सम्मान से किसी का नाम लेना गलत बात नहीं- ‘चचाजान’ वाले बयान पर बोले राकेश टिकैत, ‘BJP वाले चचाजान क्यों नहीं बोल सकते?’

राकेश टिकैत ने अपने ‘चचाजान’ वाले बयान पर कहा है कि उन्होंने सम्मानित तरीके से ही असदुद्दीन ओवैसी का नाम लिया है और इसमें कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए।

rakesh tikait, asaduddin owaisi, yogi adityanath राकेश टिकैत ने चचाजान वाले अपने बयान का बचाव किया है (Photo-PTI)

आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों को लेकर बयानबाजी अभी से शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘अब्बा जान’ वाले बयान पर विवाद अभी थमा नहीं था कि भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता और किसान नेता राकेश टिकैत ने एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी को बीजेपी का ‘चचाजान’ बता दिया। उन्होंने कहा कि यूपी चुनाव में बीजेपी को कोई दिक्कत नहीं आएगी क्योंकि उनके चचाजान यूपी में आ चुके हैं। अब राकेश टिकैत ने अपने बयान पर एक बार फिर से प्रतिक्रिया दी है।

उन्होंने सफाई देते हुए कहा है कि उन्होंने सम्मानित तरीके से ही ओवैसी नाम लिया है और इसमें कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। आज तक के एक कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने कहा, ‘ये तो गांव के लोग कहते हैं कि दोनों (बीजेपी और एआईएमआईएम) ए और बी टीम है। गांव के लोग बताते हैं ये बातें, आप सर्वे करा लो।’

उन्होंने आगे कहा, ‘किसी को कोई नाम लेकर तो बुलाना पड़ेगा न। और फिर यूपी में आए हैं तो बीजेपी वाले कोई तो नाम देंगे न उन्हें। सम्मान से किसी का नाम लेना कोई गलत धारणा थोड़ी है। बीजेपी वाले चचाजान उनको क्यों नहीं कह सकते हैं? उसमें क्या दिक्कत हो गई?’

राकेश टिकैत ने हापुड़ में एक रैली के दौरान असदुद्दीन ओवैसी को बीजेपी का चचाजान कहा था। उन्हें आरोप लगाया था कि अगर असदुदीन ओवैसी बीजेपी को गाली देते हैं तो भी उनके खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं होता। दोनों एक ही टीम हैं।

उनके इस बयान पर असदुद्दीन ओवैसी की प्रतिक्रिया भी आई है। उन्होंने कहा है कि टिकैत को इस तरह की राजनीति बंद कर देना चाहिए। उनका कहना है कि मुसलमानों को उत्तर प्रदेश की राजनीति में भागेदारी दिलाने के मकसद से उनकी पार्टी चुनाव लड़ेगी, उनका मकसद मुस्लिम वोट को काटना नहीं है।

उन्होंने कहा, ‘मुसलमान किसी राजनीतिक दल के बंधुआ या कैदी नहीं हैं। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव मुझ पर वोट काटने का इल्जाम लगा रहे हैं लेकिन वो क्यों नहीं बताते कि 2019 के लोकसभा चुनाव में 75 फीसदी मुसलमानों ने समाजवादी पार्टी को वोट दिया मगर इसके बावजूद उनकी पत्नी और दोनो भाई चुनाव कैसे हार गए?’