संतों, दलितों व पूर्व सैनिकों को साधा नड्डा ने

उत्तराखंड में 2022 के विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने दो दिन तक देवभूमि में डेरा डाला और संतों, दलितों से लेकर पूर्व सैनिकों तक को साधने का काम किया।

जेपी नड्डा। फाइल फोटो।

सुनील दत्त पांडेय

उत्तराखंड में 2022 के विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने दो दिन तक देवभूमि में डेरा डाला और संतों, दलितों से लेकर पूर्व सैनिकों तक को साधने का काम किया। जहां उन्होंने हिंदुत्व के एजंडे को आगे बढ़ाया, वहीं सेना के दमखम और दलित प्रेम दिखाकर सामाजिक समरसता के एजंडे का संदेश जनमानस में दिया।

नड्डा पार्टी के खास कार्यकर्ता से लेकर आम कार्यकर्ता से सीधे मिले। भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा पर माला पहनाकर और दलित कार्यकर्ता के घर नाश्ता कर और राखी बंधवा कर उन्होंने दलित मतदाताओं को साधने का काम किया। वहीं, उन्होंने राज्य की पुष्कर सिंह धामी सरकार को चुनाव से पहले धरातल पर काम करने की नसीहत भी दी और संगठन को चुनाव जीतने के लिए बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत बनाने के दिशानिर्देश भी दिए। नड्डा ने पार्टी के सांसदों, विधायकों, मुख्यमंत्री, राज्य के सभी मंत्रियों, नगर निगम के मेयर, नगर पालिकाओं के अध्यक्ष और पार्षदों व सभासदों के साथ सीधा संवाद किया। इसके अलावा उन्होंने पार्टी की कोर कमेटी की बैठक भी ली और चुनाव में पार्टी की एकजुटता पर जोर दिया।

जब से आम आदमी पार्टी ने सेवानिवृत्त कर्नल अजय कोठियाल को मुख्यमंत्री के चेहरे के रूप में उत्तराखंड में पेश किया है, तब से भाजपा के लिए पूर्व सैनिकों के मतों को साधना एक बड़ी समस्या हो गई है। अब तक उत्तराखंड में पूर्व सैनिक भाजपा का जबरदस्त वोट बैंक माने जाते थे लेकिन कर्नल कोठियाल के आने से आम आदमी पार्टी ने भाजपा के इस वोट बैंक पर सेंधमारी करने की कोशिश की है। अब अपने वोट बैंक को बचाना भाजपा के लिए पहली प्राथमिकता है। इसलिए इस बार भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने पूर्व सैनिकों से देहरादून जिले के सैनिक बाहुल्य क्षेत्र रायवाला में सीधे संवाद करना उचित समझा। वे पूर्व सैनिकों के बीच में गए और उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वास्ता देकर यह समझाया कि केंद्र सरकार ने सैनिकों के लिए क्या-क्या सुविधाएं दी हैं और किस तरह से भारतीय सेना का मनोबल बढ़ाया है। इस तरह उन्होंने पूर्व सैनिकों और उनके परिवारजनों को साधने का काम किया।

दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने देहरादून में उत्तराखंड को पूरे विश्व की आध्यात्मिक राजधानी बनाएंगे की बात कही। ऐसा कर केजरीवाल ने भाजपा के हिंदू मतदाताओं को अपनी ओर आकर्षित करने का काम किया। इसकी काट के लिए दौरे के समापन पर जेपी नड्डा ने साधु संत समागम और आशीर्वाद कार्यक्रम में भाग लेकर हिंदू वोटों को साधने का काम किया। संतों के बीच में नड्डा ने यह बताया कि प्रधानमंत्री ने अफगानिस्तान में रह रहे हिंदू और सिख समुदाय के लोगों को सुरक्षित भारत लाने के लिए क्या क्या प्रयास किए।

साथ ही उन्होंने अफगानिस्तान में तालिबान द्वारा हिंदुओं और सिख समुदाय पर किए गए जुल्मों की ओर भी इशारा करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) लागू करके किस तरह हिंदुओं और सिखों की रक्षा के लिए महत्त्वपूर्ण कार्य किया। भाजपा अध्यक्ष ने संतों को याद दिलाया कि प्रधानमंत्री ने भाजपा के एजंडे में प्रमुखता से शामिल राम मंदिर के निर्माण के लिए न्यायालय का सम्मान करते हुए राम जन्म स्थली अयोध्या में राम मंदिर की आधारशिला रखी। अब वहां पर भव्य दिव्य राम मंदिर का निर्माण जारी है। इस तरह उन्होंने संतों और भाजपा को एक दूसरे का पूरा बताते हुए कहा कि भाजपा हमेशा संतों का सम्मान करती है। संत सम्मेलन में मौजूद एक-एक संत के जेपी नड्डा ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ चरण स्पर्श किए, उन्हें माला पहनाई, अंग वस्त्र भेंट किए और उनके चरण छूकर आशीर्वाद लिया। साधु-संतों ने भी दिल खोल कर जेपी नड्डा को आशीर्वाद दिया और प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री और जेपी नड्डा की खुलकर तारीफ की।

श्री पंचायती उदासीन अखाड़ा के महामंडलेश्वर और प्राचीन अवधूत मंडल के अध्यक्ष स्वामी रूपेंद्र प्रकाश महाराज ने कहा कि संतों की एक ही इच्छा थी कि अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण हो और प्रधानमंत्री ने वहां पर राम मंदिर की आधारशिला रखकर संतों की भावनाओं का सम्मान किया। संतों की आचार्य सभा के अध्यक्ष और श्री पंचायती महानिर्वाणी अखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी विश्वेरानंद गिरि ने कहा कि नरेंद्र मोदी देश के ऐसे पहले प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने 2014 में शपथ ग्रहण समारोह में संतों को बुलाकर उनका सम्मान किया। इससे संत समुदाय गौरवान्वित है।

महामंडलेश्वर हरिचेतनानंद महाराज ने कुंभ के बाद संतों के सम्मान परंपरा का निर्वहन राज्य सरकार द्वारा करने और मठ, मंदिरों, आश्रम और अखाड़ों में सीवर-पानी के व्यवसाय कर को घरेलू कर में बदलने की मांग की। मौके की नजाकत को समझते हुए राज्य के मुख्यमंत्री ने तुरंत एलान किया कि संतों का जल्दी ही सम्मान समारोह किया जाएगा और संतो के अखाड़ों, आश्रमों, मठों और मंदिरों को व्यवसाय कर से मुक्ति प्रदान कर घरेलू कर के दायरे में लाने की सुविधा प्रदान की जाएगी। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी और राज्यसभा के सदस्य अनिल बलूनी का कहना है कि उत्तराखंड की जनता फिर से राज्य में भाजपा की सरकार बना कर इस मिथक को तोड़ेगी की कि उत्तराखंड की जनता एक बार भाजपा को और एक बार कांग्रेस को राज्य में सरकार बनाने का मौका देती है। उन्होंने कहा कि भारी बहुमत से राज्य में फिर से एक बार 2022 में भाजपा की सरकार बनने जा रही है।