शताब्दी और दुरंतो समेत कई एक्सप्रेस ट्रेनें रद्द, रेलवे ने कहा कोरोना की वजह से नहीं मिल रहे यात्री

इनमें दिल्ली से कालका, हबीबगंज, अमृतसर, चंडीगढ़ के लिए रवाना होने वाली शताब्दी ट्रेनें, दिल्ली से चेन्नई, बिलासपुर जाने वाली राजधानी एक्सप्रेस, जम्मू तवी और पुणे जैसी जगहों के लिए दुरंतो ट्रेनें शामिल हैं।

Northern Railway, Covid-19

उत्तर रेलवे ने बृहस्पतिवार कई राजधानी, शताब्दी और दुरंतो एक्सप्रेस ट्रेनें रद्द कर दी। रेलवे ने इस फैसले के लिए कम यात्री होने और कोरोना वायरस मामलों की बढ़ोतरी को कारण बताया। इस बीच रेलवे ने कहा कि उसने अभी तक देश भर के विभिन्न राज्यों में लगभग 2,511 टन तरल चिकित्सकीय ऑक्सीजन के साथ 161 टैंकर पहुंचाए हैं।

रेलवे ने कहा कि 40 ऑक्सीजन एक्सप्रेस ट्रेनों ने अभी तक अपनी यात्रा पूरी कर ली है। उसने कहा कि मध्य प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली के लिए 400 टन से अधिक एलएमओ के साथ 22 टैंकर रास्ते में हैं। उत्तर रेलवे द्वारा 28 ट्रेनें रद्द की गई हैं। इसमें आठ शताब्दी एक्सप्रेस, दो राजधानी एक्सप्रेस, दो दुरंतो एक्सप्रेस और एक वंदे भारत एक्सप्रेस की सेवाएं शामिल हैं। उत्तर रेलवे ने इन ट्रेनों को ‘‘अगली सूचना तक’’ रद्द कर दिया है। इनमें दिल्ली से कालका, हबीबगंज, अमृतसर, चंडीगढ़ के लिए रवाना होने वाली शताब्दी ट्रेनें, दिल्ली से चेन्नई, बिलासपुर जाने वाली राजधानी एक्सप्रेस, जम्मू तवी और पुणे जैसी जगहों के लिए दुरंतो ट्रेनें शामिल हैं।

अधिकारियों ने कहा कि लोकप्रिय ट्रेनों में यात्रियों की कम संख्या से यह पता चलता है कि कोरोना वायरस मामलों में वृद्धि के बीच कम संख्या में लोग यात्रा कर रहे हैं।

उत्तर रेलवे के प्रवक्ता ने कहा, ‘‘उत्तर रेलवे ने यात्रियों की कम संख्या और कोविड-19 मामलों में वृद्धि के कारण निम्नलिखित विशेष ट्रेनों को रद्द करने का फैसला किया है।’’

मध्य रेलवे ने 23 यात्री ट्रेनों को रद्द कर दिया है। इनमें नागपुर-कोल्हापुर स्पेशल 29 जून तक, सीएसएमटी-कोल्हापुर स्पेशल 1 जुलाई तक, सीएसएमटी-पुणे स्पेशल 30 जून तक शामिल है।

उधर, दिल्ली उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि कोविड-19 संक्रमण के लक्षणों के बारे में आम लोगों के बीच जागरूकता फैलाने की ‘‘तुरंत’’ जरूरत है और बीमारी के बारे में उनकी चिंताओं या सवालों का समाधान करने के संबंध में संसाधनों को सक्रिय किया जाना चाहिए। न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति रेखा पल्ली ने कहा कि सरकार को पहले ऐसे चिकित्सकों, मेडिकल एवं र्निसंग के छात्रों को चिह्नित करने की आवश्यकता है जो लक्षण या संक्रमण के अन्य संकेतों के बारे में फोन करने पर आम आदमी की चिंताओं को दूर कर सकें।