विकास दुबे केस: डीआईजी अनंत देव ने न्यायिक आयोग के सामने कबूला, खजांची को जानता था; नए खुलासे से खलबली, कई और पुलिसवाले दोषी

पिछले साल 2 और 3 जुलाई की रात कानपुर के बिकरू गांव में विकास दुबे ने अपने गुर्गों के साथ मिलकर 8 पुलिसकर्मियों को मार डाला था। इतनी बड़ी घटना के बाद राज्य की राजनीति में हड़कंप मच गया था।

Bikru Case, Gangster Vikas Dubey 9 जुलाई 2020 को गैंगस्टर विकास दुबे की उज्जैन में गिरफ्तारी के बाद ले जाती पुलिस। (फोटो- इंडियन एक्सप्रेस फाइल)

कानपुर के चर्चित बिकरू कांड की न्यायिक आयोग जांच में नया खुलासा हुआ है। तत्कालीन डीआईजी अनंत देव ने आयोग के सामने कबूल किया है कि वे बदमाश विकास दुबे के खजांची जय बाजपेई को जानते थे। विकास तक रुपए और असलहा पहुंचाने में उसका खजांची जय बाजपेई ही मुख्य मददगार था। इस खुलासे से पुलिस विभाग में खलबली मच गई है। न्यायिक आयोग ने डीआईजी अनंत देव समेत कई सीनियर पुलिस अधिकारियों को दोषी माना है। इससे पहले विशेष जांच टीम (Special Investigation Team) एसआईटी भी इनको दोषी साबित कर चुकी है।

पिछले साल 2 और 3 जुलाई की रात कानपुर के बिकरू गांव में विकास दुबे ने अपने गुर्गों के साथ मिलकर 8 पुलिसकर्मियों को मार डाला था। इतनी बड़ी घटना के बाद राज्य की राजनीति में हड़कंप मच गया था। घटना का मुख्य आरोपी विकास दुबे की पहुंच काफी ऊपर तक थी, लेकिन अपने ही साथियों की हत्या होने और दबाव बढ़ने पर पुलिस ने उसे पकड़ने के लिए दिनरात एक कर दी थी।

काफी मशक्कत के बाद मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर से 9 जुलाई की रात उसे गिरफ्तार किया जा सका, लेकिन कानपुर तक पहुंचने से पहले ही कथित तौर पर गाड़ी पलटने से वह पुलिस के चंगुल से छूटकर भागने लगा और फिर पुलिस ने उसे एनकाउंटर में मार गिराया।

न्यायिक आयोग की जांच में डीआईजी अनंत देव के खुलासे के बाद अब यह साफ हो गया कि पुलिसकर्मियों से विकास दुबे के घनिष्ठ संबंध थे। जांच में दोषी सभी पुलिसकर्मियों के खिलाफ अब कार्रवाई शुरू होगी। जिन पुलिस वालों पर विकास दुबे को शरण देने, उस पर नरमी बरतने के आरोप साबित हुए हैं, उनमें पूर्व एसपी ग्रामीण प्रद्युम्न सिंह, डीएसपी सूक्ष्म प्रकाश, आरके चतुर्वेदी, करुणाशंकर राय, पासपोर्ट नोडल अफसर अमित कुमार, नंदलाल प्रताप, हरेंद्र कुमार यादव, सुंदरलाल, प्रेम प्रकाश, राम प्रकाश, सुभाष चंद्र और लक्ष्मी निवास शामिल हैं। आयोग ने इन सभी के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की है।

इसके अलावा बिकरू कांड में 34 आरोपियों पर पुलिस ने गैंगस्टर की कार्रवाई की है। अब इन सभी आरोपियों की संपत्ति जब्त की जाएगी। एडीजी जोन ने सभी आरोपियों की संपत्ति की डिटेल जुटाने के लिए 10 दिन का वक्त दिया है।

विकास दुबे का आपराधिक इतिहास काफी बड़ा है। उस पर विभिन्न थानों में दर्जनों केस दर्ज थे, लेकिन घटना के बाद से कई थानों से उसकी फाइल गायब हो गई। आयोग की जांच से पता चला कि 21 केसों की फाइलें अभी तक नहीं मिल सकी हैं। इसमें से 11 फाइलें शिवली थाने की हैं। 4 कल्याणपुर, 5 चौबेपुर और 1 बिल्हौर की शामिल है।

पूर्व में एसआईटी भी इन राजपत्रित अधिकारियों को आरोपियों से मिलीभगत, लापरवाही के आरोपों में दोषी ठहरा चुकी है। इनमें चार अफसरों के खिलाफ वृहद दंड के तहत पीठासीन अधिकारी आईजी रेंज लखनऊ लक्ष्मी सिंह सुनवाई कर रही हैं। अन्य को लघु दंड के तहत दंडित किया गया। बिकरू कांड की जांच के लिए न्यायिक आयोग का गठन किया गया था। आयोग ने शहर में तैनात रहे डीआईजी अनंत देव, , तत्कालीन सीओ कैंट आरके चतुर्वेदी, तत्कालीन सीओ एलआईयू सूक्ष्म प्रकाश को वृहद दंड के तहत दोषी ठहराया गया है। विभागीय कार्रवाई इन सभी राजपत्रित अफसरों के खिलाफ जारी है।

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