लखीमपुर की ओर मुड़ गया सियासी रुख, ममता बनर्जी की पार्टी के नेता भी ‘टूरिस्ट’ बन पहुंचे, पुलिस को यूं दिया चकमा

एक तरफ यूपी में विपक्षी नेताओं के जाने से रोका जा रहा है तो दूसरी तरफ कांग्रेस पार्टी ने ट्वीट किया कि राहुल गांधी के नेतृत्व में बुधवार को पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल लखीमपुर खीरी जाएगा।

Lakhimpur Kheri, Political scenario लखीमपुर खीरी में इसी जगह पर केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा की कार से प्रदर्शनकारी किसानों को कुचला गया था। (फोटो- इंडियन एक्सप्रेस)

चार दिन पहले यूपी के लखीमपुर खीरी में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा के बेटे की कार से चार किसानों की मौत और बवाल के बाद योगी आदित्यनाथ सरकार ने मंगलवार को विपक्षी नेताओं को वहां पहुंचने से रोकने की हर मुमकिन कोशिश करना जारी रखा। कांग्रेस नेता और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को पुलिस ने लखनऊ एयरपोर्ट परिसर से ही बाहर नहीं निकलने दिया। दूसरे दलों के नेताओं को भी किसी भी हालत में लखीमपुर खीरी पहुंचने से रोका जा रहा है। हालांकि, टीएमसी सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल पुलिस को ‘चकमा’ देकर पर्यटक के रूप में लखीमपुर खीरी पहुंचने में सफल रहा। इससे अब पूरा सियासी रुख लखीमपुर खीरी की ओर मुड़ गया है।

कांग्रेस महासचिव और यूपी प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा, जिन्हें सीआरपीसी की धारा 151 (संज्ञेय अपराध को रोकने के लिए) के तहत बुक किया गया था, अभी भी हिरासत में है। सोमवार की देर रात धारा 144 का उल्लंघन (गैरकानूनी सभा करने पर) समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के खिलाफ भी एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी।”

इस बीच कांग्रेस पार्टी ने ट्वीट किया कि राहुल गांधी के नेतृत्व में बुधवार को पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल लखीमपुर खीरी जाएगा। पार्टी ने कहा कि एआईसीसी महासचिव के सी वेणुगोपाल ने सीएम आदित्यनाथ को पत्र लिखकर उन्हें अनुमति देने के लिए अनुरोध किया है।

छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल, जिनके विमान को सोमवार को लखनऊ हवाई अड्डे पर उतरने की अनुमति नहीं दी गई थी, मंगलवार को किसी तरह लखनऊ तो पहुंच गए, लेकिन पुलिस ने उन्हें हवाई अड्डे से बाहर निकलने से रोक दिया। बघेल ने कहा, “मैं लखीमपुर नहीं जा रहा हूं, जहां निषेधाज्ञा लागू है। मैं केवल उत्तर प्रदेश कांग्रेस कार्यालय जा रहा हूं।” वह सीतापुर में गिरफ्तार प्रियंका वाड्रा से भी मिलना चाहते थे।

बघेल यूपी के राज्य चुनावों के लिए कांग्रेस पार्टी के पर्यवेक्षक हैं। उन्होंने हवाई अड्डे से पत्रकारों के साथ वर्चुअली बातचीत में कहा, “लखीमपुर की सच्चाई एक दिन सामने आएगी … जो लोग किसानों को अपने तरीके से सुधार देने की चेतावनी वाली भाषा बोल रहे हैं, वे बर्खास्त होंगे और किसानों को रौंदने वाले उनके बेटे को सलाखों के पीछे जाना होगा।”

लखनऊ में मंगलवार को एक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण में लखीमपुर की घटना का कोई जिक्र नहीं होने के बारे में पूछे जाने पर, बघेल ने कहा, “वे (भाजपा) किसान विरोधी रहे हैं और उनके लिए एक शब्द भी नहीं बोलेंगे।”

अपनी “हिरासत और गिरफ्तारी” की वैधता पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस महासचिव प्रियंका वाड्रा ने कहा कि उन्हें केवल मौखिक रूप से सोमवार सुबह 4.30 बजे सूचित किया गया था कि उन्हें गिरफ्तार किया जा रहा है। कहा कि उन्हें “उसके बाद किसी वजह या हालात के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई।” न ही यूपी पुलिस या प्रशासन ने उन्हें “जिन धाराओं के तहत गिरफ्तारी की गई है, के बारे में कुछ दिखाया।” उन्हें मंगलवार शाम 6:30 बजे प्राथमिकी दिखाई गई।

वे बताईं कि उन्होंने “सोशल मीडिया पर पेपर का एक हिस्सा देखा, जिसमें 11 लोगों के नाम हैं – जिनमें से 8 उस समय मौजूद भी नहीं थे, जब मुझे गिरफ्तार किया गया था।” प्रियंका वाड्रा ने कहा, “वास्तव में उसमें उन दो व्यक्तियों के भी नाम थे, जो लखनऊ से दोपहर 4 बजे मेरे कपड़े लेकर आए थे। मुझे मजिस्ट्रेट या किसी अन्य न्यायिक अधिकारी के सामने पेश नहीं किया गया है। मुझे अपने कानूनी वकील से भी मिलने नहीं दिया गया, जो सुबह से गेट पर खड़ा है।’

उन्होंने कहा कि जब उन्हें सीतापुर में हिरासत में लिया गया था, तब जिले में उनकी जानकारी में धारा 144 नहीं लगी थी। उन्होंने कहा, “मैं चार अन्य व्यक्तियों, दो स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ताओं तथा श्री दीपेंद्र हुड्डा और श्री संदीप सिंह के साथ एक ही वाहन में यात्रा कर रही थी।”

उधर, कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने कहा कि प्रियंका वाड्रा की नजरबंदी के तथ्य और परिस्थितियां “निर्णायक रूप से साबित करती हैं कि यूपी में कानून का शासन नहीं है”। “वह 30 घंटे से अधिक समय से हिरासत में है। उसे न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने पेश नहीं किया गया है… अनुच्छेद 19 और 21 के तहत उनके संवैधानिक अधिकारों का घोर उल्लंघन किया गया है।”

पूर्व भाजपा सांसद सावित्री बाई फुले, जिन्होंने पार्टी छोड़ दी है, ने लखीमपुर खीरी जाने से रोकने के लिए एक पुलिस वाहन में उन्हें जबरदस्ती ले जाने की तस्वीरें ट्वीट कीं। आप के राज्यसभा सांसद संजय सिंह को भी 30 घंटे से अधिक समय तक गेस्ट हाउस में रखने के बाद धारा 151 के तहत गिरफ्तार कर लिया गया। उन्होंने कहा कि वह अब भी लखीमपुर जाएंगे और पीड़ितों के परिवार के सदस्यों से जब भी मिलेंगे।

एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा की तुलना जलियांवाला बाग हत्याकांड से की है। पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री पवार ने कहा, “चाहे केंद्र में सरकार हो या उत्तर प्रदेश में, वे संवेदनशील नहीं हैं। जलियांवाला बाग में जिस तरह की स्थिति पैदा हुई, हम यूपी में भी ऐसी ही स्थिति देख रहे हैं।”

दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ बैठक के दौरान, पंजाब के सीएम चरणजीत सिंह चन्नी, जो सोमवार को लखीमपुर खीरी नहीं जा सके, ने अनुरोध किया कि सभी हिरासत में लिए गए कांग्रेस नेताओं को रिहा कर दिया जाए और उन्हें साइट पर जाने दिया जाए। चन्नी ने कहा कि उन्होंने गृह मंत्री से कृषि कानूनों को निरस्त करने का भी आग्रह किया।