लखीमपुर खीरी ग्राउंड जीरो से: प्रदर्शनकारी किसान से लेकर बीजेपी कार्यकर्ताओं तक, मौत के बाद पीछे छूट गए रोते बिलखते परिवार

लखीमपुर की घटना के बाद हर तरफ सिर्फ लोगों की सिसकियां ही सुनाई दे रही है। घटना में जान गंवाने वालों का कहना है कि उन्हें सिर्फ न्याय चाहिए।

farmers protest, Farm Laws उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में रविवार को मारे गए किसानों की मौत पर रोते-बिलखते परिवार। (फोटो- विशाल श्रीवास्तव- इंडियन एक्सप्रेस)

लखीमपुर खीरी में कारों के काफिले की चपेट में आने से मारे गए चार किसान प्रदर्शनकारियों के अलावा, रविवार को झड़पों में जान गंवाने वाले चार और लोग थे, जिनमें दो स्थानीय भाजपा कार्यकर्ता, एक पत्रकार और एक ड्राइवर था, जिसे केंद्रीय राज्य मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा ने रखा था। टक्कर मारने वाली कारों के काफिले में एक वाहन आशीष का भी था।

मारे गए चार प्रदर्शनकारियों की पहचान गुरविंदर सिंह (18), दिलजीत सिंह (35), नछत्तर सिंह (55) और लवप्रीत सिंह (19) के रूप में हुई है। गुरविंदर और दिलजीत बहराइच जिले के थे, जबकि नछत्तर और लवप्रीत लखीमपुर खीरी जिले के थे। गुरविंदर के चाचा नस्कीन सिंह ने बताया, “गुरविंदर ने अपनी दसवीं कक्षा पूरी कर ली थी और कतर में एक लेबर के रूप में काम करना चाहता था। उसके सारे सपने उसके साथ चले गए।”

गुरविंदर के परिवार में उसके माता-पिता, भाई गुरसेवक (22) और बहन रजनी (20) हैं। नस्कीन सिंह ने कहा, ” उसने कहा था कि वह एक अच्छे काम के लिए जा रहा है और अगर वह मर भी गया, तो वह भी एक अच्छे काम के लिए होगा। हमने उसके इस बात पर ध्यान नहीं दिया… कौन जानता था कि ऐसा होगा।”

तिकुनिया में धरना स्थल पर लवप्रीत की बहन गगनदीप बेहद दुखी थी। उसने कहा, “वह हमारा इकलौता भाई था।” लवप्रीत के परिवार में किसान माता-पिता और दो बहनें हैं।

नछत्तर के बेटे मंदीप (30) ने कहा कि वह अपने सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) प्रशिक्षण के लिए अल्मोड़ा में थे, जब उन्होंने अपने पिता की मृत्यु के बारे में सुना। उन्होंने कहा, “मुझे नहीं पता कि क्या हुआ। हमें न्याय की उम्मीद है।” नछत्तर के परिवार में उनकी पत्नी जसवंत, मनदीप, बेटियां अमनदीप (20) और सरबजीत (22) हैं। जसवंत ने कहा, “वह पहली बार विरोध प्रदर्शन के लिए गए थे और कहा था कि वह शाम तक वापस आ जाएंगे।”

दिलजीत के चचेरे भाई शेर सिंह ने कहा कि मृत किसान अपने पीछे दो किशोर बेटे परमीत कौर (16) और राजदीप सिंह (14) छोड़ गया है। शेर सिंह ने कहा, “उनका एक बेटा भी उनके साथ धरना देने गया था। वह घायल है और उसका इलाज चल रहा है।” उन्होंने कहा, “दिलजीत किसानों के विरोध प्रदर्शन में जाते थे… उन्हें लगा कि यह आंदोलन किसानों के लिए महत्वपूर्ण है।”

संघर्ष में मारे गए चार लोगों में से एक शुभम मिश्रा (26) लखीमपुर खीरी के जिला मुख्यालय शिवपुरी में एक स्थानीय भाजपा नेता था। सोमवार को उनके घर के बाहर कुछ रिश्तेदार और पड़ोसी शोक जताने के लिए जमा हो गए। इनमें उनके चाचा अनूप मिश्रा भी थे। अनूप ने कहा, “एक जीवन एक जीवन है। हम न्याय की उम्मीद करते हैं..हम उम्मीद करते हैं कि सरकार हमें मरने वाले किसानों के समान इलाज मुहैया कराएगी।” यह पूछे जाने पर कि क्या उन्हें प्रशासन या सरकार से कोई आश्वासन मिला है, उन्होंने जवाब दिया: “नहीं, हमें नहीं मिला है। केवल स्थानीय विधायक आए और हमसे मिले… हमें न्याय या मुआवजे का कोई आश्वासन नहीं दिया गया है।”

व्यवसायी शुभम के परिवार में उनकी पत्नी रेखा और एक वर्षीय बेटी एंजेल हैं। उनके पिता विजय जो कि एक किसान हैं, ने कहा कि उन्होंने नहीं देखा कि उनके बेटे को किसने मारा, इसलिए किसी के खिलाफ आरोप नहीं लगा सकते। विजय ने कहा, “मुझे नहीं लगता कि किसान ऐसा कुछ कर सकते हैं। यह असामाजिक तत्वों द्वारा किया गया होगा।” उनका एक और बेटा शांतनु (24) है।

शुभम के दोस्त प्रवीण मिश्रा ने कहा, “कोई उसके साथ ऐसा कैसे कर सकता है। उसका सिर पूरी तरह कुचल गया। उसकी पहचान उसके कपड़ों से हुई, क्योंकि उसका चेहरा पहचाना नहीं जा सकता था।” लखीमपुर खीरी में भाजपा की जिला इकाई के प्रमुख सुनील सिंह ने द इंडियन एक्सप्रेस से पुष्टि की कि शुभम पार्टी का एक नेता था।

उन्होंने कहा, “मरने वाले आठ लोगों में वह भी था। सिंघई प्रखंड के मंडल मंत्री रहे पार्टी के एक अन्य नेता श्याम सुंदर (40) की भी रविवार को हुई हिंसा में मौत हो गई… मुझे जांच पर पूरा भरोसा है। दोनों पक्षों के साथ न्याय किया जाएगा और आरोपी को कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।”

उन्होंने कहा, केंद्रीय राज्य मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा का ड्राइवर हरि ओम मिश्रा भी मृतकों में है। कहा कि, “हरि ओम (35) जिले के फरधन क्षेत्र का रहने वाला था।”

संघर्ष में मरने वाले चौथे व्यक्ति की पहचान लखीमपुर खीरी जिले के निघासन इलाके के एक स्थानीय पत्रकार रमन कश्यप (30) के रूप में हुई है, जो साधना टीवी के लिए एक स्ट्रिंगर के रूप में काम करता था। साधना टीवी के बृजमोहन सिंह ने कहा, “वह उस समय मारा गया जब वह घटना का वीडियो शूट कर रहा था। प्रदर्शनकारियों ने उन्हें पीट-पीट कर मार डाला।”