शवों के अंतिम संस्कार के लिए आगे आए सामाजिक संगठन, कहीं परिजन नहीं दे पाए मुखाग्नि तो कहीं अपनों ने ही शव लेने से किया इनकार

एक परिवार तो कोरोना संक्रमण से इतना घबराया हुआ था कि उसने अपने परिजन का शव ही लेने से इंकार कर दिया था। बाद में इन शवों का संस्कार इस टीम के माध्यम से किया गया।

corona, Covid-19,Dead body

कोरोनाकाल ने दो गज की दूरी हर खास और आम नागरिक को सिखाई है। लेकिन इस संकट के काल में कुछ ऐसे परिवार भी थे जो अपने परिवारों से कोसो दूर थे और उन्हें मुखाग्नि तक देने वाला कोई नहीं था। ऐसे शवों को आखिरी यात्रा से लेकर मुखाग्नि देने के लिए समाजसेवी संगठन सामने आए हैं। ये मामले दक्षिणी दिल्ली के पॉश इलाकों में सामने आए हैं, जहां लोगों के पास अपने परिवार का सहयोग करने का कोई आर्थिक संकट नहीं था।

सामाजिक कार्यकर्ताओं की मदद से ऐसी एक छोटी सी पहल भाजपा नेता सतीश उपाध्याय ने शुरू की थी। उन्होंने बताया कि उनके पास सूचना आई थी एक 80 साल की वृद्धा की मौत सैनिक फार्म इलाके में कोरोना संक्रमण की शिकार है और उनके परिवार के लोग विदेश में रहते हैं। इस महिला को ऑक्सीजन की कमी का सामना करना पड़ रहा था। जब टीम मौके पर ऑक्सीजन लेकर पहुंची तो उपचार के दौरान महिला की मौत हो गई थी। जब परिवार के लोग उनके संस्कार के लिए उपलब्ध नहीं हुए तो उन्होंने अपनी टीम के साथ इस महिला का दाह संस्कार ग्रीन पार्क में कराया।

यह एक अकेला ऐसा मामला नहीं है। दक्षिणी दिल्ली के हौज खास, लाजपत नगर और गोल मार्केट में भी ऐसे ही मामले सामने आए थे। इन परिवारों के लोग भी कोरोना संक्रमण की वजह से अपने परिवारों के लोगों के संस्कार के लिए आगे नहीं आए। इन लोगों में दो पुरुष और एक महिला का शव शामिल था। एक परिवार तो कोरोना संक्रमण से इतना घबराया हुआ था कि उसने अपने परिजन का शव ही लेने से इंकार कर दिया था। बाद में इन शवों का संस्कार इस टीम के माध्यम से किया गया। उन्होंने बताया कि दिल्ली ही नहीं बैंकुंट धाम में अध्योध्या में ऐसी ही स्थिति सामने आई है। लोगों के पास लकड़ी खरीदने के पैसे नहीं थे, उनकी सहायता के लिए टीम ने 51 हजार रुपए भेजे हैं।

यहां पर मनमीत व राकेश शुक्ला काम को देख रहे हैं। कई जगह पर लोगों ने सरयू नदी में शवों को बहा दिया था। अब तक टीम ने वहां 35 लोगों का का संस्कार किया है। सतीश उपाध्याय ने बताया कि इस टीम से करीब 150 लोग जुड़े हुए है जो कि इस संकट के काल में आम जनता की जरूरतों को ध्यान में रखकर खानपान की सेवा की साथ पहल शुरू की थी। बाद में जिन प्रकार की परेशानियां सामने आती गई उस प्रकार से टीम का दायरा भी बढ़ाया गया।

इस मामले में हर दिन 10 बजे बैठक करते हैं और 1250 लोगों को प्रतिदिन खाना पहुंचाया जा रहा है। इस टीम की मदद से ग्रेटर कैलाश, लाजपत, चांदनी चौक, बाड़ा हिंदूराव, जनकपुरी व मयूर विहार में भी किचन शुरू किया है। इनमें जनकपुरी व द्वारका में ऐसे प्वाइंट जो घर पर बनाते दे रहे हैं।