वैक्सीन उत्पादन पर किया सवाल तो बोले केंद्रीय मंत्री- क्या हम फांसी पर लटक जाए

बेंगलुरु में एक प्रेस मीट के दौरान यह वाकया हुआ। सदानंद गौड़ा से एक पत्रकार ने सवाल किया था कि सूबे में लगातार मौतें हो रही हैं। सरकार के पास कोविड से निपटने का कोई इंतजाम है भी या नहीं। उनका अगला सवाल वैक्सीन के टोटे पर था। यहीं पर गौड़ा बिफऱ गए और अजीबोगरीब बयान दे डाला।

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कोरोना संकट में मोदी सरकार और बीजेपी का रवैया कुछ ऐसा है मानो उन्हें कोई ज्यादा मतलब नहीं लोगों के दुख दर्द से। केंद्रीय मंत्री सदानंद गौड़ा ने बेंगलुरु में आज वैक्सीन के कम उत्पादन को लेकर पूछे गए एक सवाल पर कहा कि क्या इके लिए हम फांसी पर लटक जाए।

दरअसल, बेंगलुरु में एक प्रेस मीट के दौरान यह वाकया हुआ। सदानंद गौड़ा से एक पत्रकार ने सवाल किया था कि सूबे में लगातार मौतें हो रही हैं। सरकार के पास कोविड से निपटने का कोई इंतजाम है भी या नहीं। उनका अगला सवाल वैक्सीन के टोटे पर था। यहीं पर गौड़ा बिफऱ गए और अजीबोगरीब बयान दे डाला। पत्रकार ने उनसे पूछा था कि कोर्ट कह रही है कि देश के सभी लोगों को वैक्सीन लगाने के बाद ही कोरोना से बेहतर जंग लड़ी जा सकती है। गौरतलब है कि गौड़ा बेंगलुरु नार्थ सीट से सांसद हैं।

उनकी बात सुनने के बाद प्रेस मीट में अजीब तरह का माहौल पैदा हो गया। मीट में मौजूद बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव सीटी रवि ने स्थिति को संभालने की कोशिश की। उनका कहना था कि सरकार हर संभव कोशिश कर रही है लोगों को राहत देने की। उनका कहना है कि कुछ तैयारियां कोरोना की तीखी लहर से धरी की धरी रह गईं। रवि ने भी इस बीच एक अटपटा बयान दिया।

जब उनसे कोर्ट की टिप्पणियों के बारे में पूछा गया तो उनका कहना था कि जज सर्वज्ञाता नहीं हैं। सरकार के पास जो संसाधन मौजूद हैं उनके जरिए कोरोना से लड़ाई लड़ी जा रही है। टेक्निकल एडवाइजरी कमेटी जो अनुशंसा करेगी उसके आधार पर सरकार फैसला लेगी। उनका कहना था कि सरकार की वजह से ही मौत का आंकड़ा इतना कम दिख रहा है। नहीं तो ये दस क्या सौ गुना तक ऊपर हो जाता।

उधर,  ताजा आंकड़ों में कोरोना वायरस के मामले में महाराष्ट्र को पछाड़कर कर्नाटक देश में पहले नंबर पर आ गया है। सोमवार को आए आंकड़ों में कर्नाटक में कोरोना के 39 हजार 305 मामले दर्ज किए गए, जो देश में सबसे ज्यादा हैं। कर्नाटक में कोरोना के 39,305 नए मामले आए और 596 मौतें दर्ज की गईं। पहली बार कोरोना केसेज की लिस्ट में महाराष्ट्र दूसरे नंबर पर पहुंच गया है।