शीर्ष अदालत ने केंद्र से कहा सख्ती पर नहीं करें मजबूर, दिल्ली को रोजाना 700 मीट्रिक टन ऑक्सीजन आपूर्ति जारी रखनी होगी

पीठ ने कहा, ‘हम चाहते हैं कि दिल्ली को 700 मीट्रिक टन एलएमओ दी जाए और हमारा मतलब है कि यह निश्चित तौर पर होना चाहिए। इसकी आपूर्ति करनी ही होगी और हम दंडात्मक कार्रवाई नहीं करना चाहते। हमारे आदेश को अपलोड होने में दोपहर तीन बजेंगे लेकिन आप काम पर लगें और ऑक्सीजन का प्रबंध करें।’

Author भाषा Edited By Sanjay Dubey नई दिल्ली | May 8, 2021 3:42 AM
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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र को साफ कर दिया कि उसे शीर्ष अदालत के अगले आदेश तक रोजाना दिल्ली को 700 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की आपूर्ति जारी रखनी होगी। इसके साथ ही न्यायालय ने कहा कि इसपर अमल होना ही चाहिए और इसके अनुपालन में कोताही उसे ‘सख्ती’ करने पर मजबूर करेगी।
दो दिन पहले, शीर्ष अदालत ने दिल्ली को कोविड के मरीजों के लिए 700 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की आपूर्ति के निर्देश का अनुपालन नहीं करने पर केंद्र सरकार के अधिकारियों के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा शुरू की गई अवमानना की कार्यवाही पर यह कहते हुए रोक लगा दी थी कि अधिकारियों को जेल में डालने से ऑक्सीजन नहीं आएगी। पीठ ने कहा कि प्रयास जिंदगियों को बचाने के लिए किए जाने चाहिए।

हालांकि, न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति एमआर शाह के पीठ ने कहा कि केंद्र को राष्ट्रीय राजधानी को हर दिन 700 मीट्रिक टन तरल चिकित्सीय ऑक्सीजन (एलएमओ) की आपूर्ति सुनिश्चित करनी होगी। वीडियो कॉन्फें्रसिंग के जरिए हुई कार्यवाही में दिल्ली सरकार की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता राहुल मेहरा ने शुक्रवार को पीठ को बताया कि राष्ट्रीय राजधानी को आज सुबह नौ बजे तक 86 मीट्रिक टन ऑक्सीजन मिली और 16 मीट्रिक टन मार्ग में है। पीठ ने कहा, ‘हम चाहते हैं कि दिल्ली को हर दिन 700 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की आपूर्ति की जाए और यह होना ही चाहिए, हमें उस स्थिति में आने पर मजबूर न करें जहां हमें सख्त होना पड़े।’

पीठ ने कहा, ‘हम चाहते हैं कि दिल्ली को 700 मीट्रिक टन एलएमओ दी जाए और हमारा मतलब है कि यह निश्चित तौर पर होना चाहिए। इसकी आपूर्ति करनी ही होगी और हम दंडात्मक कार्रवाई नहीं करना चाहते। हमारे आदेश को अपलोड होने में दोपहर तीन बजेंगे लेकिन आप काम पर लगें और ऑक्सीजन का प्रबंध करें।’ इससे पहले शीर्ष अदालत ने कहा था कि यह पूरे भारत में वैश्विक महामारी की स्थिति है और हमें राष्ट्रीय राजधानी को ऑक्सीजन आपूर्ति सुनिश्चित करने के तरीके तलाश करने होंगे।

ऑक्सीजन मामले में कर्नाटक हाई कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप से इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को कोविड-19 मरीजों के इलाज के वास्ते राज्य के लिए ऑक्सीजन का आबंटन 965 मीट्रिक टन से बढ़ाकर 1,200 मीट्रिक टन करने का निर्देश देने के कर्नाटक हाई कोर्ट के आदेश में शुक्रवार को हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। न्यायालय ने कहा कि कर्नाटक के लोगों को लड़खड़ाते हुए नहीं छोड़ा जा सकता है।

न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति एमआर शाह के पीठ ने कहा कि पांच मई का हाई कोर्ट का आदेश जांचा-परखा और शक्ति का विवेकपूर्ण प्रयोग करते हुए दिया गया है। शीर्ष अदालत ने केंद्र की उस दलील को स्वीकार करने से इनकार कर दिया कि अगर प्रत्येक हाई कोर्ट ऑक्सीजन आबंटन करने के लिए आदेश पारित करने लगा तो इससे देश के आपूर्ति नेटवर्क के लिए परेशानी खड़ी हो जाएगी।

पीठ ने केंद्र सरकार की तरफ से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को कहा कि उसने घटनाक्रम का अध्ययन किया है और वह कह सकती है कि यह कोविड-19 के मामलों की संख्या को संज्ञान में लेने के बाद पूरी तरह से परखा हुआ, विचार किया हुआ और शक्ति का विवेकपूर्ण प्रयाग करते हुए लिया गया फैसला है। हम इसमें हस्तक्षेप नहीं करेंगे। इसमें कहा गया कि आदेश केंद्र को राज्य सरकार के प्रतिवेदन पर विचार करने से और तरल चिकित्सीय ऑक्सीजन (एलएमओ) की आपूर्ति के समाधान की प्रणाली पर परस्पर काम करने से रोकता नहीं है।

मेहता ने कहा कि हर राज्य को ऑक्सीजन चाहिए, लेकिन उनकी चिंता यह है कि अगर प्रत्येक हाई कोर्ट उक्त मात्रा में एलएमओ आबंटन का निर्देश देने लगें तो यह बड़ी समस्या हो जाएगी। पीठ ने कहा कि वह व्यापक मुद्दे पर गौर कर रही है और हम कर्नाटक के नागरिकों को लड़खड़ाते हुए नहीं छोड़ सकते हैं। पीठ ने कहा कि उच्च न्यायालय ने तथ्यों व परिस्थितियों पर विचार किए बिना आदेश पारित नहीं किया है और यह राज्य सरकार द्वारा कोविड-19 मामलों को देखते हुए न्यूनतम 1,165 मीट्रिक टन एलएमओ के अनुमान पर आधारित है।

पीठ ने कहा कि उच्च न्यायालय ने अस्थायी आदेश पारित करने के लिए पर्याप्त कारण बताए हैं, यह ध्यान रखते हुए कि राज्य सरकार द्वारा न्यूनतम 1,165 मीट्रिक टन एलएमओ की मांग का अनुमान रखा गया था। हाई कोर्ट का निर्देश केवल कुछ समय के लिए है और यह केंद्र व राज्य के बीच परस्पर समाधान प्रणाली से रोकता नहीं है। पीठ ने यह भी कहा कि हाई कोर्ट ने ऑक्सीजन की कमी के चलते चामराजनगर, कलबुर्गी और अन्य स्थानों पर हुई लोगों की मौत पर भी विचार किया है। पीठ ने आगे कहा कि न्यायाधीश भी इंसान होते हैं और वे भी लोगों की पीड़ा को देख रहे हैं। हाई कोर्ट अपनी आंखें बंद नहीं रखते हैं। केंद्र ने गुरुवार को अपील दायर कर कहा था कि हाई कोर्ट ने बंगलुरु शहर में ऑक्सीजन की कथित कमी के आधार पर आदेश पारित किया है और इससे एलएमओ के आपूर्ति नेटवर्क व्यवस्था पर बुरा प्रभाव पड़ेगा और यह व्यवस्था पूरी तरह ढह जाएगी।