लामबंदी में आये आधे लोगों को रूसी सेना ने लौटाया, इस गड़बड़ी के लिए हटाया सैन्य कमिश्नर

हाइलाइट्स

10 दिनों में लगभग आधे लोगों को वापस भेजा गया घर
रूस में अपात्र लोगों को भी लामबंदी के लिए कॉल की जा रही हैं
सेना के मानदंडों को पूरा नहीं कर पाने के चलते भेजा गया वापस

मॉस्को. रूस में लामबंदी की घोषणा के बाद से कई लापरवाहियों के चलते आम जन मानस को असुविधाओं का शिकार होना पड़ रहा है. ऐसी ही एक गड़बड़ी के बाद रूसी सेना ने अपने खाबरोवस्क क्षेत्र के सैन्य कमिश्नर को उनके पद से हटा दिया. न्यूज़ एजेंसी रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार सेना की ओर से गलत लोगों को लामबंदी की कॉल देने के चलते करीब आधे लोगों को वापस उनके घर भेजना पड़ गया. क्षेत्र के गवर्नर ने सोमवार को बताया कि सेना और ड्राफ्ट के मानदंडों को पूरा नहीं कर पाने के चलते इन लोगों को वापस लौटा दिया गया है.

बढ़ रही हैं गड़बड़ियां
21 सितंबर को राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन द्वारा घोषित लामबंदी के बाद से रूस की सेना जल्द से जल्द करीब तीन लाख अतिरिक्त सैनिकों की भर्ती करना चाह रही है. ऐसे में अपात्र लोगों को भी लामबंदी के लिए कॉल की जा रही हैं. रूस के रक्षा मंत्रालय ने पहले ही साफ कर दिया है कि केवल सेना में रिजर्व बल के तौर पर तैनात लोगों और रिटायर कमर्चारियों को ही इस लामबंदी में बुलाया जाएगा. बावजूद इसके कई मौकों पर आम लोगों को भी सेना से कॉल जा रही है.

नहीं पूरा कर पाए क्राइटेरिया
सेना में भर्ती होने के मानदंडों को पूरा नहीं करने के बाद अधिकारियों ने आधे लोगों को घर लौटा दिया है. रूस के सुदूर पूर्व में खाबरोवस्क क्षेत्र के गवर्नर मिखाइल डिग्ट्यरेव ने टेलीग्राम पर एक वीडियो पोस्ट करते हुए बताया कि पिछले 10 दिनों में, रूस के कई हजार देशवासियों ने समन प्राप्त किया और वे सैन्य पंजीकरण के लिए भर्ती कार्यालयों में पहुंचे थे. उनमें से लगभग आधे घर लौट आए क्योंकि वे सैन्य सेवा में प्रवेश के लिए चयन मानदंडों को पूरा नहीं कर सकें. डिग्ट्यारेव ने आगे कहा कि कमिश्नर यूरी लाइको को हटाने से पुतिन द्वारा निर्धारित लामबंदी योजना प्रभावित नहीं होगी.

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