लखीमपुर खीरी कांड: राकेश टिकैत के कहने पर विपक्षियों को दूर रख रही योगी सरकार! किसानों को शांत कराने में मुश्किल का था डर; रात डेढ़ से दोपहर दो बजे तक चली थी बात; जुटी थी 25 हजार की भीड़

टिकैत द्वारा निभाई गई भूमिका महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्हें यूपी में किसानों का चेहरा माना जाता है। चुनाव वाले राज्य में, तीन कृषि कानूनों का विरोध बड़े पैमाने पर पश्चिमी जिलों में केंद्रित हैं, जहां टिकैत लंबे समय से किसानों के लिए काम कर रहे हैं।

Lakhimpur Kheri, Farmers Protest भारतीय किसान संघ (बीकेयू) के नेता राकेश टिकैत। (फोटो- इंडियन एक्सप्रेस)

Bhupendra Pandey

उत्तर प्रदेश सरकार ने लखीमपुर खीरी कांड में हुए बवाल को और आगे बढ़ने से रोकने और हिंसा पर लगाम कसने के लिए जिस नेता की मदद ली, वे हैं भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष राकेश टिकैत। उनकी सलाह पर ही विपक्षी नेताओं को घटनास्थल पर पहुंचने से रोका गया और उनकी मदद से ही 24 घंटे के अंदर ही वहां जुटी 25 हजार किसानों की भीड़ को मौके से हटाया जा सका। ऐसा नहीं करने पर हिंसा बढ़ सकती थी। राकेश टिकैत के साथ ही कई ऐसे वरिष्ठ अधिकारी भी बातचीत कर रहे थे, जिनके पास वर्षों तक पश्चिमी यूपी में ऐसे हालातों को नियंत्रित करने का अनुभव था।

सूत्रों ने कहा कि इन अफसरों ने अन्य लोगों के साथ मध्यस्थता के लिए टिकैत से संपर्क किया और उन्हें जल्द से जल्द लखीमपुर खीरी ले आए। इसके बाद उनकी मध्यस्थता में बातचीत शुरू हुई, जो सोमवार रात लगभग 1.30 बजे शुरू हुई और करीब 12 घंटे बाद दोपहर 2 बजे समाप्त हुई। टिकैत ने लखनऊ से अपने साथ समन्वय कर रहे अधिकारियों से विपक्षी नेताओं को दूर रखने के लिए कहा था, क्योंकि उनकी वजह से किसानों को समझाने और शांत करने में मुश्किल होती।

योगी आदित्यनाथ सरकार ने सड़कों को अवरुद्ध कर दिया, विमान को उतरने से रोक दिया और नेताओं को हिरासत में ले लिया ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि विपक्षी नेता मंगलवार को भी मौके पर नहीं पहुंच सके। टिकैत द्वारा निभाई गई भूमिका महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्हें यूपी में कृषि कानून विरोध का चेहरा माना जाता है। चुनाव वाले राज्य में, यह विरोध बड़े पैमाने पर पश्चिमी जिलों में केंद्रित हैं, जहां टिकैत लंबे समय से किसानों के लिए काम कर रहे हैं। यह उनके पिता महेंद्र सिंह टिकैत के समय से शुरू हुआ था।

मौके पर मौजूद एक अधिकारी ने कहा कि टिकैत ने कभी भी बातचीत में या किसानों को संबोधित करते हुए राज्य सरकार के प्रति कोई आक्रामकता या आलोचना नहीं की। प्रदर्शनकारियों के तितर-बितर होने के बाद ही वह लखीमपुर खीरी से निकले।

टिकैत की टीम ने तीन मांगें रखीं – जिसमें केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा और उनके बेटे आशीष के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करना (किसानों ने आरोप लगाया है कि आशीष ही उस कार को चला रहे थे, जिससे कुचल कर चार प्रदर्शनकारियों की मौत हुई थी।); प्राथमिकी की प्रति तत्काल प्रस्तुत करना; प्रत्येक मृत किसान के परिजनों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा; और उनके पैतृक जिले में उनके परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी उपलब्ध कराना शामिल है।

अधिकारियों ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि मामला दर्ज किया जाएगा। हालांकि, मुआवजे को थोड़ा कम करने और सरकारी नौकरी पर जोर नहीं देने को कहा गया, लेकिन टिकैत के नेतृत्व वाला प्रतिनिधिमंडल इस पर राजी नहीं हुआ।

अधिकारियों ने स्वीकार किया कि इस दौरान कई बार तनाव बढ़ता दिखा, क्योंकि भीड़ मौके पर चारों ओर बढ़ती जा रही थी। उन्हें डर था कि किसी भी छोटी सी घटना से कथित तौर पर तलवारों, लाठियों और लाइसेंसी बंदूकों से लैस गुस्साए किसानों की मौके पर तैनात पुलिस, आरएएफ और एसएसबी के लोगों के साथ झड़प न हो जाए।

दोपहर करीब 1 बजे अपर मुख्य सचिव कृषि देवेश चतुर्वेदी, एडीजी लॉ एंड ऑर्डर प्रशांत कुमार और एडीजी लखनऊ जोन एसएन साबत कथित तौर पर लखनऊ से अंतिम मंजूरी के बादआशीष के खिलाफ एफआईआर की कॉपी लेकर किसानों से बात करने पहुंचे।