समय बीता लेकिन तस्वीरें वैसी ही- तालिबान के कब्जे के बाद बोले कंधार ले जाए गए भारतीय विमान के पायलट

कप्तान देवी सरन ने कहा कि काबुल हवाई अड्डे के अंदर और बाहर लोगों की भारी भीड़ और रनवे पर विमान में सवार होने के लिए आपाधापी कर रहे लोगों की तस्वीरें दिसंबर 1999 की नहीं भूलने वाली सर्दी की मायूसी की याद दिलाती है।

1999 में हुए कंधार विमान अपहरण में भारत सरकार ने आतंकवादियों द्वारा अगवा किए गए यात्रियों को बचाने के लिए जेलों में बंद चरमपंथियों को रिहा किया था। (एक्सप्रेस आर्काइव)

अफगानिस्तान में तालिबानी हुकूमत आने के बाद से ही बड़ी संख्या में लोग दूसरे देश जाने की कोशिश में लगे हुए हैं। इस वजह से काबुल एयरपोर्ट पर लोगों की भारी भीड़ हर रोज जमा हो रही है। पिछले कुछ दिनों से काबुल एयरपोर्ट की भयावह तस्वीर सामने आ रही है। विमान से लोगों के गिरने और अपने परिवार से बिछड़े मासूम बच्चों के दिलदहलाने वाले दृश्य आम लोगों की आंखों के सामने से गुजर रहे हैं। अफगानिस्तान में उपजे इन हालातों को लेकर दिसंबर 1999 में आतंकवादियों द्वारा भारतीय विमान का अपहरण कर कंधार ले जाए विमान के पायलट ने कहा कि समय बीत गया है लेकिन तस्वीरें अभी भी वैसी ही है।

आतंकवादियों वाला अपहरण किए गए इंडियन एयरलाइंस की उड़ान 814 के कप्तान रहे देवी सरन ने समाचार एजेंसी पीटीआई भाषा को दिए साक्षात्कार में कहा कि पिछले कुछ दिनों से काबुल हवाई अड्डे से आ रही तस्वीरें उन्हें 22 साल पहले की भयावहता की याद दिलाती हैं। यह ऐसा लग रहा है जैसे मैं 22 साल पीछे चला गया हूं। बीस साल से अधिक समय बीत गया लेकिन आज की तस्वीरें वैसी ही हैं।

कप्तान देवी सरन ने कहा कि काबुल हवाई अड्डे के अंदर और बाहर लोगों की भारी भीड़ और रनवे पर विमान में सवार होने के लिए आपाधापी कर रहे लोगों की तस्वीरें दिसंबर 1999 की नहीं भूलने वाली सर्दी की मायूसी की याद दिलाती है। फर्क सिर्फ इतना है कि कंधार में उस वक्त बस हम लोग थे लेकिन अब आप काबुल हवाई अड्डे पर भीड़ देख सकते हैं। लेकिन निश्चित ही वे लोग बाहर आने के लिए आतुर हैं जैसे हम निकलना चाहते थे। 

24 दिसंबर 1999 को शाम चार बजे काठमांडू के त्रिभुवन इंटरनेशनल एयरपोर्ट से इंडियन एयरलाइंस की फ्लाइट संख्या आईसी 814 विमान में सवार यात्रियों को दिल्ली लेकर आ रही थी। तभी विमान में मौजूद रहे अपहरणकर्ताओं ने इंडियन एयरलाइंस के विमान को अगवा कर लिया और पायलट देवी सरन से विमान को लाहौर ले जाने के लिए कहा। लेकिन पाकिस्तान के द्वारा विमान नहीं उतारने की अनुमति दिए जाने के बाद उसे करीब छह बजे अमृतसर में उतारा गया और फिर बिना पाकिस्तान की इजाजत के लाहौर एयरपोर्ट पर उतार दिया गया। 

बाद में आतंकवादी इंडियन एयरलाइंस के आईसी 814 विमान को दुबई के रास्ते कंधार ले गए। यह विमान अपहरण उस दौर में हुआ जब अफगानिस्तान में तालिबानी हुकूमत थी.।इस विमान में करीब 180 यात्री सवार थे। लेकिन अपहरणकर्ताओं ने विमान में मौजूद रहे 25 साल के रूपन कात्याल की चाक़ू गोद कर हत्या कर दी थी। करीब 27 यात्रियों को दुबई में ही रिहा कर दिया गया था।

आतंकवादी बचे हुए बंधकों को छुड़ाने के बदले में भारतीय जेलों में बंद आतंकवादियों की रिहाई की मांग कर रहे थे। बाद में भारत सरकार और आतंकवादियों के बीच हुए समझौते के बाद कंधार एयरपोर्ट पर बंधक बनाए गए 155 यात्रियों को रिहा कर दिया गया और बदले में सरकार ने भारतीय जेलों में बंद कुछ आतंकवादियों को रिहा कर दिया। रिहा किए गए आतंकवादियों में जैश-ए -मोहम्मद का प्रमुख मौलाना मसूद अजहर, अहमद ज़रगर और शेख अहमद उमर सईद शामिल था।