लाल बहादुर शास्त्री ने PM बनने से पहले खुद इंदिरा गांधी को ऑफर की थी ‘कुर्सी’, यह कहते हुए कर दिया था इंकार

इंदिरा ने जब पीएम की कुर्सी ठुकराई तो शास्त्री ने उनसे आग्रह किया कि उनके बगैर वे मजबूत सरकार नहीं बना पाएंगे, ऐसे में उन्हें कम से कम मंत्री पद जरूर ग्रहण करना चाहिए।

Indira Gandhi, Lal Bahadur Shashtri पूर्व पीएम इंदिरा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री (एक्सप्रेस आर्काइव)

27 मई 1964। प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू का निधन हो गया। पंडित नेहरू के निधन के बाद देश के सामने नेतृत्व का संकट तो खड़ा ही हुआ, कांग्रेस के अंदर का द्वंद भी सतह पर आ गया। यूं तो नेहरू ने अपनी बेटी इंदिरा गांधी को सियासत के तमाम गुर सिखाए थे और राजनीति की पथरीली राहों पर चलने के लिए तैयार किया था, लेकिन नियति को कुछ और मंजूर था। पंडित नेहरू के निधन के बाद कांग्रेस में सिंडिकेट गुट के नेताओं ने लाल बहादुर शास्त्री को प्रधानमंत्री चुन लिया। खासकर के. कामराज ने शास्त्री को प्राथमिकता दी।

सिंडिकेट गुट के नेताओं ने भले ही इंदिरा को पूरी तरह नजरंदाज कर लाल बहादुर शास्त्री का नाम आगे कर दिया हो लेकिन खुद शास्त्री जी चाहते थे कि इंदिरा गांधी ही प्रधानमंत्री बनें। वरिष्ठ पत्रकार और लेखक रशीद किदवई ने अपनी हालिया किताब ‘भारत के प्रधानमंत्री: देश, दशा, दिशा’ में इस घटना का विस्तार से जिक्र किया है।

किदवई इंदिरा गांधी की मित्र और सलाहकार रहीं पुपुल जयकर के हवाले से लिखते हैं कि प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने से पहले शास्त्री ने इंदिरा गांधी को अपने पास बुलाया और उन्हें प्रधानमंत्री पद की पेशकश की, लेकिन इंदिरा गांधी ने इसे ठुकरा दिया था।

इंदिरा गांधी ने क्यों ठुकरा दी थी कुर्सी? पुपुल जयकर ने अपनी किताब में भी इसका जिक्र किया है। वे लिखती हैं कि इंदिरा गांधी ने लाल बहादुर शास्त्री के अनुरोध को अस्वीकार कर दिया था क्योंकि वह महसूस कर रही थीं कि अगर वे अभी से प्रधानमंत्री बन गईं तो बर्बाद हो जाएंगी और अपना ही नुकसान कर बैठेंगी।

हालांकि शास्त्री ने उनसे आग्रह किया कि उनके बगैर वे मजबूत सरकार नहीं बना पाएंगे, ऐसे में उन्हें कम से कम मंत्री पद जरूर ग्रहण करना चाहिए। शास्त्री के अनुरोध के बाद उन्होंने सूचना और प्रसारण मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाली थी।

शास्त्री के निधन के बाद कस चुकी थीं कमर: हालांकि प्रधानमंत्री बनने के करीब 2 साल के अंदर ही 11 जनवरी 1966 को ताशकंद में लाल बहादुर शास्त्री का रहस्यमय परिस्थितियों में निधन हो गया। उनके निधन के बाद एक बार फिर पीएम को लेकर रस्साकशी शुरू हुई।

लेकिन इस बार इंदिरा गांधी कमर कस चुकी थीं। कांग्रेस के एक धड़े के नेताओं को इसका संकेत भी दे दिया था। आखिरकार तमाम कवायद के बाद 19 जनवरी 1966 को इंदिरा गांधी देश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं।