करने के लिए वीजा की जरूरत पड़ती है. लेकिन वहां भी रातभर में ट्रैफिक काफी बढ़ गया है. हालांकि यहां स्थिति इतनी खराब नहीं है. इसी तरह कुछ जगह जहां हवाई रास्ते से जाया जा सकता है, जैसे इस्तांबुल, बेलग्राद या दुबई में सैन्य बुलावे की घोषणा यानी कॉल अप के बाद फ्लाइट के दाम आसमान छू रहे हैं. लेकिन इसके बावजूद कुछ जगह सभी टिकट बिक चुके हैं.

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