वो देखो मद्रासन आ गई- हेमा मालिनी का मजाक उड़ाती थीं फिल्म निर्माताओं की पत्नियां, पहनावे पर करती थीं कमेंट

हेमा मालिनी ने अपने इंटरव्यू में बताया था कि फिल्म निर्माताओं की पत्नियां उनका मजाक बनाती थीं और कहती थीं ‘वो देखो मद्रासन आ गई।’

hema malini dharmendra बॉलीवुड की मशहूर एक्ट्रेस हेमा मालिनी (फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस)

बॉलीवुड की मशहूर एक्ट्रेस हेमा मालिनी ने अपनी फिल्मों और अपने अंदाज से लोगों का खूब दिल जीता है। हेमा मालिनी को उनकी एक्टिंग के साथ-साथ उनके फैशनसेंस के लिए भी खूब जाना जाता है। हेमा मालिनी अकसर कांजीवरम साड़ियों में नजर आती हैं जो उनपर काफी जचती भी हैं। लेकिन एक वक्त ऐसा भी था जब लोग एक्ट्रेस के पहनावे को लेकर उनका मजाक बनाते थे और उनपर कमेंट भी करते थे। इस बात का जिक्र खुद हेमा मालिनी ने फिल्मफेयर को दिए इंटरव्यू में किया था।

साल 2015 में दिए इंटरव्यू में हेमा मालिनी ने बताया था कि उनकी मां जया चक्रवर्ती उन्हें पारंपरिक साड़ियां पहनाती थीं। वह भले ही मां की इस बात का विरोध करती थीं, लेकिन सब व्यर्थ जाता था। हेमा मालिनी ने इस बारे में कहा, “मेरी मां ही मुझे भारी कांजीवरम साड़ियां पहनाती थीं। मैं इसका विरोध करती थी, लेकिन उनपर इसका कोई असर नहीं होता था।”

हेमा मालिनी ने लोगों के रिएक्शन का जिक्र करते हुए बताया था, “फिल्म निर्माताओं की पत्नियां जो खासकर पंजाबी होती थीं, मेरी साड़ी और ब्लाउज का मजाक बनाती थीं। वह कहती थीं, “वो देखो मद्रासन आ गई।” मां का जिक्र करते हुए हेमा मालिनी ने कहा था, “मुझे बनाने में मेरी मां का सबसे ज्यादा हाथ है। मैं जो कुछ भी आज हूं, अपनी मां के कारण हूं।”

हेमा मालिनी ने मां के बारे में बात करते हुए कहा, “उन्होंने मुझे शास्त्रीय नृत्य सीखने के लिए प्रेरित किया। अगर मैं डांसर न होती तो मुझे ये सब कभी न मिलता।” बता दें कि हेमा मालिनी ने राज कपूर की फिल्म सौदागर से बॉलीवुड में कदम रखा था। फिल्म के प्रीमियर पर हेमा मालिनी की मुलाकात पहली बार धर्मेंद्र से हुई थी।

हेमा मालिनी ने इस किस्से को अपनी बायोग्राफी ‘बियॉन्ड द ड्रीमगर्ल’ में भी साझा किया था। उन्होंने बताया था कि प्रीमियर पर वह साड़ी पहने, बालों में गजरा लगाकर पहुंची थीं। जब वह स्टेज पर जाने लगीं तो धर्मेंद्र ने उन्हें देखा और शशि कपूर से कहा, “कुड़ी बड़ी चंगी है।” हालांकि उनकी इस बात को हेमा मालिनी ने अनदेखा करना ही बेहतर समझा था।