वीरेंद्र सहवाग ने ओपनर बनने से पहले सौरव गांगुली के सामने रखी थी ये शर्त, लक्ष्मण ने कहा था- करियर हो जाएगा खत्म

सहवाग ने 104 टेस्ट में 8586 रन बनाए। बतौर ओपनर उनके नाम 99 टेस्ट में 8207 रन बनाए थे। सहवाग के ओपनर बनने की कहानी काफी रोमांचक है। इसके लिए सौरव गांगुली और उनके बीच काफी बहस हुई थी।

Virender Sehwag, Sourav Ganguly

वीरेंद्र सहवाग को टेस्ट क्रिकेट में सुनील गावस्कर के बाद भारत का सर्वश्रेष्ठ ओपनर माना जाता है। इसके पीछे टीम इंडिया के पूर्व कप्तान और बीसीसीआई के मौजूदा अध्यक्ष सौरव गांगुली का योगदान था। सहवाग ने 104 टेस्ट में 8586 रन बनाए। बतौर ओपनर उनके नाम 99 टेस्ट में 8207 रन बनाए थे। सहवाग के ओपनर बनने की कहानी काफी रोमांचक है। इसके लिए सौरव गांगुली और उनके बीच काफी बहस हुई थी। वीवीएस लक्ष्मण ने तो वीरू से कह दिया था कि करियर बर्बाद हो जाएगा।

सहवाग ने सौरव गांगुली के बंगाली शो ‘दादागिरी’ में अपने ओपनर बनने की कहानी सुनाई थी। इस दौरान शो पर जहीर, लक्ष्मण, हरभजन सिंह और रविचंद्रन अश्विन भी मौजूद थे। सहवाग ने कहा था, ‘‘दादा ने मुझे टेस्ट मैचों में भी ओपनिंग करने के लिए कहा था। मैं वनडे में काफी ओपनिंग कर चुका था। इंग्लैंड पहुंचने पर दादा ने मुझसे कहा कि टेस्ट मैचों में तुमने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ डेब्यू में शतक लगाया था। श्रीलंका में ओपनिंग करते हुए रन बनाए, लेकिन यहां मध्यक्रम में जगह नहीं मिलेगी। मध्यक्रम में राहुल द्रविड़, सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली और वीवीएस लक्ष्मण थे। मुझे बाहर बैठना पड़ सकता था।’’

सहवाग ने इसके सुनाया, ‘‘उन्होंने (गांगुली) कहा कि तुम ओपनिंग करो। मैंने उनसे पूछा कि आप भी तो मध्यक्रम में हो, आप ओपनिंग कर लो तो मैं मध्यक्रम में खेल लूंगा। इस पर उन्होंने मुझसे कहा कि मैं कैप्टन हूं, मेरा जहां मन करेगा मैं वहां खेलूंगा। मैंने कहा कि सचिन तेंदुलकर से कराओ तो उन्होंने कहा कि तुम उनसे (सचिन) बात कर लो। अगर वो मान गए तो ठीक। फिर मैंने सोचा कि कौन सचिन से बात करें। अंत में मैंने लक्ष्मण से सलाह ली। तो उन्होंने कहा कि मैंने ओपनिंग की है तू बिल्कुल मत करना। तेरा करियर खत्म हो जाएगा। तेरे को वापस मौका मुश्किल से मिलेगा।’’

सहवाग ने इसके आगे कहा, ‘‘फिर मैंने दादा से कहा कि अगर मैं ओपनर के तौर पर फेल हुआ तो मुझे मध्यक्रम में दोबारा वैसा मिलेगा। तो उन्होंने कहा कि मिलेगा। मैंने उनसे कहा कि मुझे लिखकर दो। फिर मैंने दादा से पेपर पर लिखवाया। उसके बाद से ऐसी नौबत आई नहीं कि मुझे मध्यक्रम में दोबारा मौका मिले। इसके लिए दादा को धन्यवाद। अगर वो मुझे टेस्ट मैचों में ओपनर नहीं बनाते तो जितने मैंने शतक या रन बनाए वह नहीं बना पाता।’’