लखीमपुर की लड़ाई: अखिलेश यादव के मुकाबले प्रियंका गांधी ने मारी बाजी, कांग्रेस का ग्राफ बढ़ा

2017 में जब प्रियंका गांधी को पश्चिमी यूपी का प्रभारी बनाया गया था, उसके बाद से ये कहा जा रहा था कि कांग्रेस यूपी में मजबूत होगी। लगता है कि 2021 में वो समय आ गया है।

Priyanka Gandhi कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी मौके पर डटे हुई हैं और राजनीतिक रूप से इस मुद्दे ने यूपी में कांग्रेस को काफी एक्टिव कर दिया है। (फाइल फोटो-PTI)

यूपी के लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा का मामला लगातार तूल पकड़ रहा है। विपक्ष हर तरह से सरकार को घेरने को कोशिश कर रहा है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी मौके पर डटे हुई हैं और राजनीतिक रूप से इस मुद्दे ने यूपी में कांग्रेस को काफी एक्टिव कर दिया है।

2017 में जब प्रियंका गांधी को पश्चिमी यूपी का प्रभारी बनाया गया था, उसके बाद से ये कहा जा रहा था कि कांग्रेस यूपी में मजबूत होगी, लेकिन ऐसा पहली बार 2021 में आकर हुआ है, जब किसी मुद्दे के साथ सबसे ज्यादा चर्चा प्रियंका गांधी की हो रही है।

महाराष्ट्र में शिवसेना, एनसीपी से लेकर कश्मीर में महबूबा मुफ्ती तक ने प्रियंका के स्टैंड की तारीफ की है।

प्रियंका गांधी सोमवार को लखीमपुर जाने के लिए निकलीं थीं। जिसके बाद यूपी पुलिस ने हरगांव के पास से उन्हें हिरासत में ले लिया था। हिरासत में लेने के बाद प्रियंका गांधी को सीतापुर के गेस्ट हाउस में रखा गया था। जहां आज राहुल गांधी उनसे मिले और फिर दोनों लोग लखीमपुर हिंसा के पीड़ितों से मिलने के लिए रवाना हो गए।

वहीं समाजवादी पार्टी के नेता और यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव इस मुद्दे पर अपना असर छोड़ने में प्रियंका के मुकाबले काफी पीछे रह गए। वह अब तक किसानों से नहीं मिल पाए हैं। यूपी सरकार के निर्देशों के मुताबिक, प्रियंका और अखिलेश को पहले किसानों से मिलने की परमिशन नहीं मिली थी, लेकिन इस मुद्दे पर प्रियंका माहौल बना ले गईं और अखिलेश ज्यादा लाइमलाइट में नहीं आ पाए।

हालांकि अब खबर मिली है कि अखिलेश यादव गुरुवार को लखीमपुर जाएंगे और पीड़ित परिवारों से मिलेंगे।

क्या है लखीमपुर मामला: लखीमपुर खीरी में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा पर किसान संगठनों ने आरोप लगाया है कि उनकी गाड़ी किसानों को रौंदती हुई निकल गई थी, जिससे चार किसानों की मौत गई, जबकि कई घायल हो गए हैं। इस घटना का वीडियो भी वायरल हो रहा है। किसान इस मामले में आशीष मिश्रा की गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं। ऐसे में बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व पर भी प्रेशर बढ़ गया है क्योंकि इस घटना की वजह से विपक्षी पार्टियां चारों तरफ से उसे घेर रही हैं।