लखीमपुर हिंसा में मृतकों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई सामने, घिसटने और चोट लगने से हुई 8 लोगों की मौत, गोली लगने से नहीं गई किसी की जान

लखीमपुर खीरी हिंसा में लोगों की मौत घिसटने के बाद शॉक, ब्रेनहैमरेज और अत्याधिक खून बह जाने के कारण हुई है। पोस्टमार्ट रिपोर्ट के अनुसार किसी की भी मौत गोली लगने से नहीं हुई है।

Lakhimpur post mortam report, lakhimpur update, lakhimpur violence लखीमपुर हिंसा में मारे गए किसानों के रोते-बिलखते परिजन (फोटो- इंडियन एक्सप्रेस)

लखीमपुर हिंसा में मृतकों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट मंगलवार को आ गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कहा गया है कि सभी आठ लोगों की मौत चोट लगने, घसीटने, खून के ज्यादा बह जाने और ब्रेन हैमरेज के कारण हुई है। इनमें से किसी को भी गोली नहीं लगी है।

लखीमपुर हिंसा में मारे गए चार किसानों की ऑटोप्सी रिपोर्ट से पता चला है कि किसानों की मौत सदमे, अत्यधिक खून बहने और ब्रेन हैमरेज के कारण हुई। इनमें गोली लगने के कोई निशान नहीं मिले हैं। मृत किसानों की पहचान छत्र सिंह, दलजीत सिंह, लवप्रीत सिंह और गुरविंदर सिंह के रूप में हुई है।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कहा गया है कि 18 वर्षीय किसान लवप्रीत सिंह की मौत घसीटने, ब्रेन हैमरेज और अत्याधिक खून बह जाने से हुई है। रिपोर्ट के अनुसार गुरविंदर सिंह के शरीर पर किसी नुकीली चीज से चोट लगी है। उनकी मौत भी सदमे और खून बह जाने के कारण हुई थी। वहीं दलजीत सिंह की मौत घसीटने के कारण हुई है। उनके शरीर पर चोट के अन्य निशान भी थे। जबकि छत्र सिंह की मौत शॉक, ब्रेन हमरेज और कोमा के कारण हुई है।

इसी हिंसा में बीजेपी के कार्यकर्ता भी मारे गए हैं। जिसमें शुभम मिश्रा के शरीर पर कई चोटें मिली हैं। हरिओम मिश्रा की मौत लाठी से पीटने से हुई है। उनके शरीर पर भी चोट के कई निशान हैं, मौत का एक कारण ब्रेन हैमरेज भी बताया जा रहा है। श्यामसुंदर निषाद की भी लाठी-डंडे से पीटने और घसीटने से मौत हुई है। स्थानीय पत्रकार रमन कश्यप के शरीर पर भी कई चोट के निशान मिले हैं। इनकी मौत भी शॉक और ब्रेन हैमरेज के कारण हुई है।

बता दें कि यूपी के लखीमपुर में तब हिंसा भड़क उठी जब कथित तौर पर केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा के बेटे की गाड़ियों ने प्रदर्शन कर रहे किसानों के ऊपर गाड़ी चढ़ा दी। इसके बाद जो हिंसा भड़की उसमें आठ लोगों की मौत हो गई और दर्जनों घायल हो गए। किसान संगठन इस घटना के लिए आशीष मिश्रा को दोषी ठहरा रहे हैं और कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

वहीं हिंसा के बाद सरकार की ओर से मृतक के परिजनों को 45-45 लाख रुपये देने की घोषणा की गई है। राज्य सरकार ने इस मामले की जांच हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज से कराने की बात कही है।